उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 की धारा 4(2) के अंतर्गत राज्य सरकार को यह शक्ति प्राप्त है कि वह किसी क्षेत्र (जिला या उसका भाग) में चकबंदी संचालन शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी करे। इसी अधिनियम की धारा 6 अधिसूचना के निरस्तीकरण (Cancellation) का प्रावधान करती है, जिसका सीधा अर्थ चकबंदी की चल रही प्रक्रिया को बीच में ही रोक देना या समाप्त कर देना है।
अधिसूचना के निरस्तीकरण से आशय
जब राज्य सरकार धारा 4 के अधीन जारी की गई अधिसूचना को धारा 6 के तहत वापस ले लेती है, तो उसे ‘अधिसूचना का निरस्तीकरण’ कहा जाता है। इसका अर्थ है कि जिस विशिष्ट इकाई (गांव या क्षेत्र) के लिए चकबंदी प्रक्रिया शुरू की गई थी, वहां अब आगे की कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी और वह क्षेत्र चकबंदी संक्रियाओं (Operations) के दायरे से बाहर हो जाएगा।
अधिसूचना के निरस्तीकरण के आधार (Grounds)
अधिनियम में स्पष्ट रूप से विशिष्ट आधारों की सूची नहीं दी गई है, लेकिन न्यायिक निर्णयों और प्रशासनिक परंपराओं के अनुसार निम्नलिखित प्रमुख आधार हो सकते हैं:
- सार्वजनिक हित (Public Interest): यदि सरकार को लगता है कि उस क्षेत्र में चकबंदी जारी रखना जनहित में नहीं है।
- तकनीकी या प्रशासनिक कठिनाइयां: यदि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि वहां चकबंदी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
- कानूनी विवाद: यदि क्षेत्र में अत्यधिक गंभीर भूमि विवाद हों जो चकबंदी प्रक्रिया को बाधित कर रहे हों।
- सरकार का विवेक: धारा 6 राज्य सरकार को किसी भी समय अधिसूचना रद्द करने का पूर्ण अधिकार देती है, बशर्ते वह सकारण हो।
अधिसूचना के निरस्तीकरण के प्रभाव (Effects)
धारा 6(2) के अनुसार, अधिसूचना रद्द होने के निम्नलिखित कानूनी प्रभाव होते हैं:
- चकबंदी संक्रियाओं की समाप्ति: अधिसूचना रद्द होने की तिथि से वह क्षेत्र चकबंदी के अधीन नहीं रह जाता।
- अधिव्यापन (Abatement) का अंत: धारा 5 के तहत जो दीवानी मुकदमे (Suits) चकबंदी शुरू होने पर स्थगित या ‘अबेट’ हो गए थे, वे पुनः जीवित हो जाते हैं और संबंधित न्यायालयों में उनकी सुनवाई फिर से शुरू हो सकती है।
- अंतिम आदेशों का संरक्षण: निरस्तीकरण से पूर्व यदि भूमि अभिलेखों के सुधार (Correction of Records) के संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित हो चुका है, तो वह प्रभावी बना रहेगा और उस पर निरस्तीकरण का असर नहीं होगा।
- अभिलेखों की यथास्थिति: अन्य मामलों में भूमि अभिलेख वही माने जाएंगे जो चकबंदी शुरू होने से पहले थे, सिवाय उन बदलावों के जो अंतिम आदेशों द्वारा किए जा चुके हैं।
- अधिकारियों की शक्तियों की समाप्ति: चकबंदी अधिकारियों (जैसे चकबंदी लेखपाल, ACO, CO) की उस क्षेत्र विशेष के लिए शक्तियां समाप्त हो जाती हैं।
निष्कर्षतः, धारा 4(2) की अधिसूचना का निरस्तीकरण चकबंदी प्रक्रिया को ‘रीसेट’ करने जैसा है, जहाँ केवल वे ही निर्णय सुरक्षित रहते हैं जो कानूनी रूप से अंतिम रूप ले चुके होते हैं।