प्रस्तावना प्रत्यायोजित विधायन (Delegated Legislation या Subordinate Legislation) आज के जटिल शासन तंत्र का अनिवार्य अंग बन गया है। यह वह विधायन है जिसे संसद या विधानमंडल ने सीधे बनाने के बजाय किसी अन्य प्राधिकारी (मंत्रालय, राज्य, विभाग, नियंत्रक, स्थानीय संस्था या अधिसूचित अधिकारी) को बनाने का अधिकार सौंपी होती है। प्रत्यायोजित विधायन की परिभाषा…
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शक्ति प्रथक्करण के सिद्धांत : निर्णीत वादों की सहायता से विवेचन
शक्ति प्रथक्करण (separation of powers) आधुनिक संवैधानिक सिद्धांतों में एक मौलिक विचार है। इसका मूल उद्देश्य राज्य की शक्ति को केंद्रीकृत होने से रोकना और सत्ता के दुरुपयोग की संभावनाओं को न्यूनतम करना है। शक्ति प्रथक्करण के सिद्धांत के अंतर्गत प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक शक्तियों को अलग‑अलग अंगों में विभक्त कर दिया जाता…
प्रशासनिक विधि — परिभाषा तथा परिक्षेत्र
प्रस्तावना प्रशासनिक विधि (Administrative Law) आधुनिक राज्य में शासन के कार्योँ को नियमबद्ध और नियंत्रित करने वाला वह विधिक क्षेत्र है, जो कार्यपालिका (executive) और उसके अधीनस्थ संस्थाओं व अधिकारियों के कार्य-प्रवर्तन, निर्णय-प्रक्रिया तथा उनके दायित्वों और अधिकारों से संबंधित है। यह विधि नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता, जवाबदेही…