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भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास: 88 महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली

Posted on August 30, 2026August 30, 2026 by KRANTI KISHORE

1. अनौपचारिक/असंगठित क्षेत्र के उद्यम (Informal Sector Enterprises)

निजी क्षेत्र के ऐसे उद्यम जिनमें मजदूरी पाने वाले श्रमिकों की संख्या सामान्यतः 10 से अधिक नहीं होती।

2. अदृश्य मदें (Invisibles)

भुगतान संतुलन के चालू खाते की वे मदें जिनमें दिखाई देने वाली वस्तुएँ शामिल नहीं होतीं। इनमें मुख्यतः पर्यटन, जहाजरानी, वायु परिवहन, बीमा और बैंकिंग जैसी वित्तीय सेवाएँ आती हैं। इनमें विदेशों से उपहारों का आदान-प्रदान, धन का निजी खाते में अंतरण, सरकारी अनुदान तथा ब्याज, लाभ और लाभांश आदि भी शामिल होते हैं।

3. अनारक्षण (Dereservation)

किसी व्यक्ति या उद्योग के समूह को उन वस्तुओं का उत्पादन करने की अनुमति देना, जिनका उत्पादन पहले केवल किसी विशेष व्यक्ति या उद्यमी द्वारा किया जा सकता था। भारत में इसका संबंध मुख्यतः बड़े उद्योगों द्वारा उन वस्तुओं के उत्पादन की अनुमति से है, जिनका उत्पादन पहले केवल लघु उद्योग कर सकते थे।

4. अवमूल्यन (Devaluation)

विनिमय दर में गिरावट, जिसके कारण विदेशी मुद्राओं की इकाइयों के रूप में आंतरिक मुद्रा की कीमत कम हो जाती है।

5. अवसर लागत (Opportunity Cost)

किसी कार्य या मूल्यवान वस्तु के संदर्भ में परिभाषित वह लागत जो अस्वीकार किए गए विकल्प के मूल्य के बराबर होती है।

6. आकस्मिक दिहाड़ी मजदूर (Casual Wage Labourer)

ऐसा व्यक्ति जो अन्य लोगों के खेतों या उपक्रमों में दैनिक दिहाड़ी के लिए काम करता है।

7. आंतरिक अर्थव्यवस्था का एकीकरण (Integration of Domestic Economy)

सरकारी नीतियों द्वारा अन्य देशों के साथ स्वतंत्र व्यापार और निवेश में वृद्धि करना, जिससे आंतरिक अर्थव्यवस्था अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ कुशलता एवं पारस्परिक निर्भरता के साथ जुड़ सके।

8. आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)

सरकार की आर्थिक विकास की ऐसी नीति जिसमें आयात की जा रही वस्तुओं का स्थान देश में निर्मित वस्तुएँ लेती हैं। इसमें आयात नियंत्रण, आयात शुल्क तथा अन्य नियंत्रण अपनाए जाते हैं। इस नीति के उद्देश्य के लिए आंतरिक उद्योगों को आत्मनिर्भरता प्राप्त करने तथा रोजगार संवर्धन के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

9. आयात शुल्क (Tariff)

आयात पर लगाया जाने वाला वह कर जो प्रति इकाई या मूल्य के अनुसार निर्धारित किया जाता है।

10. आयात शुल्क बाधाएँ (Tariff Barriers)

सरकार द्वारा आयात पर लगाए गए कर।

11. आयात लाइसेंस (Import Licensing)

किसी देश में वस्तु के आयात के लिए सरकार से प्राप्त होने वाली अनुमति।

12. आसियान (ASEAN — Association of South East Asian Nations)

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक संगठन। इसके सदस्य हैं—थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, फिलीपींस, ब्रुनेई, दारुस्सलाम, कंबोडिया, लाओस, म्यांमार और वियतनाम।

13. उत्पादकता (Productivity)

श्रम या पूँजी की दक्षता में वृद्धि से उनकी उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। यह शब्द प्रायः श्रम के आगत की उत्पादकता के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है।

14. उपनिवेशवाद (Colonialism)

युद्ध में विजय या अन्य विधियों का प्रयोग करके किसी दूसरे देश को अपने अधीन बनाना। इस प्रकार अपने देश की सीमा से बाहर भी अन्य राष्ट्रों के राजनीतिक और आर्थिक जीवन पर नियंत्रण कर लिया जाता था। उपनिवेशवाद की सबसे बड़ी विशेषता अधीनस्थ देशों का शोषण रही है।

15. उपभोग समुच्चय (Consumption Basket)

किसी परिवार द्वारा उपभोग की जाने वाली उपयुक्त वस्तुओं और सेवाओं का समूह, जिसका प्रयोग जनता के उपभोग के स्वरूप का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। भारत में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन उपभोग समुच्चय में 19 वस्तुओं को शामिल करता है, जैसे—अनाज, दालें और दूध से बनी चीजें, खाद्य तेल, सब्जियाँ, वस्त्र आदि।

16. उद्यम (Enterprise)

किसी व्यक्ति या समूह के स्वामित्व वाला उपक्रम, जो मुख्यतः बिक्री के उद्देश्य से वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन एवं वितरण आदि करता है।

17. ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency)

यह एक सरकारी संस्था है जिसका उद्देश्य ऐसी नीतियों और रणनीतियों का विकास करना है जिनमें स्व-नियमन तथा बाजार-सिद्धांतों पर बल होता है। यह अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देता है और विद्युत के अपव्यय को रोकने के उपाय करता है।

18. एकाधिकार तथा प्रतिबंधकारी व्यापार अधिनियम (Monopolies and Restrictive Trade Practices Act)

इस अधिनियम को व्यापारियों की एकाधिकार तथा अन्य जनहित बाधक व्यावसायिक प्रवृत्तियों के नियमन के लिए लागू किया गया था।

19. औपचारिक/संगठित क्षेत्र के प्रतिष्ठान (Formal Sector Establishments)

सभी सार्वजनिक तथा निजी प्रतिष्ठान जिनमें 10 या अधिक व्यक्ति मजदूरी पर काम कर रहे हों।

20. अंश/हिस्से/इक्विटी (Equities)

किसी कंपनी की चुकता पूँजी के समान मूल्यधारी अंश। इनके धारक ही कंपनी के वास्तविक स्वामी माने जाते हैं। इन्हें कंपनी में मताधिकार प्राप्त होता है और ये लाभांश पाने के अधिकारी होते हैं।

21. कर-पर-कर (Cascading Effect)

करों के कारण वस्तु की कीमतों में अनुपात से अधिक वृद्धि। यह प्रायः अनेक चरणों में लगाए जाने वाले करों का परिणाम होता है। उदाहरण के लिए, उत्पादन शुल्क की राशि को वस्तु की उत्पादन लागत में जोड़कर उस पर बिक्री कर लगाना। इस प्रकार उत्पादन शुल्क पर भी बिक्री कर लग जाता है।

22. कृषि का व्यावसायीकरण (Commercialisation of Agriculture)

जब कृषि उत्पादन स्व-उपभोग या पारिवारिक उपभोग के लिए न होकर मुख्यतः बाजार में बिक्री के लिए किया जाता है तो उसे कृषि का व्यावसायीकरण कहा जाता है। अंग्रेजों ने खाद्य फसलों के स्थान पर नकदी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए उन्हें ऊँची कीमतें देनी शुरू कीं। उन्हें नकदी फसलें अपने देश के उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में चाहिए थीं।

23. गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources)

वे प्राकृतिक संसाधन जिनका नवीकरण संभव नहीं है। उनका भंडार विशाल होते हुए भी सीमित होता है। उदाहरण—जीवाश्म ऊर्जा संसाधन जैसे तेल और कोयला तथा लोहा, सीसा, एल्युमिनियम, यूरेनियम आदि खनिज।

24. गैर-शुल्क बाधाएँ (Non-Tariff Barriers)

सरकार द्वारा आयात शुल्क से अलग लगाए गए आयात प्रतिबंध। इनमें आयात की मात्रा और गुणवत्ता पर लगाए गए प्रतिबंध भी शामिल होते हैं।

25. घाटे की वित्त व्यवस्था (Deficit Financing)

सरकार के व्यय का राजस्व से अधिक होना।

26. जनांकिकीय संक्रमण (Demographic Transition)

जनांकिकीविद् फ्रैंक नोटेस्टीन द्वारा 1945 में विकसित अवधारणा। यह आर्थिक विकास से जुड़ी बेहतर जीवन दशाओं के परिणामस्वरूप जन्म और मृत्यु दरों में गिरावट की विशेष प्रवृत्तियों की व्याख्या करती है। नोटेस्टीन ने जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाएँ बताई थीं—पूर्व-औद्योगिक, विकासशील तथा आधुनिक समाज। बाद में औद्योगीकरण के उपरांत की अवस्था भी इसमें शामिल कर ली गई।

27. जन्म के समय जीवन-प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth)

जन्म के समय विद्यमान आयु-विशेष मृत्यु दर के पैटर्न के जीवन भर स्थिर रहने पर किसी नवजात शिशु के जीवित रहने की अपेक्षित अवधि, जिसे वर्षों में व्यक्त किया जाता है।

28. G-8

आठ देशों का समूह। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस शामिल हैं। यहाँ राष्ट्राध्यक्षों तथा अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों का वार्षिक आर्थिक-राजनीतिक शिखर सम्मेलन होता है। समूह की अध्यक्षता की अवधि एक वर्ष होती है और यह बारी-बारी से सदस्यों को प्रदान की जाती है।

29. G-20

विश्व आर्थिक स्थायित्व और धारणीय विकास को बढ़ावा देने के लिए देशों का एक समूह। इसमें 19 देशों के वित्त मंत्री तथा केंद्रीय बैंक के गवर्नर शामिल होते हैं—अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ग्रेट ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका। यूरोपीय संघ भी G-20 का सदस्य है।

30. नई आर्थिक नीति (New Economic Policy)

भारत में वर्ष 1991 से अपनाई जा रही आर्थिक नीतियों को नई आर्थिक नीति कहा जाता है।

31. निर्यात-आयात नीति/व्यापार नीति (Export-Import Policy)

सरकार की वे आर्थिक नीतियाँ जो आयात और निर्यात व्यापार को प्रभावित करती हैं।

32. निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान (Private Sector Establishment)

निजी व्यक्तियों या समूहों के स्वामित्व और नियंत्रण वाले प्रतिष्ठान।

33. नवीकरणीय संसाधन (Renewable Resources)

वे संसाधन जो विवेकपूर्ण ढंग से प्रयोग किए जाने पर प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से नवीनीकृत होते रहते हैं। जल, वन, पशुधन, मत्स्य आदि ऐसे संसाधन हैं कि यदि इनका अत्यधिक दोहन न हो तो ये निरंतर बने रह सकते हैं।

34. निर्यात शुल्क (Export Duties)

किसी देश से वस्तुओं के निर्यात पर लगाया गया कर।

35. निर्यात संवर्धन (Export Promotion)

राजकीय और व्यापारिक समर्थन सहित वे सभी नीतियाँ जिन्हें सरकार उच्च आर्थिक संवृद्धि प्राप्त करने और अधिक विदेशी मुद्रा कमाने के उद्देश्य से अपनाती है। इन नीतियों से निर्यात बाधाओं को दूर किया जाता है।

36. नियोजक/रोजगारदाता (Employers)

वे स्वनियोजक जो अपना काम स्वयं या कुछ भागीदारों की सहायता से चलाते हैं और प्रायः श्रमिकों को उस उद्यम के संचालन के लिए काम पर रखते हैं।

37. नियमित वेतन/मजदूरी पाने वाले श्रमिक (Regular Salaried/Wage Employees)

अन्य लोगों के खेतों या फर्मों में काम करने वाले वे श्रमिक/कर्मचारी जिन्हें नियमित रूप से वेतन या मजदूरी मिलती है। इनमें पूर्णकालिक, अंशकालिक तथा प्रशिक्षु कर्मचारी भी शामिल होते हैं।

38. परिमाणात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions)

आंतरिक उद्योगों के संरक्षण और भुगतान शेष के घाटे को कम करने के लिए देश में आयात होने वाली वस्तुओं की मात्रा निर्धारित करना।

39. परिवार (Household)

सामान्यतः एक साथ रहने और एक रसोई में भोजन करने वाले व्यक्तियों का समूह। सामान्यतः मेहमान परिवार के सदस्य नहीं माने जाते। यदि परिवार का कोई सदस्य अस्थायी रूप से बाहर चला गया हो तो उसकी परिवार की सदस्यता समाप्त नहीं होती।

40. पारिवारिक श्रम/श्रमिक (Family Labour/Worker)

उद्योग या उद्यम आदि में नकद या वस्तु के रूप में मजदूरी पाने की इच्छा के बिना काम करने वाला व्यक्ति।

41. पेंशन (Pension)

सेवानिवृत्त श्रमिक को मिलने वाली मासिक निर्वाह राशि।

42. प्रतिष्ठान (Establishment)

ऐसा उद्यम जिसमें वर्ष की अधिकांश अवधि में परिश्रमिक पाने वाला श्रमिक अवश्य कार्य करता है।

43. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment)

किसी देश की आंतरिक संरचनाओं, संयंत्रों और संस्थाओं में विदेशी परिसंपत्तियों का निवेश। इसमें शेयर बाजार में लगी विदेशी पूँजी शामिल नहीं की जाती। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को शेयर बाजार के माध्यम से स्वदेशी कंपनियों में निवेश से बेहतर माना जाता है, क्योंकि शेयर बाजार में लगा धन अपेक्षाकृत अस्थिर होता है, जबकि प्रत्यक्ष निवेश देश में कार्य करता रहता है।

44. प्रतिव्यक्ति आय (Per Capita Income)

किसी विशेष अवधि में राष्ट्रीय आय और राष्ट्रीय जनसंख्या का अनुपात।

45. प्रवेश अवरोध (Barriers to Entry)

वे कारक जो किसी उद्योग में प्रवेश करने की इच्छुक नई फर्मों के आगमन को कठिन बना देते हैं। ये अवरोध उस उद्योग में पहले से लगी पुरानी फर्मों को प्रभावित नहीं करते, केवल नई फर्मों पर लागू होते हैं।

46. प्रसव/मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate)

प्रसव काल में माताओं की मृत्यु और सजीव जन्मों का अनुपात। कई बार सजीव जन्मों के साथ गर्भपात का भी योग बना दिया जाता है। अनुपात की गणना एक वर्ष की अवधि के लिए की जाती है।

47. बजट घाटा (Budgetary Deficit)

सरकार की आय और कर राजस्व द्वारा उसके व्यय का पूरा न हो पाना।

48. बहुपक्षीय व्यापार संधियाँ (Multilateral Trade Agreements)

किसी देश द्वारा दो या अधिक देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान से संबंधित व्यापार समझौते।

49. बेहतर अनुपालन (Better Compliance)

सामान्य रूप से कर भुगतान आदि के संदर्भ में प्रयुक्त सरकारी निर्देशों का पालन करना।

50. ब्रंटलैंड कमीशन (Brundtland Commission)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1983 में विश्व की पर्यावरणीय समस्याओं के अध्ययन के लिए नियुक्त आयोग। इसने एक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें ‘धारणीय/सतत विकास’ की परिभाषा का व्यापक रूप से उल्लेख किया गया।

51. बेरोजगारी (Unemployment)

वे सभी व्यक्ति जो काम के अभाव के कारण बेकार बैठे हैं, लेकिन रोजगार कार्यालयों, मध्यस्थों, मित्रों, संबंधियों या संभावित रोजगारदाताओं को आवेदन देकर रोजगार के लिए अपनी उपलब्धता सूचित कर रहे हैं। इन्हें वर्तमान परिस्थितियों और प्रचलित पारिश्रमिक दरों पर काम करने के लिए तत्पर होना चाहिए।

52. भुगतान संतुलन (Balance of Payments)

किसी देश की एक वर्ष की अवधि में शेष विश्व से चालू और पूँजीगत खातों पर हुए समस्त लेन-देन का सांख्यिकीय सार। इस खाते में अवधि भर के सभी दायित्वों और परिसंपत्तियों का ब्यौरा होता है। इसलिए यह सदैव संतुलन में रहता है।

53. भूमि/राजस्व बंदोबस्त (Land Revenue Settlement)

देश के विभिन्न भागों में अंग्रेजी शासन की स्थापना के बाद प्रशासन का गठन करने के लिए एक सर्वेक्षण किया गया। सरकार के हित की दृष्टि से प्रत्येक भूखंड में उगाए जाने वाले राजस्व का निर्धारण करने का निर्णय लिया गया। इसी अधिकार के आधार पर राजस्व निर्धारण को भू-राजस्व व्यवस्था का बंदोबस्त कहा गया। भारत में तीन प्रकार की राजस्व व्यवस्थाएँ लागू की गई थीं—

  1. स्थायी बंदोबस्त या जमींदारी व्यवस्था
  2. किसानों के साथ व्यक्तिगत आधार पर राजस्व निर्धारण — रैयतवाड़ी व्यवस्था
  3. पूरे राजस्व गाँव से राजस्व व्यवस्था — महालवाड़ी व्यवस्था

54. भविष्य निधि (Provident Fund)

कर्मचारियों के हितार्थ संचालित कोष। इसमें कर्मचारी और रोजगारदाता दोनों अंशदान जमा करते हैं। इसका संचालन सरकार करती है तथा संचित राशि कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के समय दे दी जाती है।

55. मृत्यु दर (Mortality Rate)

एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या में हुई मृत्यु की संख्या द्वारा व्यक्त दर। इसमें सामान्य मृत्यु तथा रोग आदि के कारण हुई दोनों प्रकार की मृत्यु शामिल की जाती हैं। यह रुग्णता दर से भिन्न है। रुग्णता दर बीमारी के कारण काम न कर पाने की स्थिति को दर्शाती है।

56. मुद्रास्फीति (Inflation)

सामान्य कीमत स्तर में निरंतर वृद्धि।

57. योजना आयोग (Planning Commission)

भारत सरकार द्वारा गठित एक संगठन। यह देश के सभी संसाधनों के अधिकतम संतुलित और युक्तियुक्त प्रयोग की योजनाएँ बनाने का कार्य करता है। इसे देश के विकास पथ की प्राथमिकताएँ भी निर्धारित करनी होती हैं।

58. यूरोपीय संघ (European Union)

यूरोप महाद्वीप में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से देशों द्वारा बनाया गया संघ।

59. राज्य विद्युत बोर्ड (State Electricity Boards)

राज्य प्रशासन के ऐसे अंग जो विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण का कार्य करते हैं।

60. राष्ट्रीय उत्पाद/आय (National Product/Income)

किसी देश में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों तथा विदेशों से प्राप्त आय का योगफल।

61. रुग्णता (Morbidity)

बीमार पड़ने की प्रवृत्ति। यह अस्थायी अपंगता द्वारा काम को दुष्प्रभावित करती है। निरंतर रुग्णता अंततः मृत्यु का रूप भी धारण कर सकती है।

62. वहन क्षमता/धारण क्षमता (Carrying Capacity)

किसी विशेष घनत्व पर जनसंख्या को धारण करने की किसी परिवेश की क्षमता। तकनीकी रूप से यह उस अधिकतम जनसंख्या आकार को दर्शाती है जहाँ पहुँचकर उसकी वृद्धि रुक जाती है। विभिन्न प्रजातियों की धारण क्षमता परिवेश के अनुसार भिन्न हो सकती है और समय के साथ इसमें परिवर्तन भी संभव है।

63. वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax — GST)

वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाया जाने वाला अप्रत्यक्ष कर। इसे जुलाई 2017 में भारत में कई प्रकार के करों, जैसे बिक्री कर आदि को समाप्त करके लागू किया गया। यह वस्तुओं और सेवाओं के प्रत्येक स्तर पर उनके वर्धित मूल्य पर लगाया जाता है। इसके विभिन्न कर-दरें हैं।

64. सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product — GDP)

एक वर्ष में किसी देश के घरेलू क्षेत्र में उत्पादित अंतिम रूप से तैयार वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य। GDP किसी देश की आर्थिक शक्ति का माप है, जबकि GDP प्रति व्यक्ति को सामान्यतः देश के जीवन-स्तर का सूचक माना जाता है।

65. सकल वर्धित मूल्य (Gross Value Added — GVA)

सकल घरेलू उत्पाद और सहायकियों में से अप्रत्यक्ष कर की राशि घटाकर सकल वर्धित मूल्य की गणना की जाती है।

GVA = GDP + सब्सिडी − अप्रत्यक्ष कर

66. व्यापारी बैंक (Merchant Bankers)

कंपनियों को सलाह देने, उनके अंश और ऋण निर्गमन का प्रबंध करने वाले बैंक, वित्तीय संस्थान या निवेश बैंक।

67. व्यतिक्रम/चूक (Default)

नियत तिथि पर ऋण और ब्याज का भुगतान न कर पाना। ऋण किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान से सरकार द्वारा लिया गया ऋण भी हो सकता है। इस प्रकार ऋणी की विश्वसनीयता या ‘साख’ पर आँच आती है।

68. वित्तीय संस्थान (Financial Institution)

बचतों के संग्रह और प्रयोजन या आवंटन से जुड़े संस्थान। इनमें व्यावसायिक, सहकारी और विकास बैंक तथा निवेश संस्थान शामिल हैं।

69. वित्तीय नीति (Fiscal Policy)

आर्थिक गतिविधियों के नियमन के लिए करों तथा सरकारी व्यय का प्रयोग।

70. विदेशी विनिमय/विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange)

अन्य देशों की मुद्रा या बाँड अथवा अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों के माध्यम से किया जाने वाला विदेशी निवेश।

71. विदेशी विनिमय मुद्रा बाजार (Foreign Exchange Market)

ऐसा बाजार जहाँ आज की नियत दरों पर मुद्राओं की खरीद-बिक्री होती है, लेकिन खरीदी-बेची गई मात्रा का वास्तविक हस्तांतरण भविष्य की किसी नियत तिथि को किया जाता है।

72. विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones — SEZ)

ऐसे भौगोलिक क्षेत्र जहाँ विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देश के सामान्य आर्थिक कानूनों को पूर्णतः लागू नहीं किया जाता। विशेष रूप से बनाए गए आर्थिक क्षेत्रों में ये स्थापित किए जाते हैं।

73. विनिवेश (Disinvestment)

किसी कंपनी की पूँजी के एक अंश को जान-बूझकर बेचना। इससे धन जुटाने के साथ-साथ कंपनी की हिस्सेदारी, संरचना या प्रबंधन अथवा दोनों में बदलाव किए जा सकते हैं।

74. वैधानिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio — SLR)

रिजर्व बैंक के आदेशानुसार बैंकों द्वारा कुल जमाओं और सुरक्षित निधियों का तरल रूप में रखा जाने वाला अंश। नकद जमा अनुपात के साथ-साथ SLR का अनुपालन करना बैंकों के लिए अनिवार्य होता है।

75. सहभागिता/कम्यून (Communes)

जन सहभागिता या चीनी भाषा में कम्यून। चीन में 1958 से 1985 की अवधि में ग्रामीण प्रशासन के तीन स्तरों में यह सबसे उच्च स्तर था। बाद में 1982–85 की अवधि में इसका स्थान नगर प्रशासन ने ले लिया। विशालतम सामुदायिक इकाइयों (कम्यूनों) का विभाजन करके उन्हें उत्पादन वाहिनियों तथा उत्पादन दलों में पुनर्गठित कर दिया गया। इन जन सहभागिताओं के प्रशासनिक, राजनीतिक और आर्थिक कार्य होते थे।

76. संस्थागत विदेशी निवेशक (Foreign Institutional Investors — FII)

अन्य देशों में आधारित बैंक और गैर-बैंक संस्थान। इनमें विदेशी व्यावसायिक बैंक, निवेश बैंक, म्यूचुअल फंड, पेंशन कोष जैसी निवेशक संस्थाएँ शामिल होती हैं। शेयर, बाँड आदि में स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से इनके निवेश का देश की आर्थिक एवं व्यावसायिक परिस्थितियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

77. दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC)

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ। यह दक्षिण एशिया के आठ देशों का संघ है—भारत, भूटान, बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान। SAARC दक्षिण एशियाई जनसमुदायों को मैत्री, विश्वास और सूझ-बूझ के आधार पर मिल-जुलकर कार्य करने का एक मंच प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों में आर्थिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा देना है।

78. सामाजिक सुरक्षा (Social Security)

वृद्धों, दिव्यांगों, असहायों, विधवाओं और बच्चों के हितार्थ स्थापित या संचालित निजी एवं सार्वजनिक पेंशन संस्थाएँ। इनमें पेंशन, सेवानुदान, भविष्य निधि, मातृत्व लाभ, स्वास्थ्य सेवा आदि शामिल होते हैं।

79. स्वनियोजित (Self-Employed)

अपने खेत या व्यवसाय आदि का स्वतंत्र रूप से संचालन करने वाले व्यक्ति। इनके कुछ सहायक हो सकते हैं। कब, कहाँ उत्पादन या बिक्री करें अथवा किस प्रकार कार्य करें, इन बातों के विषय में निर्णय लेने की इन्हें स्वतंत्रता रहती है। इनकी आय मुख्यतः अपने उत्पादन की बिक्री या लाभ पर निर्भर रहती है।

80. स्थिरीकरण उपाय (Stabilisation Measures)

भुगतान शेष के उतार-चढ़ाव और उच्च मुद्रास्फीति दर के नियमन के लिए अपनाए गए वित्तीय, राजकोषीय तथा मौद्रिक नीतिगत उपाय।

81. सेवानुदान/ग्रेच्युटी (Gratuity)

कर्मचारी के सेवामुक्त होने पर उसे उसकी सेवाओं के लिए नियोक्ता से मिलने वाली एकमुश्त मानार्थ राशि।

82. स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange)

ऐसा शेयर बाजार जहाँ सरकारों और सार्वजनिक कंपनियों की प्रतिभूतियों का क्रय-विक्रय होता है। यहाँ दलालों को कंपनियों के अंशपत्रों तथा अन्य प्रतिभूतियों के व्यापार की सुविधाएँ उपलब्ध रहती हैं।

83. शहरीकरण (Urbanisation)

किसी महानगरीय क्षेत्र का प्रसार, शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या या उनके क्षेत्रफल का विस्तार अथवा उनके अनुपात में समयानुसार वृद्धि। इसका प्रतिनिधि-स्वरूप शहरों में बसी जनसंख्या का अनुपात या उस अनुपात की वृद्धि दर हो सकती है। इन दोनों को जनगणना प्रतिशत में व्यक्त किया जा सकता है।

84. स्टॉक बाजार (Stock Market)

शेयर और स्टॉक के व्यापार के लिए संस्थान।

85. शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate)

एक वर्ष की आयु से पहले ही मरने वाले शिशुओं की संख्या तथा उस वर्ष जन्मे शिशुओं की संख्या का अनुपात, जिसे 1000 से गुणा किया जाता है।

86. श्रमिक संघ (Trade Union)

मजदूरी की दरों, लाभों और कार्य करने की दशाओं को लेकर अपने सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए मजदूरों द्वारा बनाई गई संस्था।

87. श्रमिक जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio)

श्रमिकों की कुल संख्या का देश की कुल जनसंख्या में अनुपात। इसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।

88. श्रम कानून (Labour Laws)

सरकार द्वारा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए नियम।

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