Skip to content

Padho Jano

One Step Towards Education

Menu
  • HOME
  • India
    • Uttar Pradesh
      • Raebareli
      • Unnao
  • LAW (कानून)
    • Administrative Law (प्रशासनिक विधि)
    • Alternative Dispute Resolution (वैकल्पिक विवाद समाधान) ADR
    • Land Law (भूमि विधि)
    • Professional Ethics & Court Craft
    • Legal Research Methods (विधिक अनुसन्धान पद्धति)
    • Media Law
  • SUBJECTS
    • Computer
      • Python – पायथन
    • Constitution
      • प्रस्तावना
    • Environment
    • English
      • Dictionary
        • अनाज और उनसे बने उत्पाद
    • PSYCHOLOGY
  • General Knowledge
  • Quizzes
  • NCERT
    • CLASS – 5
      • SST
  • DOWNLOADS
Menu

Author: KRANTI KISHORE

BA, (PSYCHOLOGY, HINDI, ECONOMICS, POLITICAL SCIENCE) LLB, M.A.(ECONOMICS),

माध्यस्थम करार क्या है? माध्यस्थम करार के आवश्यक तत्व

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

माध्यस्थम करार (Contract of Indemnity/Guarantee? — यहाँ “माध्यस्थम” शब्द का सामान्यतः अर्थ mediation या agency/ intermediary होता है) — प्रमाणित संदर्भ के अनुसार यदि प्रश्न का आशय “माध्यस्थम करार” से मध्यस्थता करार (Contract of Mediation/Arbitration?) है तो इसे मध्यस्थता समझा जा सकता है। परन्तु भारत में विधि-विषयक दृष्टि से अक्सर “माध्यस्थम” से आशय “मध्यस्थ” (agent/…

Read more

माध्यस्थम (मेडिएशन) की परिभाषा एवं माध्यस्थम तथा सुलह अधिनियम, 1996 की विशेषताएँ 

Posted on November 25, 2025November 26, 2025 by KRANTI KISHORE

माध्यस्थम (Mediation) वैकल्पिक विवाद निवारण (ADR) की वह प्रक्रिया है जिसमें निष्पक्ष तटस्थ तृतीय पक्ष — माध्यस्थ/मेडिएटर — विवादित पक्षों के बीच संचार व समझौता कराने के लिए मध्यस्थता करता है। इसका उद्देश्य पक्षों को पारस्परिक समझ और स्वेच्छिक समझौते के माध्यम से विवाद का समाधान दिलाना है, बिना न्यायालयीन मुकदमेबाजी के।  माध्यस्थम की परिभाषा…

Read more

माध्यस्थम तथा सुलह अधिनियम, 1996 — मुख्य उद्देश्य 

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय माध्यस्थम तथा सुलह अधिनियम, 1996 (The Arbitration and Conciliation Act, 1996) भारत में वैकल्पिक विवाद निपटान (Alternative Dispute Resolution — ADR) को व्यवस्थित करने हेतु पारित प्रमुख कानून है। यह अधिनियम 1996 में लागू हुआ और इसका उद्देश्य मध्यस्थता (arbitration) तथा सुलह/समझौता (conciliation) की प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना…

Read more

वैकल्पिक विवाद निश्चय प्रणाली (Alternative Dispute Resolution — ADR) का क्या अर्थ है?

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

        विवादों का समाधान न्यायालय के बाहर निपटाने की प्रक्रियाओं के समुच्चय को वैकल्पिक विवाद निश्चय प्रणाली (ADR) कहते हैं। यह शब्द एक समग्र संज्ञा है जो मध्यस्थता (mediation), सुलह (conciliation), समझौता बैठकें (negotiation), पंचाट (lok adalat), निर्णायक मध्यस्थता (arbitration) तथा अन्य वैकल्पिक तरीकों को शामिल करता है। ADR का उद्देश्य समय,…

Read more

नामान्तरण क्या है? नामान्तरण का साक्ष्यिक मूल्य, नामान्तरण की प्रक्रिया और परिणाम

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय नामांतरण का तात्पर्य होता है वार्षिक रजिस्टर के अंदर जोरदार के नाम में परिवर्तन होना दूसरे अर्थ में एक व्यक्ति के नाम को खारिज करके दूसरे व्यक्ति का नाम उसी जगह पर डाल दिया जाना दाखिल खारिज की प्रक्रिया को तभी अपनाया जाता है जब जमीन के कब्जे में परिवर्तन होता है। नामान्तरण (नामांतरण/नामांतरण…

Read more

अपील क्या है? अपील के आधार कौन-कौन से हैं और राजस्व मामलों में यह पुनरीक्षण से कैसे भिन्न है? 

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय “अपील” और “पुनरीक्षण” (revision) किसी भी विधिक प्रणाली में न्यायिक निर्णयों पर नियंत्रण और उसके सुधार के उपाय आवश्यक होते हैं। 1. अपील (Appeal) — परिभाषा और स्वरूप – परिभाषा: अपील वह न्यायिक उपाय है जिसके द्वारा कोई पक्ष निचली अदालत या अधिकरण के निर्णय, आदेश या निष्कर्ष को उच्च न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती…

Read more

सीमा चिन्ह क्या है? सीमा सम्बन्धी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

    सीमा (boundary) किसी संपत्ति के स्वामित्व या अधिकार की भौगोलिक सीमाओं को दर्शाती है। भूमि, भवन या किसी अन्य अचल संपत्ति के मामले में सीमा चिन्ह (boundary marker/land mark) वह स्थायी या अस्थायी चिन्ह होते हैं जो दो या अधिक संपत्तियों के बीच के विभाजन को सूचित करते हैं। भारतीय संदर्भ में सीमा चिन्ह का…

Read more

राजस्व न्यायालय और राजस्व अधिकारी

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

प्रस्तावना राजस्व व्यवस्था भारतीय आपराधिक/नागरिक प्रक्रियाओं से अलग एक स्वायत्त प्रशासनिक-न्यायिक तंत्र है जिसका विषय भूमि, भूमि का कर (पट्टा, जगह रकबा कर), बकाया राजस्व व जमीन से संबंधित हित-संबंध होते हैं। अक्सर पूछा जाता है कि राजस्व न्यायालय (Revenue Courts) और राजस्व अधिकारी (Revenue Authorities) क्या होते हैं तथा इनके बीच मूलभूत अंतर क्या…

Read more

भू राजस्व क्या है? — उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अधीन भू राजस्व वसूली की प्रक्रिया  

Posted on November 25, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय   भू राजस्व (Land Revenue) भारतीय राजस्व व्यवस्था का एक मौलिक घटक है। ऐतिहासिक दृष्टि से भू राजस्व भूमि से सरकार द्वारा प्राप्त किया जाने वाला वह कर या राशि है जो शासन-व्यवस्था, भूमि रिकॉर्ड एवं प्रबंधन के लिए प्रयोज्य मानी जाती है। आधुनिक संदर्भ में भू राजस्व में भूमि कर, पट्टा/किराया, भूमिधन/भू-कर और संबंधित…

Read more

राजस्व परिषद — गठन, अधिकारिता और शक्तियाँ

Posted on November 24, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

प्रस्तावना राजस्व परिषद (Revenue Council) भारतीय राजस्व प्रशासन की एक महत्वपूर्ण संस्थात्मक संकल्पना है, जो भूमि, कर, सरकारी आय व संबंधित विवादों के निवारण तथा नीतिगत दिशा-निर्देशन में अहम भूमिका निभाती है।  परिचय राजस्व परिषद उस संस्थान को कहते हैं जिसका उद्देश्य राजस्व-संबंधी मामलों जैसे भूमि कर, भूमि का मालिकाना, राजस्व संग्रहण, राजस्व न्यायालयों के…

Read more

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता २००६ के अधीन किन किन मामलो में प्रथम और द्वितीय अपील हो सकती है?क्या सिविल प्रक्रिया संहिता १९०८ और परिसीम अधिनियम १९६३ से प्रावधान राजस्व न्यायालयों पर लागू होंगे?

Posted on November 24, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

प्रस्तावना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (आगे “संहिता”) ग्रामीण/राजस्व न्यायालयों में भूमि-संबंधी विवादों के निपटारे का मुख्य कानूनी ढाँचा है।  दो पृथक परन्तु संबंधित मुद्दे पूछे गए हैं: (1) किन-किन मामलों में प्रथम व द्वितीय अपील सम्भव है; और (2) क्या सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) तथा परिसीमन अधिनियम, 1963 के प्रावधान राजस्व न्यायालयों पर…

Read more

जोत के पट्टे का अर्थ और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अधीन पट्टा किसे मिल सकता है — 

Posted on November 24, 2025November 25, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय अधिकार वर्णन और खेती योग्य भूमि के स्वत्व-संबंधी प्रश्नों में “जोत” और “पट्टा” का अर्थ तथा पट्टा किसे दिया जा सकता है—यह समझना महत्त्वपूर्ण है।  1. जोत का अर्थ – सामान्य अर्थ: जोत से आशय सामान्यतः खेत की वह भागी भूमि है जिसे व्यक्तिगत रूप से जोता गया हो; यानी जो एक कृषक द्वारा…

Read more

बेदखली से आप क्या समझते हैं? — उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के संदर्भ में आसामी को किन अधिकारों पर बेदखल किया जा सकता है? — गलत बेदखली के विरुद्ध उपचार 

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय बेदखली (Eviction) भूमि-संबंधी विवादों में एक सामान्य प्रथा है जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति (आसामी/किरायेदार/अधिवासी) को किसी संपत्ति या भू-भाग से हटाना है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (UP Revenue Code, 2006) व संबंधित प्रावधानों के तहत बेदखली की प्रक्रियाएँ, कारण और आसामी के अधिकार विस्तारपूर्वक विनियमित हैं।  1. बेदखली का अर्थ (परिभाषा) – सामान्य…

Read more

संक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर से आप क्या समझते हैं? उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता २००६ में वर्णित असंक्रमनीय अधिकार वाले भूमिधर के अधिकारों की विवेचना कीजिये?

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

प्रस्तावना भूमिधर (occupant/landholder) और उसके अधिकार भारतीय भूमि कानून एवं राजस्व व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण अंग हैं। एनविख्यात श्रेणियों में “संक्रमणीय अधिकार” (transferable rights) और “असंक्रमनीय अधिकार” (non-transferable/inalienable rights) का विभाजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इससे न केवल व्यक्ति के निजी स्वत्व व लेन-देन की क्षमता निर्धारित होती है, बल्कि सार्वजनिक नीति, सामाजिक हित और…

Read more

ग्राम पंचायत — परिभाषा, कार्य और शक्तियाँ 

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय ग्राम पंचायत भारतीय स्थानीय स्वशासन प्रणाली की सबसे निचली इकाई है। यह ग्राम स्तर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का माध्यम है और ग्रामीण विकास, समेकित लोककल्याण व स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी निभाती है। 1. परिभाषा ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) स्थानीय आत्म-शासन का प्राथमिक निकाय है जो ग्राम स्तर पर ग्रामवासियों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के…

Read more

ग्राम सभा क्या है? — ग्राम सभा के कार्य और शक्तियाँ 

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय ग्राम सभा भारतीय लोक प्रशासन की सबसे निचली और महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक इकाई है। यह ग्राम पंचायत के क्षेत्र में रहने वाले सभी मतदाता — यानी 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के निवासियों — का सम्मिलित निकाय है। भारतीय संविधान के 73वें संशोधन (1992) ने ग्राम सभा को स्थानीय स्वशासन प्रणाली का केन्द्रिक…

Read more

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 — प्रमुख विशेषताएँ

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (Uttar Pradesh Revenue Code, 2006) प्रदेश की भूमि और राजस्व संबंधी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने हेतु पारित एक समेकित कानून है। यह संहिता पुराने राजस्व कानूनों और नियमों का संशोधन तथा समायोजन करते हुए राजस्व प्रशासन, निजी और सरकारी भूमि के अधिकार, रिकार्ड की व्यवस्था, कर–उपार्जन व वसूलियाँ, नक्सल एवं…

Read more

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006

Posted on November 24, 2025November 24, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 (उत्तर प्रदेश एक्ट नंबर — सामान्यतः “UP Revenue Code, 2006”) राज्य की भूमि व्यवस्था, राजस्व प्रशासन और संबंधित प्रक्रियात्मक नियमों का समेकित कानूनी ढांचा प्रस्तुत करती है। यह संहिता भूमि रिकॉर्ड, जमींदारी/किसानों के अधिकार, कर-निर्धारण, आबादी और राजस्व न्यायालयों से जुड़ी प्रक्रियाओं को विनियमित करती है। संक्षिप्त परिभाषा और…

Read more

“अपने मामले में न्यायाधीश नहीं बन सकता”

Posted on November 22, 2025November 22, 2025 by KRANTI KISHORE

किसी भी विधिक व्यवस्था में निष्पक्षता और धार्मिकता (impartiality and fairness) का सिद्धांत सर्वोपरि होता है। इस सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति यह है कि कोई भी व्यक्ति अपने मामलों में न्यायाधीश नहीं बन सकता (nemo judex in causa sua)। यह सिद्धांत न केवल न्यायिक प्रक्रिया की नैतिकता का आधार है बल्कि कानूनी नियमों और…

Read more

न्यायपालिका किस प्रकार प्रशासनिक अधिकरण को नियंत्रित करती है?

Posted on November 22, 2025November 22, 2025 by KRANTI KISHORE

परिचय न्यायपालिका और प्रशासनिक अधिकरण—दोनों ही शासन के महत्वपूर्ण अंग हैं। प्रशासनिक अधिकरण विशेषज्ञता-आधारित, शीघ्र और तकनीकी विवाद निपटान के साधन हैं; वहीं न्यायपालिका संवैधानिक महत्व की रक्षा, नियमों के पालन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की गारंटी सुनिश्चित करती है। इसलिए न्यायपालिका का प्रशासनिक अधिकरणों पर नियन्त्रण आवश्यक है ताकि वे विधि के शासन…

Read more

Posts pagination

  • Previous
  • 1
  • …
  • 6
  • 7
  • 8
  • 9
  • 10
  • 11
  • Next

Recent Posts

  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-7 | इतिहास, राजव्यवस्था, भूगोल, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं समसामयिकी
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-6 | इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, विज्ञान एवं समसामयिकी
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-5 | इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, विज्ञान एवं समसामयिकी
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-4 | इतिहास, राजव्यवस्था, भूगोल, अर्थव्यवस्था, विज्ञान एवं समसामयिकी
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-3 | इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था, विज्ञान एवं समसामयिकी
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) मॉक टेस्ट भाग-2 | इतिहास, भूगोल, राजव्यवस्था एवं करेंट अफेयर्स
  • UPSSSC PET 2026 महत्वपूर्ण 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट भाग-1| सामान्य ज्ञान एवं समसामयिकी क्विज
  • विश्व के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन एवं उनके मुख्यालय 200 MCQ ऑनलाइन क्विज | International Organizations & Headquarters Quiz Test
  • विश्व के देश, राजधानी एवं मुद्रा 150 महत्वपूर्ण MCQ क्विज (2026 अपडेटेड) | Countries, Capitals & Currencies Live Test
  • भारत के राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) क्विज | प्रशासनिक संरचना, राजधानी एवं भूगोल
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दिवस 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट व क्विज (भाग-2)
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दिवस 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट व क्विज
  • भारत के पड़ोसी देश 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट व क्विज | अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ, राजधानियाँ, मुद्राएँ एवं परीक्षा तथ्य
  • भारतीय संसद एवं राज्य विधानमंडल 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) क्विज | लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा एवं विधान परिषद (2026 अद्यतन)
  • भारतीय पर्यटन स्थल 200 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) ऑनलाइन टेस्ट व क्विज | UPSSSC PET एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ
  • October 2026 (56)
  • September 2026 (25)
  • August 2026 (26)
  • July 2026 (2)
  • June 2026 (2)
  • May 2026 (2)
  • April 2026 (27)
  • March 2026 (3)
  • February 2026 (2)
  • January 2026 (1)
  • December 2025 (2)
  • November 2025 (59)
  • October 2025 (1)
  • August 2025 (3)
  • April 2025 (2)
  • Alternative Dispute Resolution (वैकल्पिक विवाद निस्तारण) (16)
  • BNSS (1)
  • Constitution (6)
  • Current Affairs (20)
  • ECONOMICS (36)
  • Environment (3)
  • GENERAL STUDY (84)
  • GEOGRAPHY (12)
  • HISTORY (24)
  • Human Rights (19)
  • Land Law (भूमि विधि) (23)
  • Legal Research Methods (विधिक अनुसन्धान पद्धति) (14)
  • Maths (2)
  • Media Law (2)
  • NCERT (25)
  • POLITY (19)
  • Professional Ethics & Court Craft (10)
  • Quizs (58)
  • Science (2)
  • STATIC GK (27)
  • STORIES (1)
  • Uncategorized (1)
  • प्रशासनिक विधि (14)
  • मनोविज्ञान (3)

Useful Pages

  • Motivation
    • Quotes
    • Stories

पढ़ो जनो (Padho Jano) शिक्षा के क्षेत्र में एक समर्पित कदम है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, SSC) की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भारतीय कानून (Law), NCERT, मनोविज्ञान और सामान्य ज्ञान के कठिन विषयों को सबसे सरल हिंदी नोट्स में उपलब्ध कराना है।

  • Facebook
  • YouTube
  • Telegram
  • WhatsApp
  • X
  • Instagram
  • LinkedIn
  • About Me
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Paid Plans
  • Certificate Validation : Link1 | Link2
  • 📰 Current Affairs - News
  • ⚖️ Law Notes / भारतीय कानून
  • 🧠 Psychology / मनोविज्ञान
  • 📚 NCERT Notes
  • 📝 GK & Quizzes / सामान्य ज्ञान