प्रत्यायोजित विधायन (Delegated Legislation) आधुनिक शासन व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा है। जब संसद या विधायिका किसी कानून की केवल मुख्य रूपरेखा (Skeleton) तैयार करती है और उसके विस्तार, नियम या उप-नियम बनाने की शक्ति कार्यपालिका (सरकार) को सौंप देती है, तो इसे ‘प्रत्यायोजित विधायन’ कहते हैं। सरल शब्दों में, इसे ‘अधीनस्थ विधान’ भी कहा…
Month: July 2026
शक्ति पृथक्करण के सिद्धांत, विकास के कारण एवं महत्व
शक्ति पृथक्करण का सिद्धांत (Theory of Separation of Powers) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का एक मूल आधार है। इसका सरल अर्थ है कि सरकार की शक्तियों को किसी एक व्यक्ति या संस्था में केंद्रित करने के बजाय उन्हें अलग-अलग अंगों में बाँट देना। शक्ति पृथक्करण का अर्थ इस सिद्धांत के अनुसार, सरकार के तीन मुख्य अंग…