परिचय एक समावेशी और न्यायसंगत समाज की स्थापना के लिए अधिकारों की समझ आवश्यक है। अधिकार (rights) समाज, राज्य और व्यक्ति के बीच संबंधों और जिम्मेदारियों का आधार बनते हैं। सामान्यतः अधिकारों को तीन व्यापक श्रेणियों में बाँटा जाता है: नैसर्गिक अधिकार (natural rights), विधिक अधिकार (legal rights) और मानव अधिकार (human rights)। प्रत्येक श्रेणी…
Author: KRANTI KISHORE
मानवाधिकारों की अवधारणा
मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो हर मानव को केवल मनुष्य होने के नाते प्राप्त होते हैं। ये अधिकार अप्रत्यक्ष, सार्वभौमिक और अविभाज्य होते हैं। मानवाधिकारों का मूल उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्ण जीवन देना और अन्याय, उत्पीड़न एवं भेदभाव से रक्षा करना है। मानवाधिकारों की अवधारणा की शुरुआत आधुनिक काल में हुई, जो मुख्यतः 18वीं…
**पूर्व में बरी और पूर्व में दोषी: सिद्धांत**
**पूर्व में बरी और पूर्व में दोषी: सिद्धांत** ये दोनों सिद्धांत **दोहरे खतरे (Double Jeopardy)** के सिद्धांत से जुड़े हैं। दोहरे खतरे का अर्थ है कि किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित नहीं किया जा सकता। **पूर्व में बरी (Former Acquittal):** यदि किसी व्यक्ति को…
संविधान की प्रस्तावना: एक अध्ययन
परिचय भारतीय संविधान की प्रस्तावना, जिसे उद्देशिका भी कहा जाता है, संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक भाग है। यह उन मूलभूत मूल्यों, उद्देश्यों और लक्ष्यों को निर्धारित करती है जिन पर भारत का सर्वोच्च कानून आधारित है। प्रस्तावना न केवल संविधान का एक संक्षिप्त सार प्रस्तुत करती है, बल्कि यह भारतीय राज्य के स्वरूप और…