प्रस्तावना प्रशासनिक विधि (Administrative Law) आधुनिक राज्य में शासन के कार्योँ को नियमबद्ध और नियंत्रित करने वाला वह विधिक क्षेत्र है, जो कार्यपालिका (executive) और उसके अधीनस्थ संस्थाओं व अधिकारियों के कार्य-प्रवर्तन, निर्णय-प्रक्रिया तथा उनके दायित्वों और अधिकारों से संबंधित है। यह विधि नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता, जवाबदेही…
Author: KRANTI KISHORE
संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)
📕संवैधानिक उपचार का अधिकार (Right to Constitutional Remedies)संवैधानिक उपचार का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत प्रदान किया गया है, जो नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने का अधिकार देता है। 🔷अनुच्छेद 32 के तहत प्रदत्त रिटअनुच्छेद 32 के तहत, सर्वोच्च न्यायालय निम्नलिखित पाँच…
प्राकृतिक विधि मानव अधिकारों का आधार है?
प्राकृतिक विधि (Natural Law) और मानव अधिकारों का विचार—दोनों दार्शनिक और वैधानिक विमर्श में दीर्घकालीन रहे हैं। प्रश्न यह है कि क्या प्राकृतिक विधि वास्तव में मानव अधिकारों का आधार है, और यदि हां तो इसे आधुनिक कानूनी उपकरणों जैसे कि “मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम” (hypothetical या किसी वास्तविक संहितात्मक नाम के सन्दर्भ में)…
नैसर्गिक अधिकार, विधिक अधिकार और मानव अधिकार
परिचय एक समावेशी और न्यायसंगत समाज की स्थापना के लिए अधिकारों की समझ आवश्यक है। अधिकार (rights) समाज, राज्य और व्यक्ति के बीच संबंधों और जिम्मेदारियों का आधार बनते हैं। सामान्यतः अधिकारों को तीन व्यापक श्रेणियों में बाँटा जाता है: नैसर्गिक अधिकार (natural rights), विधिक अधिकार (legal rights) और मानव अधिकार (human rights)। प्रत्येक श्रेणी…
मानवाधिकारों की अवधारणा
मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो हर मानव को केवल मनुष्य होने के नाते प्राप्त होते हैं। ये अधिकार अप्रत्यक्ष, सार्वभौमिक और अविभाज्य होते हैं। मानवाधिकारों का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्ण जीवन देना और अन्याय, उत्पीड़न एवं भेदभाव से रक्षा करना है। मानवाधिकारों की अवधारणा की शुरुआत आधुनिक काल में हुई, जो मुख्यतः 18वीं…
**पूर्व में बरी और पूर्व में दोषी: सिद्धांत**
**पूर्व में बरी और पूर्व में दोषी: सिद्धांत** ये दोनों सिद्धांत **दोहरे खतरे (Double Jeopardy)** के सिद्धांत से जुड़े हैं। दोहरे खतरे का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता। **पूर्व में बरी (Former Acquittal):** यदि किसी व्यक्ति को…
संविधान की प्रस्तावना: एक अध्ययन
परिचय भारतीय संविधान की प्रस्तावना, जिसे उद्देशिका भी कहा जाता है, संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक भाग है। यह उन मूलभूत मूल्यों, उद्देश्यों और लक्ष्यों को निर्धारित करती है जिन पर भारत का सर्वोच्च कानून आधारित है। प्रस्तावना न केवल संविधान का एक संक्षिप्त सार प्रस्तुत करती है, बल्कि यह भारतीय राज्य के स्वरूप और…