न्यायालय में एक अधिवक्ता का आचरण केवल शिष्टाचार का विषय नहीं है, बल्कि यह अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) के नियमों द्वारा निर्धारित एक कानूनी बाध्यता है। एक अधिवक्ता ‘न्यायालय का अधिकारी’ (Officer of the Court) होता है, जिसका प्राथमिक कर्तव्य न्याय की प्राप्ति में सहायता करना है। न्यायालय के भीतर एक…
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भारतीय विधिज्ञ परिषद द्वारा अधिवक्ताओं के अन्य नियोजनों पर क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं? क्या कोई अधिवक्ता प्रश्न पत्रों को बनाने एवं उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य पारिश्रमिक पर कर सकता है?
अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 49(1)(c) के तहत भारतीय विधिज्ञ परिषद (Bar Council of India – BCI) को अधिवक्ताओं के व्यावसायिक आचरण और शिष्टाचार के मानक निर्धारित करने की शक्ति प्राप्त है। BCI के नियमों के अध्याय II (भाग VI) के अनुसार, एक अधिवक्ता मुख्य रूप से न्यायालय का अधिकारी होता है, इसलिए उसके ‘अन्य…