प्रस्तावना “दूसरे पक्ष की सुनो” (Audi alteram partem) न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का एक मौलिक सिद्धांत है। इसका अर्थ है कि किसी पर प्रभाव डालने वाला निर्णय लेने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। यह सिद्धांत प्राकृतिक न्याय (natural justice) का अभिन्न अंग है और भारत में संवैधानिक…
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प्राकृतिक विधि मानव अधिकारों का आधार है?
प्राकृतिक विधि (Natural Law) और मानव अधिकारों का विचार—दोनों दार्शनिक और वैधानिक विमर्श में दीर्घकालीन रहे हैं। प्रश्न यह है कि क्या प्राकृतिक विधि वास्तव में मानव अधिकारों का आधार है, और यदि हां तो इसे आधुनिक कानूनी उपकरणों जैसे कि “मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम” (hypothetical या किसी वास्तविक संहितात्मक नाम के सन्दर्भ में)…
नैसर्गिक अधिकार, विधिक अधिकार और मानव अधिकार
परिचय एक समावेशी और न्यायसंगत समाज की स्थापना के लिए अधिकारों की समझ आवश्यक है। अधिकार (rights) समाज, राज्य और व्यक्ति के बीच संबंधों और जिम्मेदारियों का आधार बनते हैं। सामान्यतः अधिकारों को तीन व्यापक श्रेणियों में बाँटा जाता है: नैसर्गिक अधिकार (natural rights), विधिक अधिकार (legal rights) और मानव अधिकार (human rights)। प्रत्येक श्रेणी…