भाग 1: प्रारंभिक भक्ति परंपरा एवं पूजा प्रणालियों का समन्वय
- प्रश्न: इतिहास में भक्ति-सूफ़ी परंपराओं का काल कब से कब तक माना जाता है?
उत्तर: लगभग आठवीं से अठारहवीं सदी तक। - प्रश्न: प्रथम सहस्राब्दी के मध्य तक भारतीय उपमहाद्वीप का परिवेश किन धार्मिक इमारतों से चिह्नित हो चुका था?
उत्तर: स्तूप, विहार और मंदिरों से। - प्रश्न: इतिहासकारों के लिए इस काल के कौन से नूतन साहित्यिक स्रोत एक बड़ी चुनौती हैं?
उत्तर: संत कवियों की रचनाएँ। - प्रश्न: संत कवियों ने अपने विचारों को किस भाषा में व्यक्त किया था?
उत्तर: जनसाधारण की क्षेत्रीय भाषाओं में (मौखिक रूप से)। - प्रश्न: संत कवियों की मृत्यु के उपरांत उनकी रचनाओं का संकलन किसने किया?
उत्तर: उनके अनुयायियों (शिष्यों) द्वारा। - प्रश्न: इतिहासकार संत कवियों के विचारों को समझने के लिए उनकी रचनाओं के अलावा और किसका इस्तेमाल करते हैं?
उत्तर: उनके अनुयायियों द्वारा लिखी गई उनकी जीवनियों (Hagiographies) का। - प्रश्न: मणिक्वचक्कार की बारहवीं शताब्दी की कांस्य मूर्ति किस देवता के प्रति उनकी भक्ति को दर्शाती है?
उत्तर: शिव की (वे शिव के अनुयायी थे)। - प्रश्न: मणिक्वचक्कार किस भाषा में भक्ति गान की रचना करते थे?
उत्तर: तमिल भाषा में। - प्रश्न: इस काल की मूर्तिकला और साहित्य में किन मुख्य देवी-देवताओं की आराधना का विस्तार दिखा?
उत्तर: विष्णु, शिव और देवी (दुर्गा/पार्वती)। - प्रश्न: इतिहासकारों के अनुसार मध्यकाल में पूजा प्रणालियों के समन्वय के अंतर्गत कौन सी दो प्रक्रियाएँ कार्यरत थीं?
उत्तर: पहली ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रचार और दूसरी अन्य सामाजिक वर्गों की आस्थाओं को ब्राह्मणों द्वारा स्वीकृत किया जाना। - प्रश्न: ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रसार मुख्य रूप से किस माध्यम से हुआ?
उत्तर: पौराणिक ग्रंथों की रचना, संकलन और परिरक्षण द्वारा। - प्रश्न: पौराणिक ग्रंथ किस भाषा और छंद में लिखे गए थे जो स्त्रियों और शूद्रों के लिए भी ग्राह्य थे?
उत्तर: सरल संस्कृत छंदों में। - प्रश्न: समाजशास्त्रियों के अनुसार समूचे उपमहाद्वीप की धार्मिक पद्धतियाँ किन दो परंपराओं के बीच संवाद का परिणाम हैं?
उत्तर: “महान” (Great) और “लघु” (Little) परंपराओं के बीच। - प्रश्न: “महान” और “लघु” परंपराओं जैसे शब्दों को बीसवीं शताब्दी में किस समाजशास्त्री ने प्रतिपादित किया था?
उत्तर: राबर्ट रेडफील्ड ने। - प्रश्न: राबर्ट रेडफील्ड ने कृषक समाज में राजा और पुरोहित जैसे प्रभुत्वशाली वर्ग के कर्मकांडों को क्या संज्ञा दी?
उत्तर: “महान” परंपरा। - प्रश्न: कृषक समुदाय द्वारा पालन किए जाने वाले उन लोकाचारों को जो महान परिपाटी से भिन्न थे, रेडफील्ड ने क्या नाम दिया?
उत्तर: “लघु” परंपरा। - प्रश्न: पूजा प्रणालियों के समन्वय का सबसे विशिष्ट उदाहरण उड़ीसा के किस स्थान पर मिलता है?
उत्तर: पुरी में। - प्रश्न: पुरी (उड़ीसा) के मुख्य देवता ‘जगन्नाथ‘ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: संपूर्ण विश्व का स्वामी। - प्रश्न: बारहवीं शताब्दी तक आते-आते पुरी के जगन्नाथ को किस देवता का स्वरूप माना गया?
उत्तर: विष्णु का। - प्रश्न: पुरी में जगन्नाथ की प्रतिमा पारंपरिक रूप से किसके द्वारा और किस सामग्री से बनाई जाती है?
उत्तर: स्थानीय जनजाति के विशेषज्ञों द्वारा लकड़ी से। - प्रश्न: पुरी के गर्भगृह में जगन्नाथ जी के साथ और किसकी आकृतियाँ सुसज्जित हैं?
उत्तर: उनकी बहन सुभद्रा (मध्य) और भाई बलराम (बाएँ) की। - प्रश्न: देवी संप्रदायों में स्थानीय स्तर पर देवी की उपासना प्रायः किस रूप में की जाती थी?
उत्तर: सिंदूर से पोते गए पत्थर के रूप में। - प्रश्न: पौराणिक परंपरा के भीतर इन स्थानीय देवियों को किन मुख्य देवताओं की पत्नी के रूप में मान्यता मिली?
उत्तर: विष्णु की पत्नी लक्ष्मी और शिव की पत्नी पार्वती के रूप में।
भाग 2: भेद, संघर्ष और तांत्रिक पद्धति
- प्रश्न: अधिकांशतः देवी की आराधना पद्धति को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: तांत्रिक पद्धति। - प्रश्न: तांत्रिक पूजा पद्धति की सबसे बड़ी सामाजिक विशेषता क्या थी?
उत्तर: इसके अंतर्गत वर्ग और वर्ण के भेद की अवहेलना की जाती थी (स्त्री-पुरुष दोनों शामिल थे)। - प्रश्न: तांत्रिक पद्धति के विचारों ने हिंदू धर्म के अलावा और किन दर्शनों को प्रभावित किया?
उत्तर: शैव और बौद्ध दर्शन को। - प्रश्न: उपमहाद्वीप के किन भागों में तांत्रिक पद्धति का प्रभाव सबसे अधिक था?
उत्तर: पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी भागों में। - प्रश्न: आगामी सहस्त्राब्दी में इन समस्त मिश्रित विश्वासों और आचारों का वर्गीकरण किस रूप में हुआ?
उत्तर: “हिंदू” के रूप में। - प्रश्न: बौद्ध देवी ‘मारिची’ की मूर्ति (दसवीं शताब्दी, बिहार) किस प्रक्रिया का उदाहरण प्रस्तुत करती है?
उत्तर: विभिन्न धार्मिक विश्वासों और क्रियाकलापों के एकीकरण (समन्वय) की। - प्रश्न: पौराणिक काल में वैदिक देवकुल के कौन से मुख्य देवता पूरी तरह गौण (कम महत्व के) हो गए?
उत्तर: अग्नि, इंद्र और सोम। - प्रश्न: मध्यकाल में वैदिक परिपाटी के प्रशंसक किन आचारों की निंदा करते थे?
उत्तर: जो ईश्वर की उपासना के लिए मंत्रों के उच्चारण और यज्ञों के संपादन से परे थे। - प्रश्न: तांत्रिक आराधना में लगे लोग किसकी सत्ता की अवहेलना करते थे?
उत्तर: वैदिक सत्ता की। - प्रश्न: मध्यकाल में किन धर्मों के साथ भक्ति संप्रदायों (शैव/वैष्णव) के संबंध अक्सर तनावपूर्ण हो जाते थे?
उत्तर: बौद्ध और जैन धर्म से। - प्रश्न: भक्ति परंपरा को मुख्य रूप से किन दो वर्गों में बाँटा जाता है?
उत्तर: सगुण और निर्गुण। - प्रश्न: ‘सगुण’ भक्ति परंपरा से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: विशेषण सहित; इसमें शिव, विष्णु, उनके अवतारों और देवियों की मूर्त रूप में पूजा होती है। - प्रश्न: ‘निर्गुण’ भक्ति परंपरा के अंतर्गत ईश्वर की आराधना किस रूप में की जाती थी?
उत्तर: अमूर्त और निराकार ईश्वर के रूप में (बिना किसी मानवीय रूप के)।
भाग 3: तमिलनाडु के अलवार और नयनार संत
- प्रश्न: दक्षिण भारत (तमिलनाडु) में प्रारंभिक भक्ति आंदोलन की शुरुआत लगभग किस शताब्दी में हुई?
उत्तर: छठी शताब्दी में। - प्रश्न: तमिलनाडु के प्रारंभिक भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किन संतों ने किया?
उत्तर: अलवार और नयनार संतों ने। - प्रश्न: ‘अलवार’ शब्द का क्या अर्थ है और वे किस देवता के भक्त थे?
उत्तर: विष्णु भक्ति में तन्मय; वे भगवान विष्णु के उपासक थे। - प्रश्न: ‘नयनार’ संत किस देवता के भक्त थे?
उत्तर: भगवान शिव के। - प्रश्न: अलवार और नयनार संत अपने इष्ट की स्तुति में किस भाषा में भजन गाते थे?
उत्तर: तमिल भाषा में। - प्रश्न: अलवार और नयनार संतों द्वारा घोषित ‘पावन निवासस्थलों’ पर बाद में किनका निर्माण हुआ जो तीर्थस्थल बने?
उत्तर: विशाल मंदिरों का। - प्रश्न: ‘चतुर्वेदी’ शब्द से इतिहास में क्या तात्पर्य है?
उत्तर: चारों वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण। - प्रश्न: ‘चतुर्वेदी और अस्पृश्य’ नामक काव्यांश किस ब्राह्मण अलवार संत की रचना से लिया गया है?
उत्तर: तोंदराडिप्पोडि के काव्य से। - प्रश्न: संत तोंदराडिप्पोडि के अनुसार भगवान विष्णु वेदों के ज्ञाता अजनबी से ज्यादा किसे पसंद करते हैं?
उत्तर: उनके चरणों से प्रेम करने वाले “दासों” को, चाहे वे वर्ण-व्यवस्था के परे हों। - प्रश्न: “हे धूर्तजन, जो तुम शास्त्र को उद्धृत करते हो, तुम्हारा गोत्र और कुल भला किस काम का?” यह प्रसिद्ध छंद किसका है?
उत्तर: नयनार संत अप्पार का। - प्रश्न: संत अप्पार ने किसे अपना एकमात्र आश्रयदाता मानकर नतमस्तक होने की सीख दी?
उत्तर: मारपेरू के स्वामी (शिव) को। - प्रश्न: मारपेरू नामक स्थान वर्तमान भारत के किस राज्य और जिले में स्थित है?
उत्तर: तमिलनाडु के तंजावुर जिले में। - प्रश्न: इतिहासकारों के अनुसार अलवार और नयनार संतों ने समाज की किस व्यवस्था का कड़ा विरोध किया?
उत्तर: जाति प्रथा और ब्राह्मणों की प्रभुता का। - प्रश्न: अलवार और नयनार संत किन सामाजिक पृष्ठभूमि से संबंध रखते थे?
उत्तर: ब्राह्मण, शिल्पकार, किसान और कुछ “अस्पृश्य” मानी जाने वाली जातियों से। - प्रश्न: अलवार संतों के मुख्य काव्य संकलन का क्या नाम है?
उत्तर: नलयिरादिव्यप्रबंधम्। - प्रश्न: नलयिरादिव्यप्रबंधम् का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: “चार हजार पावन रचनाएँ”। - प्रश्न: दक्षिण भारत के किस ग्रंथ को ‘तमिल वेद‘ के रूप में वर्णित करके सम्मानित किया गया है?
उत्तर: नलयिरादिव्यप्रबंधम् को (इसका महत्व चारों वेदों जितना बताया गया)। - प्रश्न: दसवीं शताब्दी तक कुल कितने अलवार संतों की रचनाओं का संकलन किया गया था?
उत्तर: बारह (12) अलवार संतों की। - प्रश्न: नयनार संतों की कविताओं के मुख्य संकलन का क्या नाम है?
उत्तर: तवरम (तेवरम)। - प्रश्न: ‘तवरम’ नामक संकलन में किन मुख्य नयनार संतों की कविताएँ रखी गई हैं?
उत्तर: अप्पार, संबंदर और सुंदरार की। - प्रश्न: तवरम में कविताओं का वर्गीकरण किस आधार पर किया गया है?
उत्तर: संगीत (रागों) के आधार पर।
भाग 4: दक्षिण की स्त्री भक्त और राज्य से संबंध
- प्रश्न: अलवार परंपरा की सबसे प्रसिद्ध स्त्री भक्त कौन थीं जिनके गीत आज भी व्यापक स्तर पर गाए जाते हैं?
उत्तर: अंडाल। - प्रश्न: अंडाल स्वयं को किसका प्रेयसी मानकर अपनी प्रेमभावना को छंदों में व्यक्त करती थीं?
उत्तर: भगवान विष्णु की। - प्रश्न: नयनार (शैव) परंपरा की उस प्रसिद्ध स्त्री भक्त का नाम क्या है जिसने घोर तपस्या का मार्ग अपनाया?
उत्तर: कराइक्काल अम्मइयार। - प्रश्न: कराइक्काल अम्मइयार की रचनाओं को किस परंपरा के तहत सुरक्षित किया गया?
उत्तर: नयनार परंपरा में। - प्रश्न: अंडाल और कराइक्काल अम्मइयार जैसी स्त्री भक्तों ने समाज के किन आदर्शों को कड़ी चुनौती दी?
उत्तर: पितृसत्तात्मक आदर्शों को (सामाजिक कर्तव्यों का परित्याग करके)। - प्रश्न: “राक्षसी, फूली हुई नाड़ियों वाली, बाहर निकली आँखें, सफेद दाँत और भीतर धँसा उदर…” यह कविता किसकी है?
उत्तर: कराइक्काल अम्मइयार की (जिसमें उन्होंने स्वयं को एक राक्षसी के रूप में प्रस्तुत किया)। - प्रश्न: कराइक्काल अम्मइयार की कविता में वर्णित ‘अलंकटु का वन’ किसका घर माना गया है?
उत्तर: हमारे पिता यानी भगवान शिव का। - प्रश्न: कराइक्काल अम्मइयार की बारहवीं शताब्दी की प्रसिद्ध कांस्य मूर्ति में उन्हें किस मुद्रा में दिखाया गया है?
उत्तर: बैठी हुई दुबली-पतली, ध्यानस्थ या मंजीरा बजाती मुद्रा में। - प्रश्न: प्रथम सहस्राब्दी के उत्तरार्ध में तमिल क्षेत्र में किन दो प्रमुख राज्यों का उदय और विकास हुआ?
उत्तर: पल्लव और पांड्य राज्य (छठी से नवीं शताब्दी ईसवी)। - प्रश्न: पल्लव और पांड्य काल में बौद्ध और जैन धर्म को मुख्य रूप से किस वर्ग का आश्रय हासिल था?
उत्तर: व्यापारी और शिल्पी वर्ग का। - प्रश्न: तमिल भक्ति रचनाओं (विशेषकर नयनार संतों) की एक मुख्य उग्र विषयवस्तु क्या थी?
उत्तर: बौद्ध और जैन धर्म का कड़ा विरोध। - प्रश्न: इतिहासकारों के अनुसार मध्यकाल में विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच विरोध का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: राजकीय अनुदान (भूमि और धन) को लेकर आपस में प्रतिस्पर्धा। - प्रश्न: नवीं से तेरहवीं शताब्दी के दौरान दक्षिण भारत के किस शक्तिशाली साम्राज्य के सम्राटों ने ब्राह्मणीय और भक्ति परंपरा को पूर्ण समर्थन दिया?
उत्तर: चोल सम्राटों ने। - प्रश्न: चोल राजाओं की मदद से निर्मित विशाल शिव मंदिर कहाँ-कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: चिदम्बरम, तंजावुर और गंगैकोंडचोलपुरम में। - प्रश्न: कांस्य में ढाली गई ‘नटराज’ के रूप में शिव की विश्व प्रसिद्ध प्रतिमाएँ किस साम्राज्य के काल में बनीं?
उत्तर: चोल साम्राज्य के काल में। - प्रश्न: नयनार और अलवार संतों को दक्षिण भारत के किस समृद्ध कृषक वर्ग द्वारा अत्यधिक सम्मान प्राप्त था?
उत्तर: वेल्लाल कृषकों द्वारा। - प्रश्न: चोल राजाओं ने मंदिरों में जन-भाषा में रचित किन भजनों के गायन की परिपाटी को संस्थागत रूप से प्रचलित किया?
उत्तर: तमिल भाषा के शैव भजनों (तवरम) को। - प्रश्न: किस चोल सम्राट ने तमिल शैव भजनों का संकलन ‘तवरम’ नामक ग्रंथ के रूप में करवाने का ज़िम्मा उठाया?
उत्तर: चोल राजाओं ने (राजकीय संरक्षण में)। - प्रश्न: 945 ईसवी के एक अभिलेख के अनुसार किस चोल सम्राट ने शिव मंदिर में संत अप्पार, संबंदर और सुंदरार की धातु प्रतिमाएँ स्थापित करवाई थीं?
उत्तर: चोल सम्राट परांतक प्रथम ने।
भाग 5: कर्नाटक की वीरशैव / लिंगायत परंपरा
- प्रश्न: बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक में किस नवीन और प्रभावशाली धार्मिक आंदोलन का उद्भव हुआ?
उत्तर: वीरशैव या लिंगायत आंदोलन का। - प्रश्न: कर्नाटक के वीरशैव आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था?
उत्तर: बासवन्ना (1110-68) नामक एक ब्राह्मण ने। - प्रश्न: आंदोलन शुरू करने से पहले बासवन्ना किस राजा के दरबार में मंत्री थे?
उत्तर: कलाचुरी राजा के दरबार में। - प्रश्न: बासवन्ना के अनुयायियों को किन दो नामों से जाना जाता है?
उत्तर: वीरशैव (शिव के वीर) और लिंगायत (लिंग धारण करने वाले)। - प्रश्न: लिंगायत समुदाय के लोग भगवान शिव की आराधना किस रूप में करते हैं?
उत्तर: लिंग के रूप में। - प्रश्न: लिंगायत समुदाय के पुरुष अपने शरीर पर लघु लिंग को कहाँ और कैसे धारण करते हैं?
उत्तर: अपने वाम स्कंध (बाएँ कंधे) पर चाँदी के एक पिटारे में। - प्रश्न: लिंगायत समुदाय में ‘जंगम’ शब्द से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: यायावर (घूमने वाले) भिक्षु। - प्रश्न: मृत्यु और पुनर्जन्म के संबंध में लिंगायतों का क्या मुख्य विश्वास है?
उत्तर: मृत्योपरांत भक्त शिव में लीन हो जाएँगे और इस संसार में पुनः लौटकर नहीं आएँगे (वे पुनर्जन्म को नहीं मानते)। - प्रश्न: लिंगायत समुदाय अपने मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए धर्मशास्त्र के किस नियम का पालन नहीं करता?
उत्तर: वे श्राद्ध संस्कार नहीं करते तथा अपने मृतकों को विधिपूर्वक दफनाते हैं। - प्रश्न: लिंगायतों ने ब्राह्मणों की किस मुख्य सामाजिक अवधारणा का कड़ा विरोध किया?
उत्तर: जाति की अवधारणा और कुछ समुदायों के “दूषित” (अस्पृश्य) होने की अवधारणा का। - प्रश्न: ब्राह्मणीय सामाजिक व्यवस्था में हाशिए पर रहे लोगों के लिंगायत बनने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: लिंगायतों द्वारा जाति प्रथा का विरोध और सभी को समानता देना। - प्रश्न: धर्मशास्त्रों में अस्वीकार किए गए किन सामाजिक सुधारों को लिंगायतों ने खुलकर मान्यता प्रदान की?
उत्तर: वयस्क विवाह और विधवा पुनर्विवाह को। - प्रश्न: वीरशैव परंपरा के साहित्यिक स्रोत क्या हैं और वे किस भाषा में रचे गए हैं?
उत्तर: ‘वचन‘ (कन्नड़ भाषा में) जो इस आंदोलन में शामिल स्त्री-पुरुषों द्वारा रचे गए थे। - प्रश्न: “जब वे एक पत्थर से बने सर्प को देखते हैं तो उस पर दूध चढ़ाते हैं, यदि असली साँप आ जाए तो कहते हैं ‘मारो-मारो’।” यह वचन किसका है?
उत्तर: महात्मा बासवन्ना का। - प्रश्न: बासवन्ना ने अपने ‘वचन’ के माध्यम से समाज की किस बुराई पर कटाक्ष किया है?
उत्तर: खोखले धार्मिक अनुष्ठानों और पाखंड पर।
भाग 6: उत्तर भारत में धार्मिक उफ़ान और नए विकास
- प्रश्न: तमिल वैष्णव भक्तों के विचारों को संस्कृत परंपरा में समाहित करने का सबसे बड़ा परिणाम किस महापुराण की रचना थी?
उत्तर: भागवत पुराण की रचना। - प्रश्न: तेरहवीं शताब्दी में भक्ति परंपरा का एक बड़ा विकास पश्चिमी भारत के किस क्षेत्र में हुआ?
उत्तर: महाराष्ट्र में (वारकरी संप्रदाय आदि)। - प्रश्न: इतिहासकारों को चौदहवीं शताब्दी तक उत्तर भारत से अलवार/नयनार जैसी संकलित रचनाएँ क्यों प्राप्त नहीं हुईं?
उत्तर: क्योंकि वहाँ राजपूत राज्यों का प्रभुत्व था जहाँ ब्राह्मणों की सत्ता को सीधी चुनौती नहीं मिली थी। - प्रश्न: उत्तर भारत में रूढ़िवादी ब्राह्मणीय साँचे से बाहर कौन से धार्मिक नेता और संप्रदाय लोकप्रिय हो रहे थे?
उत्तर: नाथ, जोगी (योगी) और सिद्ध। - प्रश्न: नाथ, जोगी और सिद्ध संप्रदायों में आने वाले लोग मुख्य रूप से किस सामाजिक वर्ग से थे?
उत्तर: शिल्पी समुदाय (जैसे जुलाहे/बुनकर) से। - प्रश्न: मध्यकाल में उत्तर भारत में दस्तकारी की वस्तुओं की माँग बढ़ने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: नगरीय केंद्रों का विस्तार तथा मध्य व पश्चिमी एशिया के साथ व्यापार का प्रसार। - प्रश्न: नाथ और जोगी जैसे नवीन धार्मिक नेताओं ने किसकी सत्ता को चुनौती देकर अपने विचार आम लोगों की भाषा में रखे?
उत्तर: वेदों की सत्ता को। - प्रश्न: तेरहवीं शताब्दी में उत्तर भारत की संस्कृति और राजनीति में किस नए तत्व के आगमन से राजपूत राज्यों का पराभव हुआ?
उत्तर: तुर्कों का आगमन और दिल्ली सल्तनत की स्थापना। - प्रश्न: दिल्ली सल्तनत की स्थापना का उत्तर भारत के धार्मिक ताने-बाने पर क्या बड़ा प्रभाव पड़ा?
उत्तर: ब्राह्मणों की प्रभुसत्ता कमजोर हुई और सूफ़ियों का आगमन हुआ।
भाग 7: इस्लामी परंपराएँ, शरिया और उलमा
- प्रश्न: प्रथम सहस्राब्दी ईसवी में अरब व्यापारी समुद्र के रास्ते सबसे पहले भारत के किस तट पर आए थे?
उत्तर: पश्चिमी भारत के बंदरगाहों (जैसे मालाबार तट, केरल) पर। - प्रश्न: भारत के किस प्रांत को सबसे पहले 711 ईसवी में एक अरब सेनापति ने जीतकर खलीफ़ा के क्षेत्र में शामिल किया था?
उत्तर: सिंध को। - प्रश्न: 711 ईसवी में सिंध पर विजय प्राप्त करने वाले अरब सेनापति का नाम क्या था?
उत्तर: मुहम्मद बिन कासिम। - प्रश्न: दिल्ली सल्तनत की नींव लगभग किस शताब्दी में और किन शासकों द्वारा रखी गई थी?
उत्तर: तेरहवीं शताब्दी ईसवी में, तुर्क और अफ़गान शासकों द्वारा। - प्रश्न: सोलहवीं शताब्दी में भारत में किस महान मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना हुई जिसने इस्लामी शासन को सुदृढ़ किया?
उत्तर: मुगल सल्तनत की। - प्रश्न: इस्लाम धर्म के ज्ञाताओं और संरक्षकों को क्या कहा जाता है जो धार्मिक, कानूनी और अध्यापन की जिम्मेदारी निभाते थे?
उत्तर: उलमा (यह ‘आलिम’ शब्द का बहुवचन है)। - प्रश्न: सैद्धांतिक रूप से मुसलमान शासकों से उलमा द्वारा किस कानून के पालन को सुनिश्चित करने की अपेक्षा की जाती थी?
उत्तर: शरिया (Sharia) कानून का। - प्रश्न: ‘शरिया’ क्या है और यह मुख्य रूप से किन दो स्रोतों पर आधारित है?
उत्तर: मुसलमान समुदाय को निर्देशित करने वाला कानून; यह कुरान शरीफ़ और हदीस पर आधारित है। - प्रश्न: ‘हदीस’ का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर: पैगम्बर साहब से जुड़ी परंपराएँ, जिसके तहत उनके स्मृत शब्द और क्रियाकलाप आते हैं। - प्रश्न: अरब क्षेत्र से बाहर इस्लाम का प्रसार होने पर शरिया कानून में किन दो नए तत्वों को जोड़ा गया?
उत्तर: कियास (सदृशता के आधार पर तर्क) और इजमा (समुदाय की सहमति)। - प्रश्न: इस्लामी शासकों के क्षेत्र में रहने वाली गैर-मुस्लिम जनता को क्या कहा जाता था जिन्हें ‘संरक्षित श्रेणी’ माना गया?
उत्तर: ज़िम्मी (अरबी शब्द जिम्मा से व्युत्पन्न)। - प्रश्न: ‘ज़िम्मी’ श्रेणी के लोग इस्लामी राज्य में संरक्षण प्राप्त करने के बदले कौन सा कर चुकाते थे?
उत्तर: जज़िया (Jizya) नामक कर। - प्रश्न: भारत में जज़िया कर के दायरे में ईसाई और यहूदियों के अलावा और किसे शामिल कर लिया गया था?
उत्तर: हिंदुओं को भी। - प्रश्न: अकबर ने गुजरात के किस शहर में ईसाई पादरियों को गिरजाघर (Church) बनाने के लिए 1598 में शाही फ़रमान जारी किया था?
उत्तर: खम्बात (खम्बायत) में। - प्रश्न: मुगल सम्राट औरंगज़ेब द्वारा 1661-62 में किस जोगी (शैव गुरु) को पत्र लिखकर पोशाक और 25 रुपये की भेंट भेजी गई थी?
उत्तर: गुरु आनंद नाथ जियो को (उन्हें ‘शिव मूरत’ कहा गया)। - प्रश्न: औरंगज़ेब के पत्र से मुगलों की गैर-मुस्लिम धार्मिक नेताओं के प्रति किस नीति का पता चलता है?
उत्तर: लचीली और श्रद्धाभाव रखने वाली नीति का (भूमि अनुदान और भेंट देना)।
भाग 8: लोक प्रचलन में इस्लाम और स्थापत्य कला
- प्रश्न: इस्लाम धर्म कबूल करने वाले लोगों के लिए सैद्धांतिक रूप से अनिवार्य पाँच मुख्य बातें (स्तंभ) कौन सी हैं?
उत्तर: 1. अल्लाह एकमात्र ईश्वर है और पैगम्बर मोहम्मद उनके दूत (शाहद) हैं, 2. दिन में पाँच बार नमाज़, 3. खैरात (ज़कात) बाँटना, 4. रमजान में रोज़ा रखना, और 5. हज यात्रा। - प्रश्न: खोजा इस्माइली (शिया) समुदाय के लोगों ने कुरान के विचारों को स्थानीय लोगों तक पहुँचाने के लिए किस विधा का सहारा लिया?
उत्तर: देशी साहित्यिक विधा ‘जीनन‘ का। - प्रश्न: ‘जीनन’ शब्द किस संस्कृत शब्द से बना है और इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: संस्कृत शब्द ‘ज्ञान‘ से; यह रागों में निबद्ध भक्ति गीत होते थे। - प्रश्न: केरल के मालाबार तट पर बसने वाले अरब व्यापारियों ने स्थानीय समाज की किन दो अनोखी सामाजिक परिपाटियों को अपनाया?
उत्तर: मातृकुलीयता और मातृगृहता को। - प्रश्न: ‘मातृगृहता’ नामक सामाजिक परिपाटी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जहाँ स्त्रियाँ विवाह के बाद अपने मायके में ही अपनी संतान के साथ रहती हैं और पति उनके साथ आकर रह सकते हैं। - प्रश्न: मस्जिदों की स्थापत्य कला के वे दो तत्व कौन से हैं जो पूरी दुनिया में ‘सार्वभौमिक’ (एक समान) हैं?
उत्तर: इमारत का मक्का की तरफ़ अनुस्थापन, जिसमें मेहराब (प्रार्थना का आला) और मिम्बर (व्यासपीठ) शामिल हैं। - प्रश्न: केरल की तेहरवीं शताब्दी की मस्जिदों की सबसे अनूठी स्थानीय विशेषता क्या है?
उत्तर: उनकी छत का आकार मंदिर की तरह शिखरनुमा होना। - प्रश्न: बांग्लादेश के मैमनसिंग जिले में स्थित ईंटों से बनी ‘अतिया मस्जिद’ का निर्माण किस वर्ष हुआ था?
उत्तर: 1609 ईसवी में। - प्रश्न: श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे स्थित किस मस्जिद को कश्मीर की सभी मस्जिदों में ‘मुकुट का नगीना‘ समझा जाता है?
उत्तर: शाह हमदान मस्जिद को। - प्रश्न: शाह हमदान मस्जिद का निर्माण कब हुआ था और यह किस स्थापत्य कला का सर्वोत्तम उदाहरण है?
उत्तर: 1395 ईसवी में, कश्मीरी लकड़ी की स्थापत्य कला का। - प्रश्न: शाह हमदान मस्जिद के आंतरिक हिस्से को अंदर से किससे सजाया गया है?
उत्तर: पेपरमैशी (Paper Mache) के काम से। - प्रश्न: संस्कृत ग्रंथों और अभिलेखों में (आठवीं से चौहदवीं शताब्दी तक) मुस्लिम प्रवासियों के लिए ‘मुसलमान’ शब्द के बजाय किस आधार पर वर्गीकरण मिलता है?
उत्तर: उनके जन्मस्थान (भौगोलिक क्षेत्र) के आधार पर। - प्रश्न: प्राचीन और मध्यकाल में तुर्की मुसलमानों को संस्कृत अभिलेखों में क्या कहा गया है?
उत्तर: तुरुष्क। - प्रश्न: तजाकिस्तान और फारस (ईरान) से आए लोगों को प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में क्रमशः क्या नाम दिए गए?
उत्तर: तजाकिस्तान के लोगों को ताजिक और फारस के लोगों को पारसीक। - प्रश्न: संस्कृत परंपरा में तुर्क और अफ़गानों को प्राचीन काल के किन शासकों के नामों से भी जोड़ा गया?
उत्तर: शक और यवन (यवन शब्द मूलतः ग्रीक लोगों के लिए था)। - प्रश्न: उन प्रवासी समुदायों के लिए संस्कृत में कौन सा सामान्य शब्द प्रयुक्त होता था जो वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे और गैर-संस्कृत भाषा बोलते थे?
उत्तर: म्लेच्छ (Mlechchha)। - प्रश्न: ‘हिंदू’ शब्द की व्युत्पत्ति किस प्राचीन सिंधु नदी के नाम से हुई थी और यह मूलतः कैसा शब्द था?
उत्तर: सिंधु नदी से (फारसी भाषा में ‘हिंदू‘); यह शुरू में एक धार्मिक शब्द नहीं बल्कि भौगोलिक संकेतक था।
भाग 9: सूफ़ीमत का विकास, खानकाह और सिलसिला
- प्रश्न: ‘सूफ़ीवाद’ (Sufism) उन्नीसवीं शताब्दी में मुद्रित एक अंग्रेजी शब्द है, इसके लिए मूल इस्लामी ग्रंथों में किस शब्द का प्रयोग होता है?
उत्तर: तसव्वुफ़ (Tasawwuf)। - प्रश्न: विद्वानों के अनुसार ‘सूफ़’ शब्द का क्या अर्थ है जिससे सूफ़ी शब्द निकला है?
उत्तर: ‘ऊन‘ (Wool); यह उस खुरदुरे ऊनी कपड़े की ओर इशारा करता है जो सूफ़ी पहनते थे। - प्रश्न: कुछ विद्वान सूफ़ी शब्द की व्युत्पत्ति ‘सफ़ा’ से मानते हैं, इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: साफ़ (पवित्रता) या पैगम्बर की मस्जिद के बाहर का वह चबूतरा जहाँ अनुयायी इकट्ठे होते थे। - प्रश्न: इस्लाम की आरंभिक शताब्दियों में खिलाफ़त की बढ़ती राजनीतिक सत्ता के विरुद्ध किन लोगों का रहस्यवाद और वैराग्य की ओर झुकाव बढ़ा?
उत्तर: सूफ़ियों का। - प्रश्न: सूफ़ियों ने पैगम्बर मोहम्मद को क्या बताते हुए उनका अनुसरण करने की सीख दी?
उत्तर: इंसान-ए-कामिल (आदर्श मानव)। - प्रश्न: संस्थागत दृष्टि से सूफ़ी स्वयं को किस संगठित समुदाय के इर्द-गिर्द स्थापित करते थे?
उत्तर: खानकाह (Khanqah) के इर्द-गिर्द। - प्रश्न: खानकाह का पूर्ण नियंत्रण किसके हाथ में होता था?
उत्तर: शेख (अरबी में), पीर अथवा मुर्शीद (फारसी में) के हाथ में। - प्रश्न: सूफ़ी मत में ‘मुरीद’ और ‘खलीफ़ा’ शब्दों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: मुरीद का अर्थ अनुयायी (शिष्य) और खलीफ़ा का अर्थ शेख का वारिस (उत्तराधिकारी) है। - प्रश्न: बारहवीं शताब्दी के आसपास इस्लामी दुनिया में किसका गठन होने लगा जिसका शाब्दिक अर्थ ‘जंजीर‘ है?
उत्तर: सिलसिला (Silsila) का। - प्रश्न: सूफ़ी मत में ‘सिलसिला’ की पहली अटूट कड़ी किससे जुड़ी मानी जाती है?
उत्तर: पैगम्बर मोहम्मद साहब से। - प्रश्न: ‘दरगाह’ किस भाषा का शब्द है और इसका शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
उत्तर: फारसी भाषा का शब्द; इसका अर्थ ‘दरबार‘ होता है। - प्रश्न: सूफ़ी पीर की मृत्यु के बाद उनकी बरसी के अवसर पर की जाने वाली तीर्थयात्रा (जियारत) को क्या कहा जाता है?
उत्तर: उर्स (Urs)। - प्रश्न: सूफ़ी शब्दावली में ‘उर्स’ का आध्यात्मिक अर्थ क्या होता है?
उत्तर: विवाह, अर्थात पीर की आत्मा का ईश्वर (अल्लाह) से मिलन। - प्रश्न: सूफ़ी मत में ‘वली’ (बहुवचन औलिया) का क्या अर्थ है?
उत्तर: ईश्वर का मित्र (वह सूफ़ी जो अल्लाह के नजदीक होने का दावा करता था)। - प्रश्न: वली या सूफ़ी संतों के पास अल्लाह से मिली किस चमत्कारी शक्ति का होना माना जाता था?
उत्तर: करामात करने की शक्ति (बरकत)। - प्रश्न: खानकाह का तिरस्कार करके फकीर की जिंदगी बिताने वाले रहस्यवादियों को शरिया की अवहेलना के कारण क्या कहा जाता था?
उत्तर: बे-शरिया (जैसे- कलंदर, मदारी, मलंग, हैदरी)। - प्रश्न: शरिया कानून का कड़ाई से पालन करने वाले परंपरागत सूफ़ियों को क्या कहा जाता था?
उत्तर: बा-शरिया। - प्रश्न: सूफ़ी सिलसिलों के नाम प्रायः किस आधार पर रखे जाते थे?
उत्तर: उन्हें स्थापित करने वालों के नाम पर (जैसे कादरी) या उनके जन्मस्थान के नाम पर (जैसे चिश्ती)। - प्रश्न: ‘कादरी’ सिलसिले का नामकरण किस सूफ़ी संत के नाम पर हुआ था?
उत्तर: शेख अब्दुल कादिर जिलानी के नाम पर। - प्रश्न: ‘चिश्ती’ सिलसिले का नाम मध्य अफगानिस्तान के किस शहर से लिया गया है?
उत्तर: चिश्ती शहर से।
भाग 10: भारत में चिश्ती सिलसिला और खानकाही जीवन
- प्रश्न: बारहवीं शताब्दी के अंत में भारत आने वाले सूफ़ी समुदायों में सबसे अधिक प्रभावशाली कौन सा सिलसिला रहा?
उत्तर: चिश्ती सिलसिला। - प्रश्न: भारत में चिश्ती सिलसिले के सबसे अधिक लोकप्रिय होने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: उन्होंने स्वयं को स्थानीय परिवेश में ढाला तथा भारतीय भक्ति परंपरा की कई विशिष्टताओं को अपनाया। - प्रश्न: प्रसिद्ध चिश्ती संत शेख निजामुद्दीन औलिया (चौदहवीं शताब्दी) की खानकाह दिल्ली में किस नदी के किनारे स्थित थी?
उत्तर: यमुना नदी के किनारे ‘गियासपुर‘ में। - प्रश्न: चिश्ती खानकाह के उस बड़े हॉल को क्या कहा जाता था जहाँ सहवासी और अतिथि एक साथ रहते और इबादत करते थे?
उत्तर: जमातखाना (Jamatkhana)। - प्रश्न: चिश्ती खानकाहों में बिना माँगे मिलने वाले दान या खैर को क्या कहा जाता था जिस पर सामुदायिक रसोई चलती थी?
उत्तर: फुतूह (Futuh)। - प्रश्न: चिश्ती खानकाह की सामुदायिक रसोई को किस नाम से जाना जाता था?
उत्तर: लंगर (Langar)। - प्रश्न: अमीर हसन सिजज़ी और अमीर खुसरो जैसे महान कवि किस चिश्ती संत के परम शिष्य थे?
उत्तर: शेख निजामुद्दीन औलिया के। - प्रश्न: चिश्ती खानकाह में स्थानीय संस्कृति को आत्मसात करने वाले कौन से व्यवहार अपनाए गए थे?
उत्तर: शेख के सामने झुकना, मिलने वालों को पानी पिलाना, दीक्षितों के सिर का मुंडन और यौगिक व्यायाम। - प्रश्न: भारत के पाँच महान चिश्ती संतों का सही कालक्रम क्या है?
उत्तर: 1. शेख मुइनुद्दीन चिश्ती (मृत्यु 1235), 2. ख़्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (मृत्यु 1235), 3. शेख फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर (मृत्यु 1265), 4. शेख निजामुद्दीन औलिया (मृत्यु 1325), 5. शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहली (मृत्यु 1356)। - प्रश्न: अजमेर (राजस्थान) में किस महान सूफ़ी संत की विश्व प्रसिद्ध दरगाह स्थित है?
उत्तर: शेख मुइनुद्दीन चिश्ती की (इन्हें ‘गरीब नवाज़‘ भी कहा जाता है)। - प्रश्न: ख़्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी और शेख निजामुद्दीन औलिया की दरगाहें कहाँ स्थित हैं?
उत्तर: दिल्ली में। - प्रश्न: प्रसिद्ध चिश्ती संत शेख फरीदुद्दीन गंज-ए-शकर (बाबा फरीद) की दरगाह वर्तमान में कहाँ स्थित है?
उत्तर: अजोधन (वर्तमान पाकिस्तान में)। - प्रश्न: 1039 ईसवी में गजनी से बंदी के रूप में आकर लाहौर में बसने वाले उस सूफ़ी का नाम क्या है जिन्हें ‘दाता गंज बख्श‘ कहा जाता है?
उत्तर: अबुल हसन अल हुजविरी। - प्रश्न: अबुल हसन अल हुजविरी द्वारा फारसी में लिखी गई तसव्वुफ़ की प्रसिद्ध किताब का नाम क्या है?
उत्तर: कश्फ-उल-महजुब (परदे वाले की बेपर्दगी)।
भाग 11: चिश्ती उपासना : जियारत, कव्वाली और राजकीय संबंध
- प्रश्न: ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर आने वाला दिल्ली का पहला सुल्तान कौन था?
उत्तर: मुहम्मद बिन तुगलक (1324-51)। - प्रश्न: अजमेर की दरगाह पर शेख की मज़ार पर सबसे पहली इमारत पंद्रहवीं शताब्दी में किसने बनवाई थी?
उत्तर: मालवा के सुल्तान गियासुद्दीन खलजी ने। - प्रश्न: मुगल बादशाह अकबर अपने जीवन में अजमेर की दरगाह पर कुल कितनी बार आया था?
उत्तर: चौदह (14) बार। - प्रश्न: अकबर ने किस वर्ष तीर्थयात्रियों के लिए बड़े पैमाने पर खाना पकाने हेतु एक विशाल ‘देग‘ (कड़ाहा) दरगाह को भेंट की थी?
उत्तर: 1568 ईसवी में। - प्रश्न: सूफ़ी उपासना पद्धति में ‘जिक्र’ और ‘समा’ शब्दों से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जिक्र का अर्थ ईश्वर का नाम-जाप और समा का अर्थ आध्यात्मिक संगीत की महफिल (श्रवण करना) है। - प्रश्न: शेख नसीरुद्दीन चिराग-ए-देहली की दरगाह के महत्व को ‘मुरक्का-ए-देहली’ (दिल्ली की अलबम) में किसने दर्ज किया है?
उत्तर: अठारहवीं शताब्दी के दरगाह कुली खान ने। - प्रश्न: दरगाह कुली खान के अनुसार दिल्ली की पूरी आबादी (हिंदू-मुसलमान) किस त्योहार के महीने में दरगाह पर उमड़ पड़ती थी?
उत्तर: दीवाली के महीने में। - प्रश्न: मुगल शहज़ादी जहाँआरा (शाहजहाँ की पुत्री) ने 1643 में अजमेर की यात्रा के बाद शेख मुइनुद्दीन चिश्ती की कौन सी जीवनी लिखी थी?
उत्तर: मुनिस-अल-अखवाह (आत्मा का विश्वस्त)। - प्रश्न: दिल्ली में चिश्ती सिलसिले के लोग आपस में बातचीत के लिए किस स्थानीय भाषा का प्रयोग करते थे?
उत्तर: हिंदवी (Early Hindi/Urdu) का। - प्रश्न: चिश्ती संत बाबा फरीद की क्षेत्रीय भाषा में रचित काव्य रचनाएँ हिंदुओं के किस पवित्र ग्रंथ में संकलित हैं?
उत्तर: गुरु ग्रंथ साहिब में। - प्रश्न: मलिक मोहम्मद जायसी का प्रसिद्ध प्रेमाख्यान ‘पद्मावत‘ किनकी प्रेम कथा के इर्द-गिर्द घूमता है?
उत्तर: रानी पद्मिनी और चित्तौड़ के राजा रतनसेन की। - प्रश्न: ‘दक्खनी’ (उर्दू का एक रूप) में लिखी गई छोटी कविताएँ, ‘लोरीनामा’ और ‘शादीनामा’ किस क्षेत्र के संतों द्वारा रची गईं?
उत्तर: बीजापुर (कर्नाटक) के चिश्ती संतों द्वारा। - प्रश्न: बीजापुर के सूफ़ियों की लघु कविताओं पर किन स्थानीय संतों की परंपराओं का गहरा प्रभाव था?
उत्तर: लिंगायतों के कन्नड़ वचनों और पंढरपुर के संतों के मराठी अभंगों का। - प्रश्न: महान कवि और संगीतज्ञ अमीर खुसरो ने चिश्ती समा को नया रूप देने के लिए किस अरबी विधा का प्रचलन किया?
उत्तर: कौल (Qaul – जिसका अर्थ ‘काहावत‘ है)। - प्रश्न: उपमहाद्वीप की सभी दरगाहों पर गाई जाने वाली ‘कव्वाली‘ की शुरुआत और अंत हमेशा किससे होता है?
उत्तर: कौल के गायन से। - प्रश्न: सुल्तानों द्वारा खानकाहों को दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि को क्या कहा जाता था?
उत्तर: इनाम (Inam) या मदाद-ए-माश। - प्रश्न: शेख निजामुद्दीन औलिया के अनुयायी उन्हें किस आडंबरपूर्ण पदवी से संबोधित करते थे जिसका अर्थ ‘शेखों में सुल्तान‘ है?
उत्तर: सुल्तान-उल-मशेख। - प्रश्न: दिल्ली सल्तनत के युग में चिश्तियों के विपरीत कौन से सूफ़ी सिलसिले राज्य के प्रशासनिक पदों से सीधे जुड़े रहे?
उत्तर: सुहरावर्दी और मुग़ल काल में नक्शबंदी सिलसिला। - प्रश्न: फतेहपुर सीकरी में अकबर द्वारा बनवाई गई बाबा फरीद के वंशज की दरगाह का क्या नाम है जो मुगलों और चिश्तियों के घनिष्ठ संबंध का प्रतीक है?
उत्तर: शेख सलीम चिश्ती की दरगाह।
भाग 12: नवीन भक्ति पंथ : कबीर, गुरु नानक और मीराबाई
- प्रश्न: कबीरदास जी (चौदहवीं-पंद्रहवीं शताब्दी) की बानी मुख्य रूप से किन तीन विशिष्ट परिपाटियों में संकलित है?
उत्तर: कबीर बीजक (वाराणसी), कबीर ग्रंथावली (राजस्थान) और आदि ग्रंथ साहिब (पंजाब)। - प्रश्न: कबीरदास जी की उन रहस्यवादी रचनाओं को क्या कहा जाता है जिनके रोजमर्रा के अर्थ को उलट दिया गया है?
उत्तर: उलटबाँसी (जैसे- “समंदरि लागि आगि”)। - प्रश्न: कबीर ने परम सत्य (ईश्वर) को वर्णित करने के लिए वेदांत दर्शन से प्रभावित होकर किन शब्दों का प्रयोग किया?
उत्तर: अलख (अदृश्य), निराकार, ब्रह्मन् और आत्मन्। - प्रश्न: कबीर की जीवनियों के अनुसार उनका पालन-पोषण किस शहर में और किस परिवार में हुआ था?
उत्तर: वाराणसी (UP) में, एक गरीब मुसलमान जुलाहे (बुनकर) परिवार में। - प्रश्न: वैष्णव परंपरा की जीवनियों के अनुसार कबीर को भक्ति का मार्ग दिखाने वाले गुरु कौन थे?
उत्तर: आचार्य रामानंद। - प्रश्न: बाबा गुरु नानक (1469-1539) का जन्म रावी नदी के पास किस गाँव में हुआ था जो वर्तमान पाकिस्तान में है?
उत्तर: ननकाना साहिब (तलवंडी)। - प्रश्न: बाबा गुरु नानक ने ईश्वर की किस भक्ति परंपरा का कड़ा प्रचार किया तथा बाहरी आडंबरों को नकारा?
उत्तर: निर्गुण भक्ति परंपरा का। - प्रश्न: बाबा गुरु नानक अपने विचारों को पंजाबी भाषा में किस माध्यम से गाते थे जिसमें उनका सेवक ‘मरदाना’ रबाब बजाता था?
उत्तर: शबद (Shabad) के माध्यम से। - प्रश्न: बाबा गुरु नानक ने अपने बाद किसे अपना उत्तराधिकारी चुनकर गुरुपद पर आसीन किया था?
उत्तर: अपने अनुयायी गुरु अंगद देव जी को। - प्रश्न: सिखों के पाँचवें गुरु अर्जन देव जी ने गुरु नानक और अन्य संतों की वाणी को 1604 में किस पवित्र ग्रंथ में संकलित किया?
उत्तर: आदि ग्रंथ साहिब (गुरबानी) में। - प्रश्न: सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने किस सैन्य/धार्मिक पंथ की स्थापना की तथा ‘पाँच प्रतीकों‘ का वर्णन किया?
उत्तर: खालसा पंथ (पवित्रों की सेना) की। - प्रश्न: भक्ति काल की सबसे सुप्रसिद्ध कवयित्री मीराबाई राजस्थान के किस जिले की राजपूत राजकुमारी थीं?
उत्तर: मारवाड़ के मेड़ता जिले की। - प्रश्न: मीराबाई ने सामाजिक बंधनों को तोड़कर विष्णु के किस अवतार को अपना एकमात्र पति स्वीकार किया था?
उत्तर: भगवान कृष्ण को (बाँसुरी बजाते रूप को) । - प्रश्न: कुछ मान्यताओं के अनुसार मीराबाई के गुरु कौन थे जो एक चर्मकार (निम्न जाति के) थे, जिससे उन्होंने जातिवादी समाज को चुनौती दी?
उत्तर: संत रैदास (रविदास)। - प्रश्न: पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में असम में वैष्णव धर्म के मुख्य प्रचारक कौन थे जिनके उपदेशों को ‘भगवती धर्म’ कहा जाता है?
उत्तर: महापुरुष शंकरदेव। - प्रश्न: शंकरदेव ने असम में आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार के लिए किन प्रार्थनागृहों और संस्थाओं की स्थापना को बढ़ावा दिया?
उत्तर: नामघर (प्रार्थनागृह) तथा सत्र या मठ की। - प्रश्न: महापुरुष शंकरदेव की असमिया भाषा में लिखी गई सबसे प्रमुख काव्य रचना कौन सी है?
उत्तर: कीर्तनघोष। - प्रश्न: सूफ़ियों की बातचीत के संकलन (Discourses) को क्या कहा जाता है, जिसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण ‘फवाइद-अल-फुआद’ है?
उत्तर: मुलफ़ुज़ात (Malfuzat)। - प्रश्न: सूफ़ी संतों द्वारा अपने अनुयायियों और सहयोगियों को लिखे गए पत्रों के संकलन को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: मक्तुबात (Maktubat)। - प्रश्न: भारत में लिखा गया पहला सूफ़ी ‘तज़किरा’ (संतों की जीवनी का स्मरण) कौन सा है जिसके लेखक मीर खुर्द किरमानी थे?
उत्तर: सियार-उल-औलिया (इसके अलावा अब्दुल हक देहलवी का ‘अख्बार-उल-अखयार’ भी प्रसिद्ध है)।