उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 के अंतर्गत ग्राम पंचायत ग्रामीण स्वशासन की प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। ग्राम पंचायत की संरचना, कार्यकालावधि और सदस्यों व प्रधान की योग्यताओं/अयोग्यताओं (निर्रहताओं) का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है: 1. ग्राम पंचायत की संरचना (Structure of Gram Panchayat) अधिनियम की धारा 12 के अनुसार, प्रत्येक पंचायत क्षेत्र के…
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‘प्रतिकर का संदाय’ (Payment of Compensation)
उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 के अंतर्गत ‘प्रतिकर का संदाय‘ (Payment of Compensation) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। चकबंदी का मुख्य उद्देश्य खेतों का पुनर्गठन करना है, लेकिन इस प्रक्रिया में जब किसी किसान की भूमि, संपत्ति या वृक्षों का नुकसान होता है, तो उसकी क्षतिपूर्ति के लिए ‘प्रतिकर’ (मुआवजा) देने का प्रावधान किया…
गांव निधि (Village Fund)
गांव निधि (Village Fund) उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 32 के अंतर्गत स्थापित एक महत्वपूर्ण वित्तीय व्यवस्था है। यह ग्राम पंचायत के कुशल संचालन, विकास कार्यों के निष्पादन और स्थानीय प्रशासन को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने का मुख्य आधार है। प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए एक ‘गांव निधि’ का गठन किया…
चकबंदी कार्यों की समाप्ति (Close of Consolidation Operations)
उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम, 1953 के अंतर्गत चकबंदी कार्यों की समाप्ति (Close of Consolidation Operations) एक महत्वपूर्ण कानूनी चरण है। जब किसी क्षेत्र या ग्राम में चकबंदी की पूरी प्रक्रिया (जैसे सर्वेक्षण, रिकॉर्ड सुधार, चकों का आवंटन और कब्जा दिलाना) सफलतापूर्वक संपन्न हो जाती है, तो राज्य सरकार उस क्षेत्र में चकबंदी कार्यों के…
असंक्रमनीय भूमिधर क्या है?
परिचयअसंक्रमनीय भूमिधर (Inalienable Landholding) वह संपत्ति है जिसे स्वामी उसे बेचने, गिफ्ट करने, बंधक रखने या otherwise उसके स्वामित्व का स्वतंत्र रूप से स्थानांतरण करने के लिए वैधानिक रूप से सक्षम नहीं होता। यह अवधारणा भारतीय भूमि-सम्बंधी कानूनों, पारंपरिक क़ानून और राज्य-विशेष नीतियों में प्रयुक्त होती है। परिभाषा और स्वरूप कानूनी आधार और उदाहरण वैधानिक…
नामान्तरण क्या है? नामान्तरण का साक्ष्यिक मूल्य, नामान्तरण की प्रक्रिया और परिणाम
परिचय नामांतरण का तात्पर्य होता है वार्षिक रजिस्टर के अंदर जोरदार के नाम में परिवर्तन होना दूसरे अर्थ में एक व्यक्ति के नाम को खारिज करके दूसरे व्यक्ति का नाम उसी जगह पर डाल दिया जाना दाखिल खारिज की प्रक्रिया को तभी अपनाया जाता है जब जमीन के कब्जे में परिवर्तन होता है। नामान्तरण (नामांतरण/नामांतरण…
अपील क्या है? अपील के आधार कौन-कौन से हैं और राजस्व मामलों में यह पुनरीक्षण से कैसे भिन्न है?
परिचय “अपील” और “पुनरीक्षण” (revision) किसी भी विधिक प्रणाली में न्यायिक निर्णयों पर नियंत्रण और उसके सुधार के उपाय आवश्यक होते हैं। 1. अपील (Appeal) — परिभाषा और स्वरूप – परिभाषा: अपील वह न्यायिक उपाय है जिसके द्वारा कोई पक्ष निचली अदालत या अधिकरण के निर्णय, आदेश या निष्कर्ष को उच्च न्यायाधिकरण के समक्ष चुनौती…
सीमा चिन्ह क्या है? सीमा सम्बन्धी विवादों के निपटारे की प्रक्रिया
सीमा (boundary) किसी संपत्ति के स्वामित्व या अधिकार की भौगोलिक सीमाओं को दर्शाती है। भूमि, भवन या किसी अन्य अचल संपत्ति के मामले में सीमा चिन्ह (boundary marker/land mark) वह स्थायी या अस्थायी चिन्ह होते हैं जो दो या अधिक संपत्तियों के बीच के विभाजन को सूचित करते हैं। भारतीय संदर्भ में सीमा चिन्ह का…
राजस्व न्यायालय और राजस्व अधिकारी
प्रस्तावना राजस्व व्यवस्था भारतीय आपराधिक/नागरिक प्रक्रियाओं से अलग एक स्वायत्त प्रशासनिक-न्यायिक तंत्र है जिसका विषय भूमि, भूमि का कर (पट्टा, जगह रकबा कर), बकाया राजस्व व जमीन से संबंधित हित-संबंध होते हैं। अक्सर पूछा जाता है कि राजस्व न्यायालय (Revenue Courts) और राजस्व अधिकारी (Revenue Authorities) क्या होते हैं तथा इनके बीच मूलभूत अंतर क्या…
भू राजस्व क्या है? — उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अधीन भू राजस्व वसूली की प्रक्रिया
परिचय भू राजस्व (Land Revenue) भारतीय राजस्व व्यवस्था का एक मौलिक घटक है। ऐतिहासिक दृष्टि से भू राजस्व भूमि से सरकार द्वारा प्राप्त किया जाने वाला वह कर या राशि है जो शासन-व्यवस्था, भूमि रिकॉर्ड एवं प्रबंधन के लिए प्रयोज्य मानी जाती है। आधुनिक संदर्भ में भू राजस्व में भूमि कर, पट्टा/किराया, भूमिधन/भू-कर और संबंधित…