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भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार और बेरोजगारी: प्रकार, आँकड़े और सरकारी योजनाएँ

भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार और बेरोजगारी: प्रकार, आँकड़े और सरकारी योजनाएँ

Posted on September 9, 2026September 9, 2026 by KRANTI KISHORE

भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार संवृद्धि, श्रमबल का अनियतीकरण, औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रक तथा बेरोजगारी के प्रकार (प्रच्छन्न और मौसमी) की पूरी जानकारी।

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश की सड़कों पर फल बेचने वाले, खेतों में पसीना बहाने वाले किसान और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों में क्या समानता है? ये सभी हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, जिन्हें हम अर्थशास्त्र की भाषा में ‘श्रमशक्ति‘ (Workforce) कहते हैं।

किसी भी देश की तरक्की सिर्फ इस बात से नहीं मापी जाती कि उसकी जीडीपी (GDP) कितनी तेजी से बढ़ रही है, बल्कि इससे मापी जाती है कि वह अपनी जनता के लिए कितने और कैसे रोजगार के अवसर पैदा कर पा रहा है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन इसके सामने ‘रोजगारहीन संवृद्धि‘ (Jobless Growth) और ‘श्रमबल का अनौपचारीकरण‘ (Informalisation of Workforce) जैसी गंभीर चुनौतियाँ खड़ी हैं।

भारत के कुल श्रमबल का लगभग 89% हिस्सा आज भी अनौपचारिक या असंगठित क्षेत्रक में काम करने को मजबूर है, जहाँ न तो नौकरी की गारंटी है और न ही सामाजिक सुरक्षा। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में पैर पसारे प्रच्छन्न बेरोजगारी (छिपी हुई बेरोजगारी) और मौसमी बेरोजगारी देश के मानव संसाधन को कमजोर कर रही है।


1. मूल अवधारणाएँ (Concepts)

  • आर्थिक क्रियाएँ: वे सभी गतिविधियाँ जो देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में योगदान देती हैं।
  • श्रमिक (Worker): आर्थिक क्रियाओं में संलग्न सभी व्यक्ति श्रमिक कहलाते हैं (चाहे उच्च पद पर हों या निम्न)।
    • विशेष: बीमारी, चोट, खराब मौसम या त्योहार के कारण अस्थायी रूप से अनुपस्थित रहने वाले व्यक्ति और मुख्य श्रमिकों की सहायता करने वाले (पारिवारिक मददगार) भी श्रमिक माने जाते हैं।
    • स्व-नियोजित (Self-employed) व्यक्ति भी श्रमिक की श्रेणी में आते हैं।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP): किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य।

2. श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (Worker-Population Ratio)

  • महत्त्व: यह देश में रोजगार की स्थिति और उत्पादन में जनता की सक्रिय भागीदारी को मापने का मुख्य सूचक है।
📌 महत्वपूर्ण सूत्र (Formula):
श्रमिक जनसंख्या अनुपात =
कुल श्रमिकों की संख्या
देश की कुल जनसंख्या
× 100

आँकड़े (2023-24 के अनुसार):

  • संपूर्ण भारत: 43.7% (प्रत्येक 100 में से लगभग 44 लोग श्रमिक हैं)।
  • ग्रामीण भारत: 45.6% | शहरी भारत: 38.9%。 (ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक कामगार अनुपात का कारण गरीबी और सीमित आय है, जिससे लोग शिक्षा छोड़ जल्दी काम पर लग जाते हैं)।
  • लिंगानुसार अंतर: पुरुषों की भागीदारी (56.4%) महिलाओं (30.7%) से अधिक है。 शहरी महिलाओं का अनुपात (20.7%) सबसे कम है।

3. श्रमशक्ति का आकार और प्रकृति (2022-23)

  • कुल श्रमशक्ति: लगभग 545 मिलियन।
  • ग्रामीण बनाम शहरी: कुल श्रमिकों में से दो-तिहाई (2/3) श्रमिक ग्रामीण हैं।
  • लैंगिक संरचना: श्रमबल में लगभग 70% पुरुष और 30% महिलाएँ हैं।
  • रोजगार की स्थिति:
    • स्वनियोजित (Self-employed): भारत में आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत (कुल श्रमबल का 58%)।
    • नियमित वेतनभोगी (Regular Salaried): केवल 22% (शहरी क्षेत्रों में 48% और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 13%)।
    • अनियत दिहाड़ी मजदूर (Casual Labour): कुल श्रमबल का 20% (यह वर्ग सबसे अधिक असुरक्षित माना जाता है)।

4. क्षेत्रकवार रोजगार वितरण (Sectoral Distribution)

  • प्राथमिक क्षेत्रक (कृषि,खनन): भारत में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत (46.1% श्रमबल)।
    • ग्रामीण भारत के 60% लोग और 64.4% महिला श्रमिक इसी क्षेत्र में संकेंद्रित हैं।
  • द्वितीयक क्षेत्रक (विनिर्माण, निर्माण, बिजली): लगभग 24.1% श्रमबल को रोजगार देता है।
  • तृतीयक/सेवा क्षेत्रक (वाणिज्य,परिवहन,सेवाएँ): लगभग 29.8% श्रमबल इसमें लगा है।
    • शहरी क्षेत्रों में यह सबसे बड़ा नियोक्ता है, जहाँ 61% शहरी श्रमिक सेवा क्षेत्र में हैं।

5. रोजगारहीन संवृद्धि और अनियतीकरण (Key Trends)

  • रोजगारहीन संवृद्धि (Jobless Growth): 1990 के दशक के उत्तरार्ध में देखी गई वह स्थिति जब भारतीय अर्थव्यवस्था में GDP की संवृद्धि दर तो ऊँची रही, लेकिन उस अनुपात में रोजगार का सृजन नहीं हुआ। (यानी रोजगार बढ़ाए बिना ही अधिक उत्पादन किया गया)।
  • श्रमबल का अनियतीकरण (Casualisation): पिछले पाँच दशकों में लोगों का स्वरोजगार और नियमित रोजगार से हटकर अनियत दिहाड़ी मजदूरी की ओर बढ़ने की प्रवृत्ति।
  • आउटसोर्सिंग (Outsourcing): आधुनिक कंपनियों द्वारा अपने विशिष्ट कार्यों (जैसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, ग्राहक सेवा) को बाहरी छोटी फर्मों या देशों को सौंपना। इससे पारंपरिक कारखाने ‘घर से काम’ (Work from Home) में बदल रहे हैं।

6. औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रक (Formal vs Informal)

  • औपचारिक (संगठित) क्षेत्रक: सभी सार्वजनिक उपक्रम तथा 10 या अधिक कर्मचारियों वाले निजी प्रतिष्ठान। यहाँ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (PF, पेंशन, ग्रेच्युटी) और श्रम कानूनों का संरक्षण मिलता है।
  • अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक: 10 से कम कर्मचारियों वाले निजी उद्यम, कृषि श्रमिक और सभी स्वनियोजित व्यक्ति। यहाँ आय नियमित नहीं होती और कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती।
  • चिंताजनक तथ्य: भारत के कुल श्रमबल का मात्र 11% औपचारिक क्षेत्रक में है, जबकि 89% श्रमिक अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक में काम करते हैं।

7. बेरोजगारी: परिभाषा और प्रकार

  • परिभाषा (NSO अनुसार): वह अवस्था जिसमें व्यक्ति काम के अभाव के कारण बिना काम के रह जाता है, जबकि वह प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने का इच्छुक और प्रयासरत है।
  • खुली बेरोजगारी: व्यक्ति काम करने के योग्य है लेकिन उसे बिल्कुल रोजगार नहीं मिलता।
  • प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment): कृषि क्षेत्र की आम समस्या। जब किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं (यदि अतिरिक्त लोगों को हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता; सीमांत उत्पादकता शून्य होती है)।
  • मौसमी बेरोजगारी: कृषि के मौसमी होने के कारण वर्ष के कुछ महीनों (फसल कटाई के बाद) में काम न मिलना।
  • आँकड़ों के स्रोत: भारत की जनगणना, NSO की PLFS (आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण) रिपोर्ट और रोजगार कार्यालयों के आँकड़े।

8. सरकार के प्रयास और रोजगार सृजन

  • प्रत्यक्ष रोजगार: सरकार द्वारा अपने विभिन्न प्रशासनिक विभागों, होटलों और उद्योगों में सीधे नियुक्तियाँ करना。
  • अप्रत्यक्ष रोजगार: सरकारी उद्यमों में उत्पादन बढ़ने से उन्हें इनपुट सप्लाई करने वाली निजी कंपनियों में रोजगार का बढ़ना।
  • मनरेगा (MNREGA – 2005): महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ग्रामीण अकुशल श्रमिकों को वर्ष में कम से कम 100 दिन के गारंटीशुदा दिहाड़ी रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।

💡 परीक्षा के लिए Quick Tips:

  1. औपचारिक क्षेत्र की सीमा: 10 या अधिक कर्मचारी।
  2. भारत में सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता: प्राथमिक क्षेत्रक (कृषि) और आजीविका का प्रकार ‘स्वरोजगार’ (58%) है।
  3. अनौपचारिक श्रम का प्रतिशत: 89%।

भाग 1: श्रमिक और आर्थिक क्रियाएँ (기본 अवधारणाएँ)

1. प्रश्न: राष्ट्रीय आय में सक्रिय रूप से योगदान करने वाले व्यक्ति को क्या कहा जाता है?

  • उत्तर: श्रमिक (Workforce/Worker)

2. प्रश्न: सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में योगदान देने वाले सभी क्रियाकलापों को क्या कहते हैं?

  • उत्तर: आर्थिक क्रियाएँ (Economic Activities)

3. प्रश्न: यदि कोई श्रमिक बीमारी, चोट या त्योहार के कारण अस्थायी रूप से काम पर नहीं जाता, तो क्या वह श्रमिक माना जाएगा?

  • उत्तर: हाँ, उसे श्रमिक ही माना जाएगा।

4. प्रश्न: क्या मुख्य श्रमिकों की सहायता करने वाले (जैसे पारिवारिक मददगार) श्रमिक की श्रेणी में आते हैं?

  • उत्तर: हाँ, उन्हें भी श्रमिक माना जाता है।

5. प्रश्न: क्या केवल नियोक्ता (Employer) से वेतन पाने वाले ही श्रमिक हैं?

  • उत्तर: नहीं, स्व-नियोजित (Self-employed) व्यक्ति भी श्रमिक होते हैं।

6. प्रश्न: किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य क्या कहलाता है?

  • उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

7. प्रश्न: यदि किसी वर्ष निर्यात का मूल्य आयात से अधिक हो, तो देश का निवल अर्जन कैसा होगा?

  • उत्तर: धनात्मक (+)

8. प्रश्न: यदि आयात का मूल्य निर्यात से अधिक हो, तो निवल अर्जन कैसा होगा?

  • उत्तर: ऋणात्मक (-)

9. प्रश्न: कार्य करने से व्यक्ति को किस चीज़ की अनुभूति होती है?

  • उत्तर: सार्थकता और आत्म-संतोष की

10. प्रश्न: महात्मा गाँधी ने शिक्षा के साथ-साथ किस चीज़ पर विशेष बल दिया था?

  • उत्तर: हस्तकलाओं के माध्यम से प्रशिक्षण पर

11. प्रश्न: श्रमिकों के अध्ययन से हमें देश के किस संसाधन के नियोजन में सहायता मिलती है?

  • उत्तर: मानवीय संसाधन (Human Resources)

12. प्रश्न: समाज के किन वर्गों के शोषण की समस्याओं का निदान श्रमिक अध्ययन से संभव है?

  • उत्तर: सीमांत-वर्गों और बाल-श्रमिकों के

13. प्रश्न: भारत में रोजगार की प्रकृति कैसी है?

  • उत्तर: बहुमुखी (Multifaceted – कुछ को वर्ष भर, कुछ को कुछ महीने काम मिलता है)

14. प्रश्न: राष्ट्रीय आय में देश की गृहणियों (Housewives) के योगदान को श्रमबल में शामिल करने का आग्रह कौन करता है?

  • उत्तर: समाजशास्त्री (Sociologists)

15. प्रश्न: आर्थिक क्रिया की परिभाषा क्या है?

  • उत्तर: वह क्रिया जिससे सकल राष्ट्रीय उत्पाद में मूल्य संवर्द्धन होता है।

भाग 2: भारत में श्रमशक्ति का आकार और संरचना (आँकड़े 2022-23 / 2023-24)

16. प्रश्न: वर्ष 2022-23 में भारत की कुल श्रम-शक्ति (Labour Force) का आकार लगभग कितना आँका गया था?

  • उत्तर: लगभग 545 मिलियन

17. प्रश्न: भारत के कुल श्रमिकों का कितना भाग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है?

  • उत्तर: दो-तिहाई (2/3) भाग

18. प्रश्न: भारत के कुल श्रमबल में पुरुषों का प्रतिशत लगभग कितना है?

  • उत्तर: लगभग 70 प्रतिशत

19. प्रश्न: भारत के कुल श्रमबल में महिलाओं का प्रतिशत लगभग कितना है?

  • उत्तर: लगभग 30 प्रतिशत

20. प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में महिला श्रमिक कुल ग्रामीण श्रमबल का कितना हिस्सा हैं?

  • उत्तर: एक-तिहाई (लगभग 33-35 प्रतिशत)

21. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में महिलाएँ कुल शहरी श्रमबल का कितने प्रतिशत हैं?

  • उत्तर: केवल 20 प्रतिशत

22. प्रश्न: ग्रामीण महिलाओं को अक्सर श्रमिक वर्ग में क्यों नहीं गिना जाता?

  • उत्तर: क्योंकि उन्हें अपने घरेलू और खेतों के काम के लिए नकद या अनाज के रूप में मजदूरी नहीं मिलती।

23. प्रश्न: भारत में श्रमशक्ति में किसकी बहुलता है?

  • उत्तर: पुरुषों की

24. प्रश्न: कुल 471 मिलियन श्रमिकों (एक विशिष्ट सर्वेक्षण अनुसार) में से अधिकांश कहाँ से हैं?

  • उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों से

25. प्रश्न: ईंधन बीनना, पानी लाना और चारा इकट्ठा करना किस प्रकार के कार्यों में आता है जिनका मूल्यांकन राष्ट्रीय आय में कम होता है?

  • उत्तर: गैर-भुगतान वाले घरेलू/कृषि कार्य

भाग 3: श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (Worker-Population Ratio)

26. प्रश्न: देश में रोजगार की स्थिति के विश्लेषण के लिए किस मुख्य सूचक का प्रयोग किया जाता है?

  • उत्तर: श्रमिक जनसंख्या अनुपात (Worker-Population Ratio)

27. प्रश्न: श्रमिक जनसंख्या अनुपात से क्या ज्ञात होता है?

  • उत्तर: जनसंख्या का कितना अनुपात वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सक्रिय योगदान दे रहा है।

28. प्रश्न: उच्च श्रमिक जनसंख्या अनुपात क्या दर्शाता है?

  • उत्तर: जनता की काम में भागीदारी अधिक है।

29. प्रश्न: श्रमिक जनसंख्या अनुपात निकालने का सूत्र क्या है?

  • उत्तर: (कुल श्रमिकों की संख्या / कुल जनसंख्या) × 100

30. प्रश्न: ‘जनसंख्या‘ शब्द का क्या अभिप्राय है?

  • उत्तर: किसी क्षेत्र विशेष में किसी समय विशेष पर रह रहे व्यक्तियों की कुल संख्या।

31. प्रश्न: आधिकारिक आँकड़ों (2023-24) के अनुसार भारत का संपूर्ण कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 43.7 प्रतिशत

32. प्रश्न: भारत में प्रत्येक 100 व्यक्तियों में से लगभग कितने व्यक्ति श्रमिक हैं?

  • उत्तर: लगभग 44 व्यक्ति (43.7%)

33. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में संपूर्ण कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 38.9 प्रतिशत

34. प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 45.6 प्रतिशत

35. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात अधिक क्यों है?

  • उत्तर: क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम आय और गरीबी के कारण लोग शिक्षा अधूरी छोड़कर श्रम बाजार में जल्दी शामिल हो जाते हैं।

36. प्रश्न: वर्ष 2023-24 के आँकड़ों के अनुसार संपूर्ण भारत में पुरुषों का कार्यकर्ता अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 56.4 प्रतिशत

37. प्रश्न: वर्ष 2023-24 के अनुसार संपूर्ण भारत में स्त्रियों का कार्यकर्ता अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 30.7 प्रतिशत

38. प्रश्न: ग्रामीण पुरुषों का कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 56.3 प्रतिशत

39. प्रश्न: शहरी पुरुषों का कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 56.4 प्रतिशत

40. प्रश्न: ग्रामीण स्त्रियों का कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 34.8 प्रतिशत

41. प्रश्न: शहरी स्त्रियों का कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात कितना है?

  • उत्तर: 20.7 प्रतिशत

42. प्रश्न: पुरुष और महिला भागीदारी में सबसे बड़ा अंतर कहाँ देखा जाता है?

  • उत्तर: शहरी क्षेत्रों में (पुरुष: 56.4%, स्त्री: 20.7%)

43. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की कम भागीदारी का एक सामाजिक कारण क्या है?

  • उत्तर: पुरुषों की पर्याप्त आय होने पर महिलाओं को बाहर काम करने के लिए निरुत्साहित करना।

44. प्रश्न: आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों की महिलाएँ श्रम बाजार से बाहर क्यों रहती हैं?

  • उत्तर: सामाजिक प्राथमिकताओं और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण।

45. प्रश्न: रोजगार संबंधी किसी भी अध्ययन का आरंभ किस सूचक से होना चाहिए?

  • उत्तर: श्रमिक जनसंख्या अनुपात से

भाग 4: रोजगार के प्रकार (स्वनियोजित, नियमित वेतनभोगी और अनियत श्रमिक)

46. प्रश्न: जो व्यक्ति अपने उद्यम के स्वामी और संचालक होते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?

  • उत्तर: स्वनियोजित (Self-employed)

47. प्रश्न: भारत में आजीविका का सबसे प्रमुख स्रोत क्या है?

  • उत्तर: स्वरोजगार (Self-employment)

48. प्रश्न: भारत के कुल श्रमबल का लगभग कितने प्रतिशत भाग स्वनियोजित श्रेणी में आता है?

  • उत्तर: लगभग 58 प्रतिशत

49. प्रश्न: निर्माण कार्य में लगे दिहाड़ी मजदूर किस श्रेणी के श्रमिक कहलाते हैं?

  • उत्तर: अनियत मजदूरी वाले श्रमिक (Casual Wage Labourers)

50. प्रश्न: भारत की श्रमशक्ति में अनियत दिहाड़ी मजदूरों का प्रतिशत (2023-24) लगभग कितना है?

  • उत्तर: लगभग 19.9 प्रतिशत (लगभग 20%)

51. प्रश्न: जब किसी श्रमिक को कोई उद्यम नियमित रूप से काम पर रखता है और सामाजिक सुरक्षा/वेतन देता है, तो वह क्या कहलाता है?

  • उत्तर: नियमित वेतनभोगी कर्मचारी (Regular Salaried Employee)

52. प्रश्न: भारत में नियमित वेतनभोगी कर्मचारी कुल श्रमशक्ति का कितने प्रतिशत हैं?

  • उत्तर: लगभग 21.7 प्रतिशत (लगभग 22%)

53. प्रश्न: पुरुष श्रमिकों में स्वनियोजित पुरुषों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 54 प्रतिशत

54. प्रश्न: महिला श्रमिकों में स्वनियोजित महिलाओं का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 67 प्रतिशत

55. प्रश्न: नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों में पुरुषों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 21 प्रतिशत

56. प्रश्न: नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों में महिलाओं का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 16 प्रतिशत

57. प्रश्न: पुरुष श्रमिकों में अनियत (आकस्मिक) दिहाड़ी मजदूरों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 25 प्रतिशत

58. प्रश्न: महिला श्रमिकों में अनियत दिहाड़ी मजदूरों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 17 प्रतिशत

59. प्रश्न: महिलाओं के लिए रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा प्रमुख स्रोत कौन सा है?

  • उत्तर: अनियत मजदूरी कार्य (Casual Labour)

60. प्रश्न: नियमित वेतनभोगी रोजगार में किसका अनुपात अधिक है?

  • उत्तर: पुरुषों का (21% पुरुष बनाम 16% महिलाएँ)

61. प्रश्न: शहरी श्रमिकों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 48 प्रतिशत

62. प्रश्न: ग्रामीण श्रमिकों में नियमित वेतनभोगी कर्मचारियों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: केवल 13 प्रतिशत

63. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में स्वनियोजित श्रमिकों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 40 प्रतिशत

64. प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वनियोजित श्रमिकों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 65 प्रतिशत

65. प्रश्न: शहरी श्रमिकों में आकस्मिक/अनियत दिहाड़ी मजदूरों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 12 प्रतिशत

66. प्रश्न: ग्रामीण श्रमिकों में आकस्मिक/अनियत दिहाड़ी मजदूरों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 22 प्रतिशत

67. प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वनियोजन का प्रतिशत अधिक होने का मुख्य कारण क्या है?

  • उत्तर: अधिकांश ग्रामीण अपनी भूमि के टुकड़ों पर स्वतंत्र रूप से खेती करते हैं।

68. प्रश्न: अर्थव्यवस्था के तीनों वर्गों (स्वनियोजित, नियमित, अनियत) में सबसे असुरक्षित दशा किसकी मानी जाती है?

  • उत्तर: अनियत दिहाड़ी मजदूर की

69. प्रश्न: स्टेट बैंक का कैशियर या सरकारी स्कूल का शिक्षक किस श्रेणी का श्रमिक है?

  • उत्तर: नियमित वेतनभोगी कर्मचारी

70. प्रश्न: पटरी पर सब्जी बेचने वाला या नाई की दुकान का मालिक किस श्रेणी में आता है?

  • उत्तर: स्वनियोजित

भाग 5: क्षेत्रकवार रोजगार वितरण (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक क्षेत्रक)

71. प्रश्न: सामान्यतः आर्थिक क्रियाओं को कितने औद्योगिक वर्गों में विभाजित किया जाता है?

  • उत्तर: आठ (8) औद्योगिक वर्गों में

72. प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्रक के अंतर्गत कौन से मुख्य वर्ग शामिल हैं?

  • उत्तर: कृषि, खनन और उत्खनन

73. प्रश्न: द्वितीयक क्षेत्रक में किन गतिविधियों को शामिल किया जाता है?

  • उत्तर: विनिर्माण (Manufacturing), विद्युत, गैस एवं जलापूर्ति तथा निर्माण कार्य

74. प्रश्न: तृतीयक क्षेत्रक को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

  • उत्तर: सेवा क्षेत्रक (Service Sector)

75. प्रश्न: वाणिज्य, परिवहन, भंडारण और सेवाएँ किस क्षेत्रक का हिस्सा हैं?

  • उत्तर: तृतीयक/सेवा क्षेत्रक

76. प्रश्न: वर्ष 2023-24 के अनुसार भारत में अधिकांश श्रमिकों के रोजगार का स्रोत कौन सा क्षेत्रक है?

  • उत्तर: प्राथमिक क्षेत्रक (46.1%)

77. प्रश्न: भारत का द्वितीयक क्षेत्रक कितने प्रतिशत श्रमबल को रोजगार देता है?

  • उत्तर: लगभग 24.1 प्रतिशत

78. प्रश्न: भारत में सेवा (तृतीयक) क्षेत्रक में कितने प्रतिशत श्रमबल संलग्न है?

  • उत्तर: लगभग 29.8 प्रतिशत

79. प्रश्न: ग्रामीण भारत की लगभग कितने प्रतिशत श्रमशक्ति कृषि और संबद्ध क्षेत्रों पर निर्भर है?

  • उत्तर: 59.8 प्रतिशत (लगभग 60%)

80. प्रश्न: ग्रामीण श्रमिकों का कितने प्रतिशत भाग द्वितीयक क्षेत्रक में लगा है?

  • उत्तर: 21.4 प्रतिशत

81. प्रश्न: ग्रामीण श्रमिकों का कितने प्रतिशत भाग सेवा क्षेत्रक से रोजगार पाता है?

  • उत्तर: 18.8 प्रतिशत

82. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक लोग किस क्षेत्रक में कार्यरत हैं?

  • उत्तर: तृतीयक/सेवा क्षेत्रक (60.9%)

83. प्रश्न: शहरी श्रमिकों का कितने प्रतिशत भाग द्वितीयक क्षेत्रक में नियोजित है?

  • उत्तर: 32.4 प्रतिशत (लगभग एक-तिहाई)

84. प्रश्न: शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक क्षेत्रक (कृषि व खनन) में कितने प्रतिशत लोग लगे हैं?

  • उत्तर: केवल 6.7 प्रतिशत

85. प्रश्न: प्राथमिक क्षेत्रक में पुरुषों और महिलाओं में से किसका संकेंद्रण बहुत अधिक है?

  • उत्तर: महिलाओं का (64.4% महिलाएँ बनाम 36.3% पुरुष)

86. प्रश्न: द्वितीयक क्षेत्रक में कितने प्रतिशत महिलाएँ कार्यरत हैं?

  • उत्तर: 15.6 प्रतिशत

87. प्रश्न: सेवा क्षेत्रक में कार्यरत पुरुषों का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 34.9 प्रतिशत

88. प्रश्न: सेवा क्षेत्रक में कार्यरत महिलाओं का प्रतिशत कितना है?

  • उत्तर: 20 प्रतिशत

89. प्रश्न: आर्थिक विकास के क्रम में श्रमशक्ति का प्रवाह किस ओर होता है?

  • उत्तर: कृषि से उद्योगों और सेवाओं की ओर (गैर-कृषि कार्यों की ओर)

90. प्रश्न: विकासशील देशों की रणनीतियों का मुख्य ध्येय किस क्षेत्र पर निर्भर जनसंख्या के अनुपात को कम करना रहा है?

  • उत्तर: कृषि (प्राथमिक क्षेत्रक) पर

भाग 6: संवृद्धि एवं रोजगार संरचना में परिवर्तन (रोजगारहीन संवृद्धि)

91. प्रश्न: वर्ष 1950-2010 की अवधि में भारत में किसकी संवृद्धि दर हमेशा रोजगार वृद्धि दर से अधिक रही?

  • उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की

92. प्रश्न: योजनाबद्ध विकास के पहले कुछ दशकों में भारत में रोजगार की वार्षिक औसत वृद्धि दर लगभग कितने प्रतिशत पर बनी रही?

  • उत्तर: लगभग 2 प्रतिशत

93. प्रश्न: ‘रोजगारहीन संवृद्धि‘ (Jobless Growth) किसे कहते हैं?

  • उत्तर: जब अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसरों में वृद्धि के बिना ही सकल घरेलू उत्पाद (उत्पादन) में तीव्र वृद्धि होती है।

94. प्रश्न: भारत में किस दशक के अंतिम वर्षों में ‘रोजगारहीन संवृद्धि‘ की चिंताजनक स्थिति देखी गई?

  • उत्तर: 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में

95. प्रश्न: वर्ष 1951-56 (प्रथम पंचवर्षीय योजना) में GDP की वार्षिक औसत संवृद्धि दर क्या थी?

  • उत्तर: 3.6 प्रतिशत

96. प्रश्न: वर्ष 2022-23 में भारत में रोजगार की संवृद्धि दर बढ़कर कितनी दर्ज की गई?

  • उत्तर: 3.2 प्रतिशत

97. प्रश्न: दिए गए चार्ट के अनुसार किस अवधि में भारत की GDP वृद्धि दर सबसे ऊँची (8.7%) थी?

  • उत्तर: 2005-10 की अवधि में

98. प्रश्न: वर्ष 2005-10 के दौरान रोजगार की संवृद्धि दर घटकर कितनी रह गई थी, जो न्यूनतम थी?

  • उत्तर: 0.28 प्रतिशत

99. प्रश्न: वर्ष 1972-73 में प्राथमिक क्षेत्रक में कितने प्रतिशत श्रमबल लगा था?

  • उत्तर: 74.3 प्रतिशत

100. प्रश्न: पिछले पाँच दशकों (1972 से 2023) में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी 74% से घटकर कितनी हो गई है?

  • उत्तर: 46.1 प्रतिशत

101. प्रश्न: पिछले पाँच दशकों में द्वितीयक क्षेत्रक की हिस्सेदारी 11% से बढ़कर कितनी हो गई है?

  • उत्तर: 24.1 प्रतिशत

102. प्रश्न: पिछले पाँच दशकों में सेवा क्षेत्रक की हिस्सेदारी 15% से बढ़कर कितनी हो गई है?

  • उत्तर: 29.8 प्रतिशत

103. प्रश्न: विशेषज्ञों के अनुसार स्वरोजगार तथा नियमित वेतन से हटकर “अनियत श्रम” की ओर जाने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

  • उत्तर: श्रम बल का अनियतीकरण (Casualisation of Workforce)

104. प्रश्न: श्रम के अनियतीकरण से मजदूरों की दशा पर क्या प्रभाव पड़ता है?

  • उत्तर: मजदूरों की दशा बहुत नाजुक और असुरक्षित हो जाती है।

105. प्रश्न: क्या आधुनिकीकरण के बावजूद भारत में रोजगार संरचना का अनौपचारीकरण बढ़ा है?

  • उत्तर: हाँ, रोजगार का स्वरूप और अधिक अनौपचारिक हुआ है।

भाग 7: औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रक (संगठित और असंगठित)

106. प्रश्न: औपचारिक (संगठित) क्षेत्रक किसे कहते हैं?

  • उत्तर: सभी सार्वजनिक क्षेत्रक प्रतिष्ठान तथा 10 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले निजी प्रतिष्ठान।

107. प्रश्न: अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक में कौन से उद्यम शामिल होते हैं?

  • उत्तर: वे सभी निजी उद्यम जिनमें 10 से कम कर्मचारी काम करते हैं, या जो स्वनियोजित हैं।

108. प्रश्न: संगठित क्षेत्रक के कर्मचारियों को कौन से मुख्य लाभ प्राप्त होते हैं?

  • उत्तर: नियमित आय, सामाजिक सुरक्षा लाभ (भविष्य निधि, पेंशन, ग्रेच्युटी) और श्रम कानूनों का संरक्षण।

109. प्रश्न: अनौपचारिक क्षेत्रक के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा लाभ (जैसे मातृत्व लाभ, भविष्य निधि) क्यों नहीं मिलते?

  • उत्तर: क्योंकि ये प्रतिष्ठान श्रम कानूनों के दायरे से बाहर होते हैं और कोई लिखित अनुबंध नहीं रखते।

110. प्रश्न: वर्ष 2012 में औपचारिक क्षेत्रक में कार्यरत 30 मिलियन कर्मचारियों में से सार्वजनिक क्षेत्रक में कितने थे?

  • उत्तर: 1.8 करोड़ (18 मिलियन)

111. प्रश्न: औपचारिक क्षेत्र में महिलाएँ कुल कर्मचारियों का लगभग कितना हिस्सा थीं (2012 के अनुसार)?

  • उत्तर: केवल 1/16 अंश (बहुत कम)

112. प्रश्न: अर्थशास्त्रियों के अनुसार 1991 के आर्थिक सुधारों (LPG) का औपचारिक क्षेत्र के कर्मियों की संख्या पर क्या प्रभाव पड़ा?

  • उत्तर: औपचारिक क्षेत्र में नियमित कर्मियों की संख्या में कमी आई है।

113. प्रश्न: वर्ष 2019-20 में भारत के कुल 535 मिलियन श्रमिकों में से औपचारिक क्षेत्रक में कितने कार्यरत थे?

  • उत्तर: केवल 59 मिलियन

114. प्रश्न: वर्ष 2019-20 के आँकड़ों के अनुसार भारत का कितने प्रतिशत श्रमबल औपचारिक क्षेत्र में है?

  • उत्तर: मात्र 11 प्रतिशत

115. प्रश्न: भारत का कितने प्रतिशत श्रमबल अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्र में काम करने को मजबूर है?

  • उत्तर: 89 प्रतिशत

116. प्रश्न: वर्ष 2011-12 के अनुसार औपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी कितने प्रतिशत थी?

  • उत्तर: लगभग 20 प्रतिशत

117. प्रश्न: वर्ष 2011-12 के अनुसार अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी कितने प्रतिशत थी?

  • उत्तर: लगभग 30 प्रतिशत

118. प्रश्न: किस अंतर्राष्ट्रीय संगठन के प्रयासों के बाद भारत सरकार ने अनौपचारिक क्षेत्र के सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों पर ध्यान दिया?

  • उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

119. प्रश्न: अहमदाबाद में 1980 के दशक में कपड़ा मिलें बंद होने से कितने स्थायी मजदूर अनौपचारिक क्षेत्र में चले गए?

  • उत्तर: कम से कम 80,000 स्थायी मजदूर

120. प्रश्न: औपचारिक से अनौपचारिक क्षेत्र में जाने पर श्रमिक परिवारों के जीवन स्तर पर क्या प्रभाव पड़ा (अहमदाबाद केस स्टडी)?

  • उत्तर: वे मध्यमवर्गीय सुरक्षित जीवन शैली से उखाड़कर निर्धनता के कुचक्र में फंस गए।

भाग 8: बेरोजगारी – परिभाषा, प्रकार एवं स्रोत

121. प्रश्न: राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO) के अनुसार बेरोजगारी की परिभाषा क्या है?

  • उत्तर: वह अवस्था जिसमें व्यक्ति काम के अभाव के कारण बिना काम के रह जाता है, जबकि वह काम करने का इच्छुक और प्रयासरत है।

122. प्रश्न: अर्थशास्त्रियों के अनुसार उस व्यक्ति को बेरोजगार माना जाता है जो आधे दिन की अवधि में न्यूनतम कितने घंटे का काम नहीं पाता?

  • उत्तर: 1 घंटे का काम भी नहीं पा सकता

123. प्रश्न: भारत में बेरोजगारी के आँकड़ों के तीन मुख्य स्रोत कौन से हैं?

  • उत्तर: 1. भारत की जनगणना रिपोर्ट, 2. NSO की PLFS वार्षिक रिपोर्ट, 3. रोजगार एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय के आँकड़े।

124. प्रश्न: PLFS का पूर्ण रूप क्या है जो बेरोजगारी के आँकड़े जारी करता है?

  • उत्तर: आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey)

125. प्रश्न: खुली बेरोजगारी (Open Unemployment) किसे कहते हैं?

  • उत्तर: जब व्यक्ति काम करने के योग्य है और काम चाहता है, परंतु उसे अर्थव्यवस्था में बिल्कुल भी काम नहीं मिलता (वह पूर्णतः प्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार दिखता है)।

126. प्रश्न: प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment) का क्या अर्थ है?

  • उत्तर: वह स्थिति जिसमें किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं, और यदि कुछ लोगों को हटा भी दिया जाए तो कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता (सीमांत उत्पादकता शून्य होती है)।

127. प्रश्न: प्रच्छन्न बेरोजगारी मुख्य रूप से किस क्षेत्रक में पाई जाती है?

  • उत्तर: कृषि क्षेत्रक (ग्रामीण भारत) में

128. प्रश्न: 1950 के दशक के अंत में किए गए एक अध्ययन के अनुसार भारत के कितने कृषि श्रमिक प्रच्छन्न रूप से बेरोजगार थे?

  • उत्तर: एक-तिहाई (1/3) कृषि श्रमिक

129. प्रश्न: मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment) क्या है?

  • उत्तर: वह बेरोजगारी जो वर्ष के कुछ निश्चित महीनों या मौसम में काम न होने के कारण पैदा होती है (जैसे कृषि का काम समाप्त होने पर)।

130. प्रश्न: लोग कृषि का काम खत्म होने पर शहरों की ओर क्यों प्रवास करते हैं?

  • उत्तर: मौसमी बेरोजगारी से बचने और आजीविका कमाने के लिए।

131. प्रश्न: भारत में लोग बहुत लंबे समय तक पूर्णतः बेरोजगार क्यों नहीं बैठ पाते?

  • उत्तर: क्योंकि उनकी दयनीय आर्थिक स्थिति उन्हें कोई भी असुविधाजनक या जोखिम भरा काम स्वीकार करने पर मजबूर कर देती है।

भाग 9: सरकार और रोजगार सृजन (योजनाएँ व नीतियाँ)

132. प्रश्न: भारत सरकार द्वारा पारित ‘मनरेगा‘ (MNREGA) का पूर्ण रूप क्या है?

  • उत्तर: महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

133. प्रश्न: मनरेगा अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था?

  • उत्तर: वर्ष 2005 में

134. प्रश्न: मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में न्यूनतम कितने दिनों के गारंटीशुदा रोजगार का प्रावधान है?

  • उत्तर: 100 दिनों का दिहाड़ी रोजगार

135. प्रश्न: मनरेगा मुख्य रूप से किस प्रकार के श्रम के लिए रोजगार उपलब्ध कराता है?

  • उत्तर: अकुशल शारीरिक श्रम (Unskilled Labour)

136. प्रश्न: सरकार द्वारा रोजगार सृजन के प्रयासों को किन दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है?

  • उत्तर: प्रत्यक्ष (Direct) एवं अप्रत्यक्ष (Indirect) प्रयास

137. प्रश्न: सरकार द्वारा अपने विभागों, होटलों या परिवहन कंपनियों में सीधे नियुक्तियाँ करना किस प्रकार का रोजगार सृजन है?

  • उत्तर: प्रत्यक्ष रोजगार सृजन

138. प्रश्न: जब किसी सरकारी इस्पात मिल में उत्पादन बढ़ने से उसे कच्चा माल देने वाली निजी कंपनियों में रोजगार बढ़ता है, तो इसे क्या कहते हैं?

  • उत्तर: अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन

139. प्रश्न: सरकार द्वारा चलाए जा रहे गरीबी निवारण कार्यक्रमों का मुख्य माध्यम क्या होता है?

  • उत्तर: रोजगार सृजन कार्यक्रम

140. प्रश्न: सरकारी रोजगार कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किन परिसंपत्तियों का विकास किया जाता है?

  • उत्तर: सामुदायिक परिसंपत्तियाँ (जैसे ग्रामीण सड़कें, स्कूल भवन, जलरोधक बाँध, तालाब)।

141. प्रश्न: आधुनिक युग में बड़ी कंपनियों द्वारा अपने विशिष्ट विभागों (जैसे कस्टमर केयर, लीगल) को बंद कर बाहरी छोटी फर्मों से काम कराने को क्या कहते हैं?

  • उत्तर: आउटसोर्सिंग (Outsourcing / बाह्यस्रोतन)

142. प्रश्न: सूचना प्रौद्योगिकी के विकास ने किस नई कार्य संस्कृति को जन्म दिया जो कोविड-19 के दौरान बहुत लोकप्रिय हुई?

  • उत्तर: घर से काम (Work from Home)

143. प्रश्न: देश में सबसे बड़ा औपचारिक क्षेत्रक नियोक्ता (Formal Sector Employer) कौन है?

  • उत्तर: सरकार (Government)

144. प्रश्न: राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) को अब किस नाम से जाना जाता है?

  • उत्तर: राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (NSO)

145. प्रश्न: रोज़गार अवसरों की जानकारी देने वाले मुख्य अंग्रेज़ी समाचार-पत्रों के विशेष परिशिष्ट कौन से हैं?

  • उत्तर: द हिंदू का ‘Opportunities’ और द टाइम्स ऑफ इंडिया का ‘Ascent’

भाग 10: पाठ्यपुस्तक अभ्यास प्रश्नोत्तरी (NCERT आधारित विशेष)

146. प्रश्न: क्या एक भिखारी, चोर या तस्कर को अर्थशास्त्र में ‘श्रमिक‘ माना जा सकता है?

  • उत्तर: नहीं, क्योंकि उनकी गतिविधियाँ अवैध/गैर-आर्थिक हैं और वे सकल राष्ट्रीय उत्पाद में वैध योगदान नहीं देतीं।

147. प्रश्न: “राज स्कूल जाता है और खाली समय में अपने माता-पिता के साथ खेत पर काम करता है।” क्या वह श्रमिक है?

  • उत्तर: हाँ, उसे आर्थिक क्रिया में हाथ बंटाने के कारण श्रमिक (पारिवारिक मददगार) माना जाएगा।

148. प्रश्न: मीना एक गृहिणी है जो घर के काम के साथ पति की कपड़े की दुकान पर भी बैठती है। क्या वह श्रमिक है?

  • उत्तर: हाँ, दुकान के काम में हाथ बंटाने के कारण उसे आंशिक/सहयोगी श्रमिक माना जाएगा।

149. प्रश्न: 4 या 5 व्यक्तियों को रोजगार देने वाला कोई छोटा निजी प्रतिष्ठान किस क्षेत्रक के अंतर्गत आएगा?

  • उत्तर: अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक (क्योंकि यहाँ 10 से कम कर्मचारी हैं)।

150. प्रश्न: भारत में नए उभरते हुए रोजगार के अवसर मुख्यतः किस क्षेत्रक में मिल रहे हैं?

  • उत्तर: सेवा (तृतीयक) क्षेत्रक में

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

श्रमबल का अनियतीकरण (Casualisation of Workforce) क्या है?
जब देश के श्रमिक अपने स्वरोजगार या नियमित वेतनभोगी रोजगार को छोड़कर अस्थाई या अनियत दिहाड़ी मजदूरी (Casual Labour) की ओर बढ़ने लगते हैं, तो विशेषज्ञों द्वारा इस प्रक्रिया को ‘श्रमबल का अनियतीकरण’ कहा जाता है। इसमें श्रमिकों की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुरक्षा बहुत असुरक्षित हो जाती है।
प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment) किसे कहते हैं और यह कहाँ पाई जाती है?
प्रच्छन्न या छिपी हुई बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं। यदि इनमें से कुछ लोगों को काम से हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता (यानी इन अतिरिक्त श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है)। यह मुख्य रूप से भारत के ग्रामीण कृषि क्षेत्रक में पाई जाती है।
भारत में औपचारिक (संगठित) और अनौपचारिक (असंगठित) क्षेत्रक में क्या अंतर है?
सभी सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम और 10 या अधिक कर्मचारियों वाले निजी प्रतिष्ठान औपचारिक क्षेत्रक कहलाते हैं, जहाँ सामाजिक सुरक्षा (PF, पेंशन) और श्रम कानून लागू होते हैं। इसके विपरीत, 10 से कम कर्मचारियों वाले छोटे निजी उद्यम, कृषि और स्वनियोजित लोग अनौपचारिक क्षेत्रक में आते हैं, जहाँ आय की सुरक्षा और सामाजिक लाभ नहीं मिलते। भारत का लगभग 89% श्रमबल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है।
‘रोजगारहीन संवृद्धि’ (Jobless Growth) का क्या अर्थ है?
जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या उत्पादन की दर में तो बहुत तेज वृद्धि होती है, लेकिन उस अनुपात में नए रोजगार के अवसरों का सृजन नहीं होता, तो अर्थशास्त्री इस परिघटना को ‘रोजगारहीन संवृद्धि’ कहते हैं। भारत में 1990 के दशक के उत्तरार्ध में यह प्रवृत्ति देखी गई थी।
मनरेगा (MNREGA) अधिनियम क्या है और यह कितने दिनों के रोजगार की गारंटी देता है?
मनरेगा का पूरा नाम ‘महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ है, जिसे भारतीय संसद द्वारा वर्ष 2005 में पारित किया गया था। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के गारंटीशुदा अकुशल शारीरिक रोजगार (Unskilled Manual Work) की कानूनी गारंटी देती है।
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