उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 के अंतर्गत ‘प्रतिकर का संदाय‘ (Payment of Compensation) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। चकबंदी का मुख्य उद्देश्य खेतों का पुनर्गठन करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में जब किसी किसान की भूमि, संपत्ति या वृक्षों का नुकसान होता है, तो उसकी क्षतिपूर्ति के लिए ‘प्रतिकर’ (मुआवजा) देने का प्रावधान किया गया है।
प्रतिकर के संदाय का आधार (Grounds for Compensation)
चकबंदी के दौरान प्रतिकर मुख्य रूप से निम्नलिखित परिस्थितियों में दिया जाता है:
- भूमि के मूल्य में अंतर: यदि किसी किसान को उसके पुराने खेतों की तुलना में कम मूल्य वाली या छोटी भूमि आवंटित की जाती है, तो मूल्य के इस अंतर की भरपाई नकद प्रतिकर के रूप में की जाती है।
- वृक्षों, कुओं और सुधारों का मूल्य: यदि किसी किसान के पुराने चक पर कोई कुआँ, नलकूप, स्थायी ढांचा या फलदार वृक्ष थे और नया चक आवंटित होने पर वे किसी अन्य व्यक्ति के पास चले जाते हैं, तो उस संपत्ति का मूल्यांकन कर पुराने स्वामी को प्रतिकर दिया जाता है।
- सार्वजनिक प्रयोजन के लिए भूमि: यदि किसी किसान की भूमि का एक हिस्सा सार्वजनिक उपयोग (जैसे रास्ता, नाली, स्कूल) के लिए काटा जाता है, तो उसके बदले में उसे या तो अन्यत्र भूमि दी जाती है या उचित मुआवजा दिया जाता है।
मूल्यांकन की प्रक्रिया (Process of Valuation)
प्रतिकर का निर्धारण करने के लिए सहायक चकबंदी अधिकारी (A.C.O.) द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
- निर्धारण: चकबंदी समिति के परामर्श से वृक्षों, कुओं और अन्य सुधारों का बाजार मूल्य निर्धारित किया जाता है।
- आकार पत्र (Forms): भू-संपत्ति के विवरण और प्रस्तावित प्रतिकर का उल्लेख प्रासंगिक आकारों (जैसे आकार पत्र 5) में किया जाता है।
- आपत्तियां: यदि कोई किसान निर्धारित प्रतिकर की राशि से संतुष्ट नहीं है, तो वह धारा 9 के तहत अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। चकबंदी अधिकारी (C.O.) इन आपत्तियों की सुनवाई कर अंतिम निर्णय लेता है।
प्रतिकर का भुगतान (Payment Procedure)
अधिनियम की धारा 29 के अनुसार प्रतिकर के भुगतान की व्यवस्था इस प्रकार है:
- अदायगी का उत्तरदायित्व: प्रतिकर की राशि उस व्यक्ति या खातेदार द्वारा दी जाती है जिसे वह संपत्ति (वृक्ष, कुआँ आदि) नए चक के रूप में प्राप्त हुई है।
- निर्धारित समय: कब्जा प्राप्त करने के एक निश्चित समय के भीतर यह राशि जमा करनी होती है।
- वसूली: यदि संबंधित पक्ष प्रतिकर देने में विफल रहता है, तो उस राशि को ‘भू-राजस्व की बकाया‘ (Arrears of Land Revenue) के रूप में वसूल किया जाता है और हकदार व्यक्ति को भुगतान किया जाता है।
प्रतिकर का महत्व
- समानता और न्याय: यह सुनिश्चित करता है कि चकबंदी के कारण किसी भी किसान को आर्थिक हानि न हो।
- विवादों में कमी: उचित मूल्यांकन और समय पर भुगतान से किसानों के बीच आपसी रंजिश कम होती है।
- संपत्ति का संरक्षण: चूंकि किसान को पता होता है कि उसके द्वारा किए गए सुधारों (जैसे कुआँ खोदना) का मूल्य उसे मिल जाएगा, इसलिए वह चकबंदी के डर से अपनी भूमि की गुणवत्ता कम नहीं करता।
निष्कर्ष प्रतिकर का संदाय चकबंदी प्रक्रिया का वह हिस्सा है जो इसे केवल एक प्रशासनिक कार्य न बनाकर एक ‘न्यायपूर्ण सुधार’ बनाता है। यह व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि बड़े लक्ष्य (कृषि सुधार) की प्राप्ति में किसी व्यक्ति विशेष का अनुचित नुकसान न हो।