ग्रामीण विकास (Rural Development) क्या है? जानिए भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, नाबार्ड (NABARD), कृषि विपणन, स्वयं सहायता समूह (SHG), और जैविक कृषि का संपूर्ण सारांश।
परिचय (Introduction)
“भारत की वास्तविक प्रगति का तात्पर्य शहरी औद्योगिक केंद्रों के विकास से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से गाँवों के विकास से है।” राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना दशकों पहले था। आज भी भारत की लगभग दो-तिहाई (2/3) जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। ऐसे में यदि हम भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं, तो ग्रामीण भारत का सर्वांगीण विकास करना हमारी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
लेकिन वास्तव में ग्रामीण विकास (Rural Development) क्या है? यह केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक शब्द है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), साख व्यवस्था (NABARD), कृषि विपणन (e-NAM), और जैविक कृषि (Organic Farming) जैसे कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं को अपने भीतर समेटे हुए है।
1. ग्रामीण विकास: परिचय एवं महत्त्व
- मूल अवधारणा: ग्रामीण विकास का अर्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन पिछड़े घटकों का सर्वांगीण विकास करना है जो मुख्यधारा से पीछे छूट गए हैं।
- महात्मा गाँधी का दृष्टिकोण: भारत की वास्तविक प्रगति का तात्पर्य शहरी औद्योगिक केंद्रों के विकास से नहीं, बल्कि गाँवों के विकास से है।
- कृषि पर निर्भरता: आज भी भारत की दो-तिहाई (2/3) जनसंख्या कृषि पर आश्रित है और देश की एक-चौथाई (25%) जनता घोर निर्धनता में जी रही है।
- प्रमुख विकास क्षेत्र: मानव संसाधन का विकास (नारी साक्षरता, कौशल, जन-स्वास्थ्य व स्वच्छता), भूमि-सुधार, आधारिक संरचना का विकास (बिजली, सिंचाई, साख, विपणन, सड़कें) और निर्धनता निवारण।
- कृषि संवृद्धि दर में गिरावट: 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद सार्वजनिक निवेश में कमी के कारण 1991-2012 में कृषि की वृद्धि दर घटकर 3% रह गई और हाल के वर्ष (2023-24) में यह घटकर 2% से भी कम रह गई है。
2. ग्रामीण साख (Rural Credit) एवं बैंकिंग ढांचा
- साख की आवश्यकता: बीजारोपण से फसल पकने तक की लंबी अवधि के कारण किसानों को ऋण की आवश्यकता होती है।
- संस्थागत बदलाव: स्वतंत्रता के समय तक साहूकारों/महाजनों का वर्चस्व था। सरकार ने 1969 में सामाजिक बैंकिंग की शुरुआत की और 1982 में नाबार्ड (NABARD) की स्थापना की, जो ग्रामीण वित्त व्यवस्था की शीर्ष संस्था है।
- बहु-एजेंसी संस्थान: वर्तमान में ग्रामीण साख के लिए व्यावसायिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), सहकारी बैंक और भूमि विकास बैंक कार्यरत हैं।
- स्वयं सहायता समूह (SHGs): औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में ऋणाधार (Collateral) न होने की कमी को पूरा करने के लिए SHG का प्रादुर्भाव हुआ, जिसे अतिलघु साख कार्यक्रम भी कहा जाता है।
- कुटुंबश्री (केरल): 1995 में गरीब महिलाओं के लिए शुरू किया गया यह बचत बैंक सदस्य संख्या के आधार पर एशिया का विशालतम अनौपचारिक बैंक माना जाता है।
3. महत्त्वपूर्ण सरकारी योजनाएँ
- जनधन योजना: ग्रामीण क्षेत्रों में बचत की आदत और वित्तीय समावेशन के लिए सभी वयस्कों के बैंक खाते खोले गए। इसमें 1-2 लाख रुपये का आकस्मिक बीमा तथा 10,000 रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जाती है।
- मनरेगा (MNREGA): इसे वर्तमान में ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)‘ (वी.बी.जी.आर.ए.एम.जी.) के नाम से भी जाना जाता है।
- सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY): अक्टूबर 2014 में शुरू हुई। इसके तहत सांसदों को गाँवों को मॉडल विलेज के रूप में गोद लेकर विकसित करना होता है (मैदानी क्षेत्र आबादी: 3000-5000, पहाड़ी क्षेत्र: 1000-3000)।
- तनवा (TANWA) परियोजना: तमिलनाडु में ग्रामीण महिलाओं को नवीनतम कृषि तकनीकों और जैविक खेती का प्रशिक्षण देने के लिए शुरू की गई।
4. कृषि विपणन व्यवस्था (Agricultural Marketing)
- परिभाषा: इसके अंतर्गत देश भर में उत्पादित कृषि पदार्थों का संग्रह, भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकिंग, वर्गीकरण और वितरण शामिल है।
- समस्या: आज भी भंडारण सुविधाओं के अभाव में 10% से अधिक कृषि उत्पादन नष्ट हो जाता है।
- सरकारी सुधार के4उपाय:
- बाज़ारों का नियमन (Regulated Markets)।
- भौतिक बुनियादी ढांचा (सड़कें, भंडारगृह, शीतगृह)।
- सहकारी विपणन (जैसे गुजरात का दुग्ध सहकारी मॉडल)।
- नीतिगत साधन (न्यूनतम समर्थन कीमत – MSP, भारतीय खाद्य निगम – FCI द्वारा बफर स्टॉक और सार्वजनिक वितरण प्रणाली – PDS)।
- वैकल्पिक विपणन माध्यम: किसानों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ने के लिए ‘अपनी मंडी‘ (पंजाब, हरियाणा, राजस्थान), हाड़पसार मंडी (पुणे), रायथूबाज (आंध्र प्रदेश-तेलंगाना) और उझावरमंडी (तमिलनाडु) जैसे कृषक बाजार विकसित हुए हैं।
- e-NAM: केंद्र सरकार ने 2016 में इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (एक ऑनलाइन पोर्टल) लॉन्च किया।
5. उत्पादक गतिविधियों का विविधीकरण (Diversification)
केवल खेती पर निर्भर रहने के जोखिम को कम करने और आजीविका स्थिरता के लिए विविधीकरण आवश्यक है। इसके मुख्य क्षेत्र हैं:
- पशुपालन: भारत में मिश्रित कृषि-पशुधन व्यवस्था है। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए ‘ऑपरेशन फ्लड‘ चलाया गया, जिससे 1951-2021 के बीच दुग्ध उत्पादन 12 गुना बढ़ गया। (पशुधन वितरण 2012: मुर्गी पालन 61%, मवेशी-भैंस 22%, भेड़-बकरियां 16%)।
- मत्स्य पालन: भारत के कुल मत्स्य उत्पादन का 75% अंतर्वर्ती (Inland) क्षेत्रों से और 25% महासागरीय क्षेत्रों से आता है। यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 1.5% है। निर्यात व्यापार के 60% हिस्से पर महिलाओं का नियंत्रण है।
- बागवानी (उद्यान विज्ञान): यह समस्त कृषि उत्पाद का एक-तिहाई (1/3) और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% है। फल-सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT): खाद्य असुरक्षा वाले क्षेत्रों का पूर्वानुमान लगाने, मौसम, मृदा और कीमतों की जानकारी प्रसारित करने में महत्त्वपूर्ण उपकरण है।
6. धारणीय विकास और जैविक कृषि (Organic Farming)
- परिभाषा: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने वाली कृषि पद्धति को जैविक कृषि कहते हैं।
- लाभ: यह महँगे संकर बीजों और रसायनों के स्थान पर सस्ते स्थानीय जैविक आगतों पर निर्भर है। यह उत्पाद पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्यकर होते हैं, जिनकी वैश्विक बाजार में कीमत परंपरागत उत्पादों से 10% से 100% तक अधिक होती है।
- सफल उदाहरण: महाराष्ट्र में किशन मेहता (NGO ‘प्रकृति’) ने कपास की जैविक खेती का सफल प्रयोग किया जिसे जर्मनी की ‘एग्रेको’ संस्था ने मान्यता दी।
- सीमाएँ (चुनौतियाँ): शुरुआती वर्षों में रासायनिक खेती की तुलना में इसकी उत्पादकता कम रहती है, इसके उत्पाद शीघ्र खराब हो सकते हैं और बुनियादी विपणन नीतियों का अभाव है।
भाग 1: ग्रामीण विकास का परिचय एवं परिभाषा
- प्रश्न: “मिट्टी की जुताई करने वाले ही अधिकार के साथ जीते हैं, श्रृंखला के शेष लोग उनके आश्रय की रोटी खाते हैं” यह कथन किसका है?
उत्तर: प्रसिद्ध तमिल संत और कवि थिरुवलूवर का। - प्रश्न: किसने कहा था कि “भारत की वास्तविक प्रगति का तात्पर्य शहरी औद्योगिक केंद्रों के विकास से नहीं, बल्कि मुख्य रूप से गाँवों के विकास से है”?
उत्तर: महात्मा गाँधी ने। - प्रश्न: वर्तमान में भारत की कितनी जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर आश्रित है?
उत्तर: लगभग दो-तिहाई (2/3) जनसंख्या। - प्रश्न: पाठ्यपुस्तक के अनुसार भारत की कितनी आबादी आज भी घोर निर्धनता में जीवन बसर कर रही है?
उत्तर: देश की लगभग एक-चौथाई (25%) जनता। - प्रश्न: ग्रामीण विकास का मूल अर्थ क्या है?
उत्तर: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन पिछड़े घटकों का सर्वांगीण विकास करना, जो मुख्यधारा से पीछे छूट गए हैं। - प्रश्न: ग्रामीण विकास के अंतर्गत मानव संसाधन विकास के दो मुख्य स्तंभ कौन से हैं?
उत्तर: साक्षरता (विशेषकर नारी साक्षरता) तथा स्वास्थ्य व स्वच्छता। - प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का सबसे मुख्य साधन क्या है?
उत्तर: कृषि क्षेत्रक। - प्रश्न: ग्रामीण विकास के बुनियादी ढांचे (आधारिक संरचना) में कौन से तत्व शामिल हैं?
उत्तर: बिजली, सिंचाई, साख (ऋण), विपणन और परिवहन सुविधाएँ। - प्रश्न: वर्ष 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद (1991–2012) भारत में कृषि की संवृद्धि दर घटकर कितने प्रतिशत रह गई थी?
उत्तर: मात्र 3 प्रतिशत। - प्रश्न: वर्ष 2023-24 के दौरान भारत में कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन की सकल मूल्य वृद्धि (GVA) दर कितनी अनुमानित थी?
उत्तर: लगभग 2 प्रतिशत से भी कम। - प्रश्न: अर्थशास्त्रियों के अनुसार 1991 के बाद कृषि क्षेत्र में गिरावट का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश में आई भारी कमी।
भाग 2: ग्रामीण साख (Rural Credit) एवं संस्थागत ढांचा
- प्रश्न: किसानों को बीज, उर्वरक और औजार खरीदने के लिए किस अल्पकालिक साधन की आवश्यकता होती है?
उत्तर: कृषि साख (ऋण) की। - प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारतीय ग्रामीण साख बाजार पर किसका एकाधिकार या वर्चस्व था?
उत्तर: महाजनों, साहूकारों और निजी व्यापारियों का। - प्रश्न: भारत सरकार ने ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए ‘सामाजिक बैंकिंग’ (Social Banking) की शुरुआत कब की थी?
उत्तर: वर्ष 1969 में (बैंकों के राष्ट्रीयकरण के साथ)। - प्रश्न: ग्रामीण वित्त व्यवस्था के समन्वय के लिए भारत में शीर्ष संस्था (Apex Body) कौन सी है?
उत्तर: नाबार्ड (NABARD) – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक। - प्रश्न: नाबार्ड (NABARD) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
उत्तर: वर्ष 1982 में। - प्रश्न: ग्रामीण बैंक की संस्थागत संरचना (Multi-Agency System) में कौन-कौन से संस्थान शामिल हैं?
उत्तर: व्यावसायिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), सहकारी बैंक और भूमि विकास बैंक। - प्रश्न: भारत में ग्रामीण साख को उत्पादक ऋणों की ओर उन्मुख करने में किस क्रांति ने बड़ी भूमिका निभाई?
उत्तर: हरित क्रांति ने। - प्रश्न: औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में ऋणाधार (Collateral) की कमी के कारण ग्रामीण साख व्यवस्था में किसका प्रादुर्भाव हुआ?
उत्तर: स्वयं सहायता समूहों (SHG) का। - प्रश्न: स्वयं सहायता समूह (SHG) मुख्य रूप से किस सिद्धांत पर कार्य करते हैं?
उत्तर: सदस्यों के न्यूनतम अंशदान द्वारा छोटी-छोटी बचतों को बढ़ावा देना और जरूरतमंदों को आसान किश्तों पर ऋण देना। - प्रश्न: स्वयं सहायता समूहों द्वारा दी जाने वाली साख सुविधा को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
उत्तर: अतिलघु साख कार्यक्रम (Micro-Credit Programme)।
भाग 3: कुटुंबश्री और महिला सशक्तिकरण
- प्रश्न: ‘कुटुंबश्री’ (Kudumbashree) क्या है?
उत्तर: केरल में महिलाओं की ओर उन्मुख एक निर्धनता निवारण सामुदायिक कार्यक्रम व बचत बैंक। - प्रश्न: कुटुंबश्री बैंक की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
उत्तर: वर्ष 1995 में। - प्रश्न: वर्तमान में सदस्य संख्या और संगठित बचत के आधार पर एशिया का विशालतम अनौपचारिक बैंक किसे माना जाता है?
उत्तर: कुटुंबश्री बचत एवं साख सोसायटी को। - प्रश्न: मई 2019 तक भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की संख्या कितनी थी?
उत्तर: लगभग 54 लाख। - प्रश्न: मई 2019 के आंकड़ों के अनुसार भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों से कितनी महिलाएँ जुड़ी हुई थीं?
उत्तर: लगभग 6 करोड़ महिला सदस्य। - प्रश्न: SHG के महिला सदस्यों को स्वरोजगार के लिए सामुदायिक निवेश सहायता कोष (CISF) के तहत अतिरिक्त कितनी राशि उपलब्ध कराई जाती है?
उत्तर: 2.5 लाख रुपये प्रति SHG। - प्रश्न: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से किस वर्ग के सशक्तिकरण में मदद की है?
उत्तर: महिलाओं के सशक्तिकरण में।
भाग 4: ग्रामीण बैंकिंग और सरकारी योजनाएं
- प्रश्न: औपचारिक वित्तीय संस्थाओं में कृषि ऋणों के संदर्भ में वर्तमान में सबसे गंभीर समस्या क्या है?
उत्तर: ऋणों की वसूली न हो पाना (NPA/डिफॉल्ट की बढ़ती समस्या)। - प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और सभी वयस्कों के बैंक खाते खोलने के लिए कौन सी योजना शुरू की गई?
उत्तर: जनधन योजना। - प्रश्न: जनधन खाताधारकों को कितने रुपये का आकस्मिक बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है?
उत्तर: 1 से 2 लाख रुपये का। - प्रश्न: जनधन योजना के अंतर्गत खाताधारकों को कितने रुपये तक की ओवरड्राफ्ट (Overdraft) सुविधा मिलती है?
उत्तर: 10,000 रुपये की। - प्रश्न: NCERT पुस्तक के अनुसार, मनरेगा (MGNREGA) को वर्तमान में किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
उत्तर: ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)‘ (वी.बी.जी.आर.ए.एम.जी.)। - प्रश्न: जनधन योजना के तहत देश में अब तक कितने से अधिक लोगों ने बैंक खाते खुलवाए हैं?
उत्तर: 40 करोड़ से अधिक लोगों ने। - प्रश्न: जनधन खातों के माध्यम से बैंकों ने कुल कितने रुपये से अधिक के फंड का विचलन (Mobilize) किया है?
उत्तर: 1,40,000 करोड़ रुपये से अधिक। - प्रश्न: भारत सरकार द्वारा ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ (SAGY) की शुरुआत कब की गई थी?
उत्तर: अक्टूबर, 2014 में। - प्रश्न: सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के तहत मैदानी इलाकों में एक गाँव की आबादी का मानक क्या तय किया गया है?
उत्तर: 3,000 से 5,000 की आबादी। - प्रश्न: SAGY के तहत पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के लिए गाँव की आबादी का क्या मानक है?
उत्तर: 1,000 से 3,000 की आबादी। - प्रश्न: सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत शुरुआती चरण में वर्ष 2016 तक प्रत्येक सांसद को कितने मॉडल गाँव विकसित करने का लक्ष्य था?
उत्तर: 1 मॉडल गाँव। - प्रश्न: SAGY योजना के अंतर्गत वर्ष 2019 तक कुल कितने अतिरिक्त गाँव विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था?
उत्तर: 2 और गाँव (कुल 3 गाँव)। - प्रश्न: ‘तनवा’ (TANWA) परियोजना का पूर्ण रूप क्या है और यह किस राज्य से संबंधित है?
उत्तर: Tamil Nadu Women in Agriculture, यह तमिलनाडु राज्य से संबंधित है। - प्रश्न: तनवा (TANWA) परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: ग्रामीण महिलाओं को नवीनतम कृषि तकनीकों और जैविक खेती का प्रशिक्षण देना। - प्रश्न: तमिलनाडु के थिरूचिरापल्ली में महिलाओं द्वारा संचालित कौन सा समूह कृमिखाद (Vermi-compost) बनाकर आय कमा रहा है?
उत्तर: एंथोनीअम्मल द्वारा संचालित प्रशिक्षित महिला समूह।
भाग 5: कृषि विपणन व्यवस्था (Agricultural Marketing)
- प्रश्न: कृषि पदार्थों के संग्रह, भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन, पैकिंग, वर्गीकरण और वितरण की समूची प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
उत्तर: कृषि विपणन व्यवस्था। - प्रश्न: स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय किसानों को अपनी उपज बेचते समय किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
उत्तर: तोल में हेरा-फेरी, खातों में गड़बड़ी और बाजार भाव की जानकारी न होना। - प्रश्न: वर्तमान में भंडारण सुविधाओं के अभाव के कारण भारत में कितना कृषि उत्पादन प्रतिवर्ष क्षतिग्रस्त (खराब) हो जाता है?
उत्तर: 10 प्रतिशत से अधिक उत्पादन। - प्रश्न: केंद्र सरकार द्वारा देश की मंडियों को जोड़ने के लिए ऑनलाइन पोर्टल ‘इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार’ (e-NAM) कब लॉन्च किया गया?
उत्तर: वर्ष 2016 में। - प्रश्न: कृषि विपणन प्रणाली में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम क्या था?
उत्तर: व्यवस्थित एवं पारदर्शी व्यापार के लिए बाज़ारों का नियमन (Regulation of Markets) करना। - प्रश्न: भारत में वर्तमान में लगभग कितने ग्रामीण क्षेत्रों में अनियत मंडियों (Regulated Markets) को विकसित करने की आवश्यकता है?
उत्तर: लगभग 27,000 ग्रामीण क्षेत्रों में। - प्रश्न: देश के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य का कायाकल्प करने वाली दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का सफल मॉडल कहाँ से शुरू हुआ?
उत्तर: गुजरात (आनंद/अमुल मॉडल) से। - प्रश्न: भारत में सहकारिता आंदोलन (Cooperative Movement) की प्रमुख कमियाँ क्या रही हैं?
उत्तर: सभी कृषकों का शामिल न होना, विपणन व प्रसंस्करण समितियों में तालमेल की कमी और अकुशल वित्तीय प्रबंधन। - प्रश्न: किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार द्वारा घोषित नीतिगत साधन क्या कहलाता है?
उत्तर: न्यूनतम समर्थन कीमत (MSP)। - प्रश्न: भारत में खाद्यान्नों (विशेषकर गेहूँ और चावल) के सुरक्षित भंडार (Buffer Stock) के रख-रखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर: भारतीय खाद्य निगम (FCI) की। - प्रश्न: गरीबों को सहायिकी युक्त (Subsidised) कीमत पर खाद्यान्न और चीनी का वितरण किस प्रणाली के माध्यम से किया जाता है?
उत्तर: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS / राशन व्यवस्था) के माध्यम से। - प्रश्न: तमाम सरकारी प्रयासों के बाद भी वर्तमान में सकल कृषि उत्पादन के कितने प्रतिशत अंश का आदान-प्रदान ही सरकारी संस्थाएँ और सहकारिताएँ कर पाती हैं?
उत्तर: मात्र 10 प्रतिशत अंश का (शेष 90% निजी व्यापारियों के हाथ में है)। - प्रश्न: भारतीय संसद ने कृषि विपणन प्रणाली में सुधार के लिए तीन कानून किस वर्ष पारित किए थे, जिन्हें बाद में निरस्त कर दिया गया?
उत्तर: वर्ष 2020 में।
भाग 6: वैकल्पिक विपणन माध्यम
- प्रश्न: पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में किसानों द्वारा संचालित लोकप्रिय वैकल्पिक मंडी का नाम क्या है?
उत्तर: ‘अपनी मंडी‘। - प्रश्न: पुणे (महाराष्ट्र) की प्रसिद्ध फल-सब्जी वैकल्पिक मंडी का नाम क्या है?
उत्तर: हाड़पसार मंडी। - प्रश्न: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में संचालित किसानों की फल-सब्जी मंडियों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: रायथूबाज (Rythu Bazars)। - प्रश्न: तमिलनाडु में कृषकों के कल्याण के लिए चलाए जा रहे कृषक बाजारों का नाम क्या है?
उत्तर: उझावरमंडी (Uzhavar Shandies)। - प्रश्न: जब बहुराष्ट्रीय या फास्ट फूड कंपनियाँ किसानों को उन्नत बीज देकर पूर्व-निर्धारित कीमतों पर फसल खरीदने का अनुबंध करती हैं, तो इसे क्या कहते हैं?
उत्तर: अनुबंध कृषि (Contract Farming)।
भाग 7: उत्पादक गतिविधियों का विविधीकरण (Diversification)
- प्रश्न: कृषि विविधीकरण (Diversification) के दो प्रमुख पहलू कौन से हैं?
उत्तर: (1) फसलों के उत्पादन प्रणाली में परिवर्तन, (2) श्रम शक्ति को खेती से हटाकर संबद्ध कार्यों व गैर-कृषि क्षेत्रों में लगाना। - प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में केवल खेती पर निर्भर रहने में क्या सबसे बड़ा जोखिम है?
उत्तर: मौसम की अनिश्चितता और आजीविका के स्थायित्व का अभाव। - प्रश्न: भारत में अधिकांश कृषि रोजगार किस फसल के मौसम से जुड़ा रहता है?
उत्तर: खरीफ की फसल से। - प्रश्न: सिंचाई सुविधाओं के अभाव वाले क्षेत्रों में किस फसल के मौसम में रोजगार अत्यंत दुर्लभ हो जाता है?
उत्तर: रबी की फसल के मौसम में। - प्रश्न: गैर-कृषि अर्थतंत्र के अंतर्गत आने वाले दो गतिशील उपघटक कौन से हैं, जिनमें संवृद्धि की अच्छी संभावनाएँ हैं?
उत्तर: कृषि-प्रसंस्करण उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग। - प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों के उन परंपरागत गृह उद्योगों के नाम बताइए जो बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण निम्न उत्पादकता वाले हैं?
उत्तर: मिट्टी के बर्तन बनाना, हस्तशिल्प कलाएँ और हथकरघा उद्योग। - प्रश्न: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के बदलते स्वरूप के तहत पुरुष आमतौर पर किस ओर अग्रसर हैं?
उत्तर: गैर-कृषि रोजगार की तलाश में।
भाग 8: पशुपालन (Animal Husbandry) एवं श्वेत क्रांति
- प्रश्न: भारतीय किसान समुदाय सामान्यतः आजीविका स्थिरता के लिए किस प्रकार की कृषि व्यवस्था अपनाता है?
उत्तर: मिश्रित कृषि-पशुधन व्यवस्था (Mixed Crop-Livestock System)। - प्रश्न: भारत में पशुपालन क्षेत्रक वर्तमान में लगभग कितने छोटे/सीमांत किसानों और भूमिहीन श्रमिकों को आजीविका प्रदान कर रहा है?
उत्तर: लगभग 7 करोड़ किसानों को। - प्रश्न: वर्ष 2012 के पशुधन वितरण आंकड़ों के अनुसार भारत में सर्वाधिक (61%) हिस्सा किस जीव का था?
उत्तर: मुर्गी पालन (Poultry) का। - प्रश्न: वर्ष 2012 के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल पशुधन में मवेशी और भैंसों का प्रतिशत कितना था?
उत्तर: 22 प्रतिशत। - प्रश्न: वर्ष 2012 के अनुसार पशुधन वितरण में भेड़ और बकरियों का हिस्सा कितने प्रतिशत था?
उत्तर: 16 प्रतिशत। - प्रश्न: वर्ष 2019 की गणना के अनुसार भारत में कुल कितने मिलियन मवेशी (Cattle) थे?
उत्तर: 303 मिलियन। - प्रश्न: वर्ष 2019 के मवेशी आंकड़ों में भैंसों (Buffaloes) की संख्या कितनी थी?
उत्तर: 110 मिलियन। - प्रश्न: वर्ष 1951 से 2021 के बीच भारत में दुग्ध उत्पादन में कुल कितने गुना वृद्धि दर्ज की गई?
उत्तर: लगभग बारह (12) गुना। - प्रश्न: भारत में डेयरी उद्योग की इस अभूतपूर्व प्रगति और दुग्ध क्रांति को क्या नाम दिया गया?
उत्तर: ‘ऑपरेशन फ्लड‘ (Operation Flood)। - प्रश्न: भारत के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्य कौन से हैं?
उत्तर: गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान। - प्रश्न: पशुपालन क्षेत्र में विविधीकरण की दृष्टि से कौन से उत्पाद महत्त्वपूर्ण सह-उत्पाद सिद्ध हो रहे हैं?
उत्तर: मांस, अंडे तथा ऊन।
भाग 9: मत्स्य पालन (Fisheries) और उद्यान विज्ञान (Horticulture)
- प्रश्न: भारत के कुल मत्स्य उत्पादन का कितना प्रतिशत भाग अंतर्वर्ती (Inland/आंतरिक) जल स्रोतों से प्राप्त होता है?
उत्तर: 75 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत के कुल मत्स्य उत्पादन का कितना प्रतिशत हिस्सा महासागरीय (Marine/समुद्री) क्षेत्रों से आता है?
उत्तर: 25 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत का मत्स्य उत्पादन देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग कितना प्रतिशत है?
उत्तर: लगभग 1.5 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत के प्रमुख मत्स्य उत्पादक राज्यों के नाम बताइए?
उत्तर: पश्चिम बंगाल, केरल, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु। - प्रश्न: यद्यपि महिलाएँ सीधे मछलियाँ पकड़ने नहीं जातीं, फिर भी भारत के कितने प्रतिशत आंतरिक मत्स्य व्यापार का संचालन महिलाओं के हाथ में है?
उत्तर: 40 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत के कुल मत्स्य निर्यात (Export) व्यापार का कितना प्रतिशत संचालन महिलाओं द्वारा किया जाता है?
उत्तर: 60 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत में बागवानी (उद्यान विज्ञान) क्षेत्रक समस्त कृषि उत्पाद का लगभग कितना भाग है?
उत्तर: लगभग एक-तिहाई (1/3)। - प्रश्न: बागवानी क्षेत्रक का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कितना प्रतिशत योगदान है?
उत्तर: 6 प्रतिशत। - प्रश्न: भारत किन बागवानी फसलों के उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश माना जाता है?
उत्तर: आम, केला, नारियल, काजू और विभिन्न मसाले। - प्रश्न: फल और सब्जियों के कुल उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
उत्तर: दूसरा स्थान (2nd)। - प्रश्न: ग्रामीण महिलाओं के लिए बागवानी के अंतर्गत कौन से नए उच्च आय वाले रोजगार उभर कर सामने आए हैं?
उत्तर: पुष्परोपण, पौधशाला (Nursery) की देखभाल, संकर बीजों का उत्पादन और ऊतक संवर्धन (Tissue Culture)।
भाग 10: सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैविक कृषि (Organic Farming)
- प्रश्न: 21वीं सदी में खाद्य सुरक्षा और धारणीय विकास में कौन सी तकनीक निर्णायक भूमिका निभा सकती है?
उत्तर: सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology – IT)। - प्रश्न: सरकार किस तकनीक का उपयोग करके खाद्य असुरक्षा वाले क्षेत्रों का समय रहते पूर्वानुमान लगा सकती है?
उत्तर: सूचनाओं और उपयुक्त सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके। - प्रश्न: रासायनिक उर्वरकों और विषैले कीटनाशकों के स्थान पर पूर्णतः पर्यावरणीय संतुलन को बहाल करने वाली कृषि पद्धति क्या कहलाती है?
उत्तर: जैविक कृषि (Organic Farming)। - प्रश्न: विश्व बाज़ारों में जैविक खाद्य पदार्थों की कीमतें परंपरागत (रासायनिक) खाद्य पदार्थों की तुलना में कितनी अधिक होती हैं?
उत्तर: 10% से लेकर 100% तक अधिक। - प्रश्न: वर्ष 1995 में महाराष्ट्र में कपास की खेती को जैविक विधि से कराने का सफल प्रयास किस गैर-सरकारी संगठन (NGO) ने किया?
उत्तर: ‘प्रकृति‘ नामक संगठन के किशन मेहता ने। - प्रश्न: महाराष्ट्र के किसानों द्वारा उत्पादित जैविक कपास को किस अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने उच्च कोटि का प्रमाणित किया?
उत्तर: जर्मनी की ‘एग्रेको‘ (Agreco) संस्था ने। - प्रश्न: किशन मेहता के अनुसार भारत के कितने प्रतिशत किसान सीमांत किसान हैं, जिनके पास 0.8 हेक्टेयर से कम भूमि है?
उत्तर: 78 प्रतिशत किसान। - प्रश्न: भारत के इन 78% सीमांत किसानों के पास देश के कुल कृषि क्षेत्र का कितना प्रतिशत हिस्सा है?
उत्तर: मात्र 20 प्रतिशत हिस्सा। - प्रश्न: जैविक कृषि का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
उत्तर: यह महँगे संकर बीजों और रसायनों के स्थान पर सस्ते स्थानीय जैविक आगतों पर निर्भर करती है, जिससे निवेश पर प्रतिफल अधिक मिलता है। - प्रश्न: प्रारंभिक वर्षों में जैविक कृषि अपनाने वाले किसानों के सामने सबसे प्रमुख सीमा या समस्या क्या आती है?
उत्तर: प्रारंभिक वर्षों में जैविक कृषि की उत्पादकता रासायनिक कृषि से कम रहती है और ये उत्पाद जल्दी खराब हो सकते हैं।
ग्रामीण विकास (Rural Development) – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. ग्रामीण विकास (Rural Development) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: ग्रामीण विकास एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उन पिछड़े क्षेत्रों (जैसे- शिक्षा, स्वास्थ्य, साख, विपणन और बुनियादी ढांचा) के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जो मुख्यधारा से पीछे छूट गए हैं।
Q2. ग्रामीण वित्त (Rural Finance) की शीर्ष संस्था कौन सी है और इसकी स्थापना कब हुई?
उत्तर: संपूर्ण ग्रामीण वित्त व्यवस्था के समन्वय के लिए भारत में शीर्ष संस्था नाबार्ड (NABARD – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) है। इसकी स्थापना वर्ष 1982 में की गई थी।
Q3. कृषि विपणन (Agricultural Marketing) का क्या अर्थ है?
उत्तर: कृषि विपणन वह समूची प्रक्रिया है जिसके द्वारा देश भर में उत्पादित कृषि पदार्थों का संग्रह (Aggregation), भंडारण (Storage), प्रसंस्करण (Processing), परिवहन, पैकिंग, वर्गीकरण (Grading) और वितरण (Distribution) सुनिश्चित किया जाता है।
Q4. इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) पोर्टल कब शुरू किया गया था?
उत्तर: केंद्र सरकार द्वारा देश की विभिन्न मंडियों और विनियमित बाजारों को ऑनलाइन जोड़ने के लिए अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल e-NAM को वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया था।
Q5. जैविक कृषि (Organic Farming) क्या है और इसके क्या लाभ हैं?
उत्तर: जैविक कृषि वह पर्यावरणीय-मित्र खेती पद्धति है जो रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर स्थानीय जैविक आगतों (जैसे खाद) के प्रयोग पर निर्भर करती है। यह पर्यावरण का संरक्षण करने के साथ-साथ अधिक पोषक तत्वों से युक्त स्वास्थ्यकर भोजन प्रदान करती है।
