चकबंदी (Consolidation of Holdings) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी गाँव के किसानों के बिखरे हुए छोटे-छोटे खेतों को उनकी उर्वरता और मूल्य के आधार पर व्यवस्थित करके एक या दो बड़े चकों (खेतों) में बदल दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि को सुगम बनाना, उत्पादन बढ़ाना और भूमि विवादों को कम करना है। उत्तर प्रदेश में इसके लिए उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 प्रभावी है।
चकबंदी योजना में अपवर्जित जोतें (Land Excluded from Consolidation)
उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा 13-A और अन्य प्रावधानों के तहत कुछ विशिष्ट प्रकार की भूमियों या जोतों को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर (अपवर्जित) रखा गया है। इसका अर्थ है कि इन जमीनों का न तो पुनर्गठन किया जाता है और न ही इन्हें किसी अन्य किसान को आवंटित किया जा सकता है।
अपवर्जित जोतों की मुख्य श्रेणियां निम्नलिखित हैं:
- उपयोग में आने वाली आबादी की भूमि: ऐसी भूमि जिस पर मकान बने हों या जो ग्रामीण आबादी का हिस्सा हो, उसे चकबंदी से बाहर रखा जाता है ताकि लोगों के आवास प्रभावित न हों।
- बाग और फलदार वृक्ष: स्थायी प्रकृति के बाग (जैसे आम, अमरूद के बगीचे) चकबंदी में शामिल नहीं किए जाते, क्योंकि उनके मूल्यांकन और स्थानांतरण में जटिलता होती है।
- कब्रिस्तान और श्मशान: धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता के कारण कब्रिस्तान, श्मशान घाट या अन्य समाधि स्थलों को अपवर्जित रखा जाता है।
- ऊसर, बंजर और जलमग्न भूमि: ऐसी भूमि जो खेती के योग्य नहीं है, जैसे जलमग्न क्षेत्र (झील, तालाब), गहरी खाइयां या ऊसर भूमि, उन्हें चकबंदी के मुख्य आवंटन से बाहर रखा जाता है।
- विशेष प्रकृति की कृषि: जहाँ औषधीय पौधे, नर्सरी या विशेष प्रकार की शोध खेती हो रही हो, उसे भी छूट दी जा सकती है।
- सार्वजनिक उपयोग की भूमि: चारागाह (Pasture land), खाद के गड्ढे, खलिहान और सार्वजनिक रास्ते जिन्हें गाँव के सामूहिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया हो।
- औद्योगिक या व्यावसायिक भूमि: वह भूमि जिसका उपयोग कृषि के बजाय ईंट-भट्ठे, कारखाने या किसी अन्य व्यावसायिक उद्देश्य के लिए हो रहा हो।
- मंदिर, मस्जिद या धार्मिक स्थल: किसी भी प्रकार के धार्मिक ढांचे वाली भूमि को उसके मूल स्थान पर ही रहने दिया जाता है।
अपवर्जन का कारण और महत्व
इन भूमियों को अपवर्जित करने के पीछे मुख्य तर्क यह है कि इनका स्वरूप ऐसा होता है कि इन्हें ‘विनिमय अनुपात’ (Exchange Ratio) के आधार पर दूसरे किसान को नहीं दिया जा सकता। उदाहरण के लिए, यदि किसी किसान का पुश्तैनी बाग या मकान किसी अन्य को दे दिया जाए, तो इससे सामाजिक संघर्ष और आर्थिक हानि होगी।
निष्कर्षतः, चकबंदी का लक्ष्य केवल कृषि भूमि का समेकन करना है। ऐसी भूमि जो कृषि के लिए अनुपयुक्त है या जिसका सामाजिक-धार्मिक महत्व है, उसे ‘सेक्टर‘ से बाहर रखकर मूल खातेदार के पास ही रहने दिया जाता है।