उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 के अंतर्गत ग्राम पंचायत ग्रामीण स्वशासन की प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। ग्राम पंचायत की संरचना, कार्यकालावधि और सदस्यों व प्रधान की योग्यताओं/अयोग्यताओं (निर्रहताओं) का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
1. ग्राम पंचायत की संरचना (Structure of Gram Panchayat)
अधिनियम की धारा 12 के अनुसार, प्रत्येक पंचायत क्षेत्र के लिए एक ग्राम पंचायत स्थापित की जाती है। इसकी संरचना इस प्रकार है:
- प्रधान: ग्राम पंचायत का एक अध्यक्ष होता है, जिसे ‘प्रधान’ कहा जाता है। इसका चुनाव ग्राम सभा के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष मतदान (Direct Election) के माध्यम से किया जाता है।
- सदस्य: ग्राम पंचायत में सदस्यों की संख्या उस ग्राम पंचायत की जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होती है:
- 1000 तक की जनसंख्या पर — 9 सदस्य
- 1000 से 2000 तक की जनसंख्या पर — 11 सदस्य
- 2000 से 3000 तक की जनसंख्या पर — 13 सदस्य
- 3000 से अधिक की जनसंख्या पर — 15 सदस्य
- आरक्षण: अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और पिछड़ी जातियों (OBC) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आरक्षित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (1/3) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होता है।
2. पदविधि या कार्यकाल (Tenure)
अधिनियम की धारा 12(3) के अनुसार:
- ग्राम पंचायत का कार्यकाल उसकी प्रथम बैठक की तिथि से 5 वर्ष का होता है।
- यदि ग्राम पंचायत 5 वर्ष की अवधि से पूर्व भंग कर दी जाती है, तो भंग होने की तिथि से 6 माह के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
- पुनर्गठित ग्राम पंचायत केवल शेष बचे हुए समय के लिए ही कार्य करेगी।
3. सदस्यों और प्रधान की निर्रहताएं (Disqualifications)
अधिनियम की धारा 5-A के अंतर्गत ग्राम पंचायत के सदस्य या प्रधान पद के लिए कुछ अयोग्यताएं (निर्रहताएं) निर्धारित की गई हैं। कोई व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता या पद पर नहीं रह सकता यदि:
- आयु सीमा: उसने 21 वर्ष की आयु पूरी न की हो।
- अपराधिक रिकॉर्ड: यदि उसे किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो जिसमें नैतिक पतन (Moral Turpitude) शामिल हो और उसे कारावास की सजा मिली हो (सजा समाप्ति के 5 वर्ष बाद वह पुनः पात्र हो सकता है)।
- सरकारी सेवा से निष्कासन: यदि उसे भ्रष्टाचार या निष्ठाहीनता के कारण केंद्र, राज्य या किसी स्थानीय प्राधिकारी की सेवा से बर्खास्त किया गया हो।
- लाभ का पद: यदि वह केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद (Office of Profit) पर कार्यरत हो।
- बकायादार: यदि उस पर ग्राम पंचायत, जिला पंचायत या किसी सहकारी समिति का कोई कर या शुल्क बकाया हो।
- दिवालिया या विकृत चित्त: यदि वह न्यायालय द्वारा दिवालिया घोषित कर दिया गया हो या वह मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) हो।
- अतिक्रमणकारी: यदि उसने ग्राम पंचायत की किसी भूमि या संपत्ति पर अवैध कब्जा कर रखा हो।
- दो से अधिक बच्चे: उत्तर प्रदेश में कुछ विशेष नियमों के तहत (निर्धारित तिथि के बाद) दो से अधिक संतान होने पर भी चुनाव लड़ने पर रोक के प्रावधान समय-समय पर चर्चा और संशोधनों का विषय रहे हैं।
निष्कर्ष
ग्राम पंचायत की संरचना लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित है जहाँ समाज के हर वर्ग (विशेषकर वंचित वर्ग और महिलाओं) की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। निर्रहताओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय शासन की बागडोर स्वच्छ छवि और उत्तरदायी व्यक्तियों के हाथों में रहे।