Skip to content

Padho Jano

One Step Towards Education

Menu
  • HOME
  • India
    • Uttar Pradesh
      • Raebareli
      • Unnao
  • LAW (कानून)
    • Administrative Law (प्रशासनिक विधि)
    • Alternative Dispute Resolution (वैकल्पिक विवाद समाधान) ADR
    • Land Law (भूमि विधि)
    • Professional Ethics & Court Craft
    • Legal Research Methods (विधिक अनुसन्धान पद्धति)
    • Media Law
  • SUBJECTS
    • PSYCHOLOGY
    • Constitution
      • प्रस्तावना
    • Environment
    • English
      • Dictionary
        • अनाज और उनसे बने उत्पाद
  • General Knowledge
  • Quizzes
  • NCERT
    • CLASS – 5
      • SST
  • DOWNLOADS
Menu

भारतीय अर्थव्यवस्था: 1950-1990

Posted on September 5, 2026September 5, 2026 by KRANTI KISHORE

आत्मनिर्भरता से आर्थिक सुधारों तक: कैसा था 1950 से 1990 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का सफर?

करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के बाद, जब 1947 में भारत ने स्वतंत्रता के एक नए सवेरे में कदम रखा, तब हमारे पास अपना भाग्य खुद लिखने की ताकत थी। लेकिन सवाल था—कैसे? एक तरफ पूँजीवाद की चमक थी, तो दूसरी तरफ सोवियत संघ का समाजवाद। स्वतंत्र भारत के नीति-निर्माताओं ने एक बीच का रास्ता चुना, जिसे हम ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था‘ कहते हैं। वर्ष 1950 से 1990 के बीच के इन 40 सालों ने भारत को खाद्यान्न संकट से निकालकर ‘हरित क्रांति’ के जरिए आत्मनिर्भर तो बनाया, लेकिन इसी दौर ने ‘परिमिट-लाइसेंस राज’ की वो बेड़ियां भी तैयार कीं, जिसने अंततः 1991 के बड़े आर्थिक सुधारों (LPG Policy) का रास्ता साफ किया।

स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ

15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो हमें विरासत में एक अत्यंत पिछड़ी और गतिहीन अर्थव्यवस्था मिली थी। करीब 200 वर्षों के ब्रिटिश शासन ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और औद्योगिक आधार को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। देश की लगभग 75% जनसंख्या कृषि पर निर्भर थी, लेकिन पुरानी तकनीक और सिंचाई सुविधाओं के अभाव के कारण कृषि की उत्पादकता बेहद कम थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि देश के नागरिकों का पेट भरने के लिए भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) से अनाज का आयात करना पड़ता था।

सही आर्थिक प्रणाली का चयन: मिश्रित अर्थव्यवस्था

स्वतंत्र भारत के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि देश के सर्वजन कल्याण के लिए कौन-सी आर्थिक प्रणाली सबसे उपयुक्त रहेगी?

  • पूँजीवाद (Capitalism): इसमें उत्पादन और वितरण का निर्णय पूरी तरह बाज़ार की शक्तियों (माँग और पूर्ति) और क्रय-क्षमता पर निर्भर करता है, जिसे नेहरू जी ने देश के गरीबों के हित में नहीं माना।
  • समाजवाद (Socialism): भूतपूर्व सोवियत संघ की तरह, जहाँ निजी संपत्ति का कोई स्थान नहीं था और सब कुछ सरकार के नियंत्रण में था, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इसे पूरी तरह लागू करना संभव नहीं था।
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy): अंततः भारत ने बीच का रास्ता चुना। इसके तहत एक सशक्त सार्वजनिक (सरकारी) क्षेत्रक का निर्माण किया गया, जिसके साथ निजी संपत्ति और लोकतंत्र को भी काम करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई।

योजना आयोग और पंचवर्षीय योजनाएँ

देश के सीमित संसाधनों का सही दिशा में उपयोग करने के लिए वर्ष 1950 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में योजना आयोग का गठन किया गया。भारत ने पंचवर्षीय योजनाओं की यह अवधारणा पूर्व सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित होकर अपनाई थी।

  • परिप्रेक्ष्यात्मक योजना (Perspective Plan): भारत की योजनाओं में केवल 5 वर्षों के तात्कालिक लक्ष्यों को ही नहीं देखा जाता था, बल्कि आगामी 20 वर्षों के दीर्घकालिक रोडमैप को भी शामिल किया जाता था, जिसे परिप्रेक्ष्यात्मक योजना कहते हैं। भारत में पंचवर्षीय योजनाओं का यह प्रलेखीय युग वर्ष 2017 तक चलता रहा।

पंचवर्षीय योजनाओं के 4 मुख्य लक्ष्य :  भारत की सभी शुरुआती पंचवर्षीय योजनाओं के केंद्र में चार प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य शामिल थे:

  • संवृद्धि (Growth): इसका अर्थ देश में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन क्षमता को बढ़ाना है। अर्थशास्त्र में आर्थिक संवृद्धि का सबसे प्रामाणिक सूचक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर वृद्धि को माना जाता है।
  • आधुनिकीकरण (Modernization): उत्पादकता बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और आधुनिक विचारों को अपनाना। इसका उद्देश्य सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव लाना भी था, जैसे महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और अवसर देना।
  • आत्मनिर्भरता (Self-reliance): प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में उन चीज़ों के आयात से बचने पर जोर दिया गया जिनका उत्पादन देश में संभव था, ताकि नीतियों में किसी भी प्रकार के विदेशी हस्तक्षेप को रोका जा सके।
  • समानता (Equity): केवल आर्थिक संवृद्धि और आधुनिकीकरण तब तक अधूरे हैं जब तक उनके लाभ देश के निर्धन वर्ग तक न पहुँचें। समानता का लक्ष्य हर भारतीय को भोजन, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित कराना था।

पी.सी. महालनोबिस (भारतीय योजनाओं के निर्माता)

भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना का पूरा ढांचा प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् प्रशांत चन्द्र महालनोबिस के विचारों पर आधारित था। 1893 में कोलकाता में जन्मे महालनोबिस को भारतीय नियोजन का वास्तुकार माना जाता है। उन्होंने कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना की और ‘सांख्य’ नामक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त जर्नल की शुरुआत की।


कृषि क्षेत्र में सुधार: भू-सुधार और हरित क्रांति

क) भू-सुधार (Land Reforms): आजादी के समय जमींदारों और जागीरदारों का वर्चस्व था जो कृषकों का शोषण करते थे। सरकार ने बिचौलियों का उन्मूलन किया, जिससे लगभग 200 लाख काश्तकारों का सरकार से सीधा संपर्क हुआ। इसके साथ ही ‘भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारण‘ (Land Ceiling) कानून लागू किया गया, ताकि कोई भी व्यक्ति एक निश्चित सीमा से अधिक कृषि भूमि न रख सके। राजनीतिक प्रतिबद्धता के कारण यह नीति केरल और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक सफल रही।

ख) हरित क्रांति (Green Revolution) : 1960 के दशक के मध्य में भारतीय कृषि में तकनीकी युग की शुरुआत हुई, जिसे ‘हरित क्रांति’ कहा जाता है। इसके तहत उच्च पैदावार वाली किस्मों के बीजों (HYV), उर्वरकों, कीटनाशकों और उन्नत सिंचाई सुविधाओं का उपयोग किया गया, जिससे गेहूँ और चावल के उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि हुई।

  • प्रथम चरण (1960 मध्य – 1970 मध्य): यह केवल पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे समृद्ध राज्यों तथा मुख्य रूप से गेहूँ की फसल तक सीमित रहा।
  • द्वितीय चरण (1970 मध्य – 1980 मध्य): इसका विस्तार देश के कई अन्य राज्यों और विभिन्न फसलों तक हुआ।
  • विपणित अधिशेष (Marketed Surplus): किसानों द्वारा स्वयं के उपभोग के बाद बाज़ार में बेचे गए अतिरिक्त अनाज को विपणित अधिशेष कहा गया। इससे खाद्यान्न की कीमतें कम हुईं, जिससे गरीब वर्ग को लाभ मिला और सरकार एक बड़ा सुरक्षित भंडार (Buffer Stock) बनाने में सफल रही।

औद्योगिक विकास और व्यापार नीति (1950-1990)

विकासशील भारत के समग्र विकास और रोजगार सृजन के लिए औद्योगिक क्षेत्र को मजबूत करना अनिवार्य था। इसके लिए निम्नलिखित रणनीतियाँ अपनाई गईं:

क) औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 (IPR 1956): इस प्रस्ताव को द्वितीय पंचवर्षीय योजना का आधार बनाया गया, जिसके तहत उद्योगों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया:

  • प्रथम वर्ग: पूर्ण रूप से सरकारी स्वामित्व वाले उद्योग।
  • द्वितीय वर्ग: सरकारी और निजी दोनों के सहयोग वाले उद्योग (लेकिन नई इकाइयाँ केवल सरकार खोल सकती थी)।
  • तृतीय वर्ग: निजी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उद्योग।
  • परमिट-लाइसेंस राज: निजी क्षेत्र को कड़े नियंत्रण में रखने के लिए लाइसेंस पद्धति अनिवार्य की गई। पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर लाइसेंस आसानी से मिलता था और करों में छूट व सस्ती बिजली दी जाती थी, ताकि क्षेत्रीय समानता को बढ़ावा मिले।

ख) लघु उद्योग और कर्वे समिति (1955) : वर्ष 1955 में गठित कर्वे समिति (ग्राम तथा लघु उद्योग समिति) ने ग्रामीण विकास के लिए लघु उद्योगों के महत्व को रेखांकित किया। लघु उद्योग बड़े पैमाने के उद्योगों की तुलना में अधिक श्रम-प्रधान (Labor-intensive) होते हैं, जिससे भारी मात्रा में रोजगार का सृजन होता है। 1950 में इसमें अधिकतम निवेश की सीमा 5 लाख रुपये थी जो बाद में बढ़कर 1 करोड़ रुपये तक कर दी गई।

ग) व्यापार नीति: आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) : प्रथम सात योजनाओं के दौरान भारत ने अंतर्मुखी व्यापार नीति अपनाई, जिसे ‘आयात प्रतिस्थापन’ कहा जाता है। इसका उद्देश्य विदेशों से आने वाली वस्तुओं के स्थान पर उनका घरेलू उद्योगों में ही उत्पादन करना था। घरेलू उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए सरकार ने दो हथियारों का उपयोग किया:

  • प्रशुल्क (Tariffs): आयातित वस्तुओं पर भारी कर लगाना ताकि वे महँगी हो जाएं।
  • कोटा (Quotas): आयात की जाने वाली वस्तुओं की अधिकतम मात्रा या भौतिक सीमा तय करना।

सफलताएँ (Achievements)

  • जीडीपी में औद्योगिक हिस्सेदारी: देश के जीडीपी में उद्योगों का योगदान 1950-51 के 13% से बढ़कर 1990-91 में 24.6% हो गया।
  • औद्योगिक संवृद्धि दर: इस अवधि के दौरान औद्योगिक क्षेत्रक ने 6% वार्षिक संवृद्धि दर हासिल की, जो काफी सराहनीय थी।
  • विविधीकरण: भारतीय उद्योग केवल सूती वस्त्र और जूट तक सीमित न रहकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे नए क्षेत्रों में भी फैल गए।

कमियाँ (Failures)

  • व्यावसायिक ढाँचे की विफलता: जीडीपी में कृषि का योगदान तो कम हुआ, लेकिन कृषि पर निर्भर जनसंख्या का अनुपात खास कम नहीं हुआ (1950 के 67.5% से घटकर 1990 में यह केवल 64.9% ही हो पाया)। उद्योग और सेवा क्षेत्र कृषि के अतिरिक्त श्रम को रोजगार देने में विफल रहे।
  • लाइसेंस राज का दुरुपयोग: बड़े औद्योगिक घरानों ने नए प्रतिस्पर्धियों को बाज़ार में आने से रोकने के लिए लाइसेंस नीति का दुरुपयोग किया। उत्पादक तकनीक सुधारने के बजाय मंत्रालयों में लॉबिंग करने में समय बिताने लगे।
  • सार्वजनिक क्षेत्र का नुकसान: प्रतिस्पर्धा न होने के कारण सरकारी उपक्रम (जैसे दूरसंचार) अक्षम हो गए। सरकार मॉडर्न ब्रेड और होटल चलाने जैसे गैर-जरूरी कार्यों में भी संसाधन अटकाए बैठी रही, जिससे भारी नुकसान हुआ。
  • गुणवत्ता में गिरावट: आयात पर कड़े प्रतिबंधों के कारण घरेलू उत्पादकों को एक ‘सुरक्षित बाज़ार’ मिल गया था, जिससे उपभोक्ताओं को महँगी और घटिया वस्तुएँ खरीदने पर मजबूर होना पड़ा।

निष्कर्ष

1950 से 1990 के कालखंड ने भारत को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया और एक मजबूत औद्योगिक आधार दिया। लेकिन अतिशय सरकारी नियंत्रण, लालफीताशाही और प्रतिस्पर्धा के अभाव ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को धीमा कर दिया। इसी पृष्ठभूमि और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के कारण अंततः भारत सरकार को वर्ष 1991 में ‘नई आर्थिक नीति‘ (LPG Policy) लागू करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था के आधुनिक स्वरूप की नींव रखी।

भाग 1: आर्थिक प्रणालियाँ और भारतीय योजना का परिचय

  1. प्रश्न: भारत किस तिथि को स्वतंत्र हुआ और उसके बाद नव-निर्माण का कार्य भारतीयों के हाथों में आया?
    उत्तर: 15 अगस्त, 1947।
  2. प्रश्न: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को कौन-सा आर्थिक प्रतिमान सबसे अच्छा लगा था?
    उत्तर: समाजवाद।
  3. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारत के नेताओं ने पूँजीवाद और समाजवाद के अतिवादी विकल्पों के स्थान पर कौन-सी आर्थिक प्रणाली चुनी?
    उत्तर: मिश्रित अर्थव्यवस्था।
  4. प्रश्न: भारत में योजना बनाने के लिए ‘योजना आयोग’ की स्थापना कब की गई थी?
    उत्तर: वर्ष 1950 में।
  5. प्रश्न: योजना आयोग का अध्यक्ष कौन होता था?
    उत्तर: भारत के प्रधानमंत्री।
  6. प्रश्न: प्रत्येक समाज को किन तीन बुनियादी आर्थिक प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं?
    उत्तर: (i) किन वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जाए? (ii) वस्तुएँ और सेवाएँ किस प्रकार उत्पादित की जाएँ? (iii) उत्पादित वस्तुओं का वितरण किस प्रकार किया जाए?
  7. प्रश्न: किस अर्थव्यवस्था में उत्पादन और वितरण का निर्णय पूरी तरह बाज़ार की शक्तियों (माँग और पूर्ति) पर निर्भर करता है?
    उत्तर: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था (बाज़ार अर्थव्यवस्था)।
  8. प्रश्न: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं का वितरण मुख्य रूप से किस आधार पर होता है?
    उत्तर: व्यक्तियों की क्रय-क्षमता (खरीदने की क्षमता) पर।
  9. प्रश्न: समाजवादी समाज में वस्तुओं के उत्पादन और वितरण से संबंधित सभी निर्णय किसके द्वारा लिए जाते हैं?
    उत्तर: सरकार द्वारा।
  10. प्रश्न: समाजवाद में वस्तुओं का वितरण किस आधार पर माना जाता है?
    उत्तर: लोगों की आवश्यकता के आधार पर।
  11. प्रश्न: किन दो देशों को मुख्य रूप से समाजवादी आर्थिक गतिविधियों के उदाहरण के रूप में पाठ में उद्धृत किया गया है?
    उत्तर: चीन और क्यूबा।
  12. प्रश्न: मिश्रित अर्थव्यवस्था में बाज़ार और सरकार की क्या भूमिकाएँ होती हैं?
    उत्तर: बाज़ार उन वस्तुओं को सुलभ कराता है जिनका वह अच्छा उत्पादन कर सकता है और सरकार उन आवश्यक वस्तुओं को सुलभ कराती है जिन्हें बाज़ार सुलभ कराने में विफल रहता है।
  13. प्रश्न: ‘परिप्रेक्ष्यात्मक योजना’ (Perspective Plan) से क्या अभिप्राय है?
    उत्तर: एक दीर्घकालिक योजना जो आगामी 20 वर्षों में प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्यों को दर्शाती है।
  14. प्रश्न: भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की शब्दावली और अवधारणा किस देश से ली गई थी?
    उत्तर: पूर्व सोवियत संघ (USSR)।
  15. प्रश्न: भारत की पंचवर्षीय योजनाएँ किस वर्ष तक प्रलेखों के माध्यम से चलती रहीं?
    उत्तर: वर्ष 2017 तक।

भाग 2: पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्य

  1. प्रश्न: भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के चार मुख्य लक्ष्य क्या थे?
    उत्तर: संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और समानता।
  2. प्रश्न: ‘संवृद्धि’ (Growth) का अर्थशास्त्र की भाषा में क्या अर्थ है?
    उत्तर: देश में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन क्षमता में वृद्धि।
  3. प्रश्न: आर्थिक संवृद्धि का सबसे प्रामाणिक सूचक किसे माना जाता है?
    उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी. / GDP) में निरंतर वृद्धि।
  4. प्रश्न: सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की परिभाषा क्या है?
    उत्तर: एक वर्ष की अवधि में देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का बाज़ार मूल्य।
  5. प्रश्न: अर्थव्यवस्था का ढाँचा किन तीन क्षेत्रकों के योगदान से तैयार होता है?
    उत्तर: कृषि क्षेत्रक, औद्योगिक क्षेत्रक और सेवा क्षेत्रक।
  6. प्रश्न: वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी को अपनाना क्या कहलाता है?
    उत्तर: आधुनिकीकरण।
  7. प्रश्न: आधुनिकीकरण का सामाजिक दृष्टिकोण से क्या उद्देश्य है?
    उत्तर: सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना, जैसे महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देना।
  8. प्रश्न: भारत की प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में ‘आत्मनिर्भरता’ का क्या अर्थ था?
    उत्तर: उन चीज़ों के आयात से बचना जिनका देश में ही उत्पादन संभव था।
  9. प्रश्न: स्वतंत्रता के बाद भारत के लिए खाद्यान्न में आत्मनिर्भर होना क्यों आवश्यक समझा गया?
    उत्तर: विदेशी निर्भरता कम करने और देश की संप्रभुता में विदेशी हस्तक्षेप को रोकने के लिए।
  10. प्रश्न: योजना के लक्ष्य के रूप में ‘समानता’ (Equity) क्यों आवश्यक है?
    उत्तर: ताकि आर्थिक समृद्धि के लाभ देश के निर्धन वर्ग को भी सुलभ हों और मूलभूत आवश्यकताएँ पूरी हो सकें।
  11. प्रश्न: ‘भारतीय योजनाओं के निर्माता’ के रूप में किसे जाना जाता है?
    उत्तर: सांख्यिकीविद् प्रशांत चन्द्र महालनोबिस (P.C. Mahalanobis)।
  12. प्रश्न: भारत की कौन-सी पंचवर्षीय योजना महालनोबिस के विचारों पर आधारित थी?
    उत्तर: द्वितीय पंचवर्षीय योजना।
  13. प्रश्न: पी.सी. महालनोबिस ने कोलकाता में किस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना की थी?
    उत्तर: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI)।
  14. प्रश्न: पी.सी. महालनोबिस द्वारा शुरू किए गए प्रतिष्ठित सांख्यिकीय जर्नल का नाम क्या है?
    उत्तर: ‘सांख्य’ (Sankhya)।
  15. प्रश्न: पी.सी. महालनोबिस को ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी का फेलो किस वर्ष बनाया गया था?
    उत्तर: वर्ष 1945 में।

भाग 3: कृषि क्षेत्रक एवं भू-सुधार

  1. प्रश्न: स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आश्रित थी?
    उत्तर: 75 प्रतिशत।
  2. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारत में किस प्रकार की भू-धारण पद्धति का वर्चस्व था जो केवल लगान वसूली करती थी?
    उत्तर: जमींदारी और जागीरदारी प्रथा।
  3. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय कृषि की निम्न उत्पादकता के कारण भारत को किस देश से अनाज का आयात करना पड़ा था?
    उत्तर: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)।
  4. प्रश्न: कृषि में समानता लाने के लिए मुख्य रूप से किस नीति की आवश्यकता हुई जिसका ध्येय जोतों के स्वामित्व में परिवर्तन था?
    उत्तर: भू-सुधार (Land Reforms)।
  5. प्रश्न: ‘किसान को भूमि’ नीति किस विचारधारा पर आधारित है?
    उत्तर: यदि किसानों को भूमि का स्वामी बना दिया जाए, तो वे उत्पादन बढ़ाने में अधिक रुचि और प्रेरणा लेंगे।
  6. प्रश्न: स्वतंत्रता के बाद सरकार ने बिचौलियों के उन्मूलन से लगभग कितने काश्तकारों को जमींदारों के शोषण से मुक्त कराया?
    उत्तर: लगभग 200 लाख काश्तकारों को।
  7. प्रश्न: ‘भूमि की अधिकतम सीमा निर्धारण’ (Land Ceiling) कानून का क्या अर्थ है?
    उत्तर: किसी व्यक्ति की कृषि भूमि के स्वामित्व की अधिकतम सीमा तय करना, ताकि भू-स्वामित्व का संकेंद्रण कम हो।
  8. प्रश्न: बड़े जमींदारों ने भूमि सीमा निर्धारण कानून को कहाँ चुनौती दी जिससे इसे लागू करने में देरी हुई?
    उत्तर: न्यायालयों में।
  9. प्रश्न: भारत के किन दो राज्यों की सरकारें वास्तविक किसान को भूमि देने की नीति के प्रति अत्यधिक प्रतिबद्ध थीं, जिससे वहाँ भू-सुधार सफल रहा?
    उत्तर: केरल और पश्चिम बंगाल।
  10. प्रश्न: भू-सुधारों से समाज के किस वर्ग को कोई विशेष लाभ नहीं मिल पाया?
    उत्तर: निर्धनतम कृषि श्रमिकों (जैसे बटाईदार और भूमिहीन श्रमिक) को।

भाग 4: हरित क्रांति और कृषि सहायिकी (Subsidies)

  1. प्रश्न: भारतीय कृषि मुख्य रूप से किस पर निर्भर है, जिसके न होने से सिंचाई के अभाव में किसानों को भारी कठिनाई होती थी?
    उत्तर: मानसून पर।
  2. प्रश्न: ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) का क्या तात्पर्य है?
    उत्तर: उच्च पैदावार वाली किस्मों के बीजों (HYV) के प्रयोग से मुख्य रूप से गेहूँ और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि।
  3. प्रश्न: HYV का पूर्ण रूप क्या है?
    उत्तर: High Yielding Varieties (उच्च पैदावार वाली किस्में)।
  4. प्रश्न: HYV बीजों के सफल प्रयोग के लिए किन अन्य आगतों (inputs) की आवश्यकता अनिवार्य थी?
    उत्तर: पर्याप्त उर्वरक, कीटनाशक और निश्चित जल पूर्ति (सिंचाई)।
  5. प्रश्न: हरित क्रांति का प्रथम चरण किस समयावधि तक माना जाता है?
    उत्तर: 1960 के दशक के मध्य से 1970 के दशक के मध्य तक।
  6. प्रश्न: हरित क्रांति के पहले चरण में HYV बीजों का प्रयोग किन समृद्ध राज्यों तक ही सीमित रहा?
    उत्तर: पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु।
  7. प्रश्न: हरित क्रांति के पहले चरण में मुख्य रूप से किस फसल को लाभ मिला?
    उत्तर: गेहूँ।
  8. प्रश्न: हरित क्रांति का द्वितीय चरण कब से कब तक रहा, जिसमें प्रौद्योगिकी का विस्तार कई राज्यों और फसलों तक पहुँचा?
    उत्तर: 1970 के दशक के मध्य से 1980 के दशक के मध्य तक।
  9. प्रश्न: ‘विपणित अधिशेष’ (Marketed Surplus) से क्या अभिप्राय है?
    उत्तर: किसानों द्वारा स्वयं के उपभोग से अधिक उत्पादित अनाज का वह अंश जो बाज़ार में बेचा जाता है।
  10. प्रश्न: हरित क्रांति के कारण खाद्यान्नों की कीमतों में कमी आने से किस वर्ग को सबसे अधिक लाभ हुआ?
    उत्तर: निम्न आय वर्ग को (जो अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं)।
  11. प्रश्न: हरित क्रांति के कारण सरकार को क्या लाभ हुआ जो कमी के समय काम आता है?
    उत्तर: सरकार खाद्यान्नों का ‘सुरक्षित स्टॉक’ (Buffer Stock) बनाने में समर्थ हुई।
  12. प्रश्न: हरित क्रांति प्रौद्योगिकी में छोटे और बड़े किसानों के संदर्भ में क्या बड़ा जोखिम था?
    उत्तर: छोटे और बड़े किसानों के बीच असमानता बढ़ने का जोखिम क्योंकि इन आगतों को खरीदना महँगा था।
  13. प्रश्न: सरकार ने छोटे किसानों को इस जोखिम से बचाने के लिए क्या उपाय किए?
    उत्तर: निम्न ब्याज दर पर ऋण दिया और उर्वरकों पर आर्थिक सहायता (सहायिकी) प्रदान की।
  14. प्रश्न: अर्थशास्त्र में ‘सहायिकी’ (Subsidy) का क्या उद्देश्य होता है?
    उत्तर: उत्पादक कार्यों के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली मौद्रिक सहायता ताकि नई तकनीक को प्रोत्साहन मिले।
  15. प्रश्न: कुछ अर्थशास्त्री कृषि सहायिकी को धीरे-धीरे समाप्त करने के पक्ष में क्या तर्क देते हैं?
    उत्तर: उनका तर्क है कि तकनीक स्थापित होने के बाद इसका लाभ बड़े किसानों और उर्वरक उद्योगों को मिलता है, जिससे सरकारी कोष पर अनावश्यक बोझ पड़ता है।
  16. प्रश्न: सहायिकी जारी रखने के पक्षधर विशेषज्ञों का क्या तर्क है?
    उत्तर: भारत में कृषि एक जोखिम भरा व्यवसाय है, अधिकांश किसान गरीब हैं और सहायिकी बंद करने से अमीर-गरीब की असमानता बढ़ेगी।
  17. प्रश्न: बाज़ार में कीमतें किस बात का संकेतक होती हैं?
    उत्तर: वस्तुओं की उपलब्धता या दुर्लभता का।
  18. प्रश्न: वर्ष 1950 में भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या कृषि में कार्यरत थी?
    उत्तर: 67.50 प्रतिशत।
  19. प्रश्न: वर्ष 1990 तक कृषि पर निर्भर जनसंख्या घटकर कितनी हो पाई थी?
    उत्तर: 64.90 प्रतिशत।
  20. प्रश्न: 1950 से 1990 के बीच GDP में कृषि के अंशदान में भारी कमी आई, पर उस पर निर्भर जनसंख्या में कमी न आने का क्या मुख्य कारण था?
    उत्तर: उद्योग और सेवा क्षेत्रक कृषि के अतिरिक्त श्रम को अपने यहाँ नहीं खपा पाए।

भाग 5: औद्योगिक विकास एवं सार्वजनिक क्षेत्रक की भूमिका

  1. प्रश्न: अर्थशास्त्रियों के अनुसार निर्धन राष्ट्र तभी प्रगति कर पाते हैं जब उनमें कौन-सा क्षेत्रक सुदृढ़ हो?
    उत्तर: औद्योगिक क्षेत्रक।
  2. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारत के अधिकांश उद्योग मुख्य रूप से किन क्षेत्रों तक सीमित थे?
    उत्तर: सूती वस्त्र और पटसन (जूट) उद्योग।
  3. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारत में लोहा व इस्पात की सुप्रबंधित फर्में कहाँ स्थित थीं?
    उत्तर: जमशेदपुर और कोलकाता में।
  4. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय निजी उद्योगपतियों के पास निवेश के लिए किसकी कमी थी?
    उत्तर: अपेक्षित पूँजी की।
  5. प्रश्न: भारतीय अर्थव्यवस्था को समाजवाद के पथ पर अग्रसर करने के लिए बड़े उद्योगों का नियंत्रण किसे सौंपा गया?
    उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्रक (सरकार) को।
  6. प्रश्न: द्वितीय पंचवर्षीय योजना का मुख्य आधार किस औद्योगिक नीति को बनाया गया था?
    उत्तर: औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 (IPR 1956)।
  7. प्रश्न: औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 के अंतर्गत उद्योगों को कितने वर्गों में वर्गीकृत किया गया था?
    उत्तर: तीन वर्गों में।
  8. प्रश्न: IPR 1956 के प्रथम वर्ग में कौन-से उद्योग शामिल थे?
    उत्तर: वे उद्योग जिन पर सरकार का अनन्य स्वामित्व था।
  9. प्रश्न: IPR 1956 के द्वितीय वर्ग के उद्योगों की क्या विशेषता थी?
    उत्तर: जिनमें निजी क्षेत्रक, सरकार के साथ मिलकर प्रयास कर सकते थे, परंतु नई इकाइयों की स्थापना की जिम्मेदारी केवल राज्य की थी।
  10. प्रश्न: निजी क्षेत्रक के उद्योगों को सरकार के नियंत्रण में रखने के लिए किस पद्धति का प्रयोग किया गया?
    उत्तर: लाइसेंस पद्धति (Permit-Licensure Raj)।
  11. प्रश्न: पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लाइसेंस नीति का उपयोग कैसे किया गया?
    उत्तर: पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर लाइसेंस आसानी से दिया जाता था और कर लाभ व सस्ती बिजली दी जाती थी।
  12. प्रश्न: उद्योगों को स्थापित करने के अलावा वर्तमान उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने या विविधीकरण के लिए भी क्या अनिवार्य था?
    उत्तर: सरकारी लाइसेंस प्राप्त करना।
  13. प्रश्न: बड़े उद्योगपतियों द्वारा लाइसेंस पद्धति का क्या दुरुपयोग किया गया?
    उत्तर: वे नई फर्म शुरू करने के लिए नहीं, बल्कि नए प्रतिस्पर्धियों को रोकने के लिए लाइसेंस बुक करा लेते थे।
  14. प्रश्न: परमिट लाइसेंस राज के अत्यधिक नियमन का भारतीय उद्योगों पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ा?
    उत्तर: उद्योगपति उत्पादन सुधारने के स्थान पर मंत्रालयों में लॉबिंग करने और लाइसेंस प्राप्त करने में समय व्यतीत करने लगे, जिससे कुशलता कम हुई।
  15. प्रश्न: कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की किस आधार पर आलोचना की जाती है?
    उत्तर: उन्होंने उन गैर-जरूरी वस्तुओं (जैसे मॉडर्न ब्रेड, होटल आदि) का भी उत्पादन जारी रखा जो निजी क्षेत्रक आसानी से बना सकता था।

भाग 6: लघु उद्योग (Small Scale Industries)

  1. प्रश्न: वर्ष 1955 में ग्राम तथा लघु उद्योग समिति का गठन किया गया था, इसे और किस नाम से जाना जाता है?
    उत्तर: कर्वे समिति (Karve Committee)।
  2. प्रश्न: लघु उद्योग की परिभाषा मुख्य रूप से किस संदर्भ में दी जाती है?
    उत्तर: किसी इकाई की परिसंपत्तियों के लिए किए जाने वाले अधिकतम निवेश के संदर्भ में।
  3. प्रश्न: वर्ष 1950 में एक लघु औद्योगिक इकाई के लिए निवेश की अधिकतम सीमा क्या थी?
    उत्तर: पाँच लाख रुपये।
  4. प्रश्न: वर्तमान समय (पाठ्यपुस्तक के अनुसार) लघु उद्योगों में निवेश की अधिकतम सीमा बढ़ाकर कितनी की गई है?
    उत्तर: एक करोड़ रुपये।
  5. प्रश्न: बड़े उद्योगों की तुलना में लघु उद्योगों की क्या प्रमुख विशेषता होती है जो रोजगार बढ़ाती है?
    उत्तर: ये अधिक श्रम-प्रधान (Labor-intensive) होते हैं।
  6. प्रश्न: लघु उद्योगों को बड़ी फर्मों की प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए?
    उत्तर: अनेक उत्पादों को लघु उद्योगों के लिए आरक्षित कर दिया गया।
  7. प्रश्न: लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय स्तर पर क्या रियायतें दी गई थीं?
    उत्तर: कम उत्पाद शुल्क (Excise duty) और कम ब्याज दरों पर बैंक ऋण।

भाग 7: व्यापार नीति: आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)

  1. प्रश्न: भारत की प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं में व्यापार नीति की मुख्य विशेषता क्या थी?
    उत्तर: अंतर्मुखी व्यापार नीति (Inward Looking Trade Strategy)।
  2. प्रश्न: तकनीकी रूप से अंतर्मुखी व्यापार नीति को किस नाम से जाना जाता है?
    उत्तर: आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution)।
  3. प्रश्न: ‘आयात प्रतिस्थापन’ की नीति का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    उत्तर: विदेशों से आयात की जाने वाली वस्तुओं के बदले उनका घरेलू उद्योगों द्वारा देश में ही उत्पादन करना।
  4. प्रश्न: सरकार ने विदेशी प्रतिस्पर्धा से घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए किन दो प्रमुख साधनों का प्रयोग किया?
    उत्तर: प्रशुल्क (Tariffs) और कोटा (Quotas)।
  5. प्रश्न: ‘प्रशुल्क’ (Tariff) से क्या अभिप्राय है?
    उत्तर: आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर, जिससे वे महँगी हो जाती हैं और उनका आयात हतोत्साहित होता है।
  6. प्रश्न: ‘कोटा’ (Quota) का व्यापार नीति में क्या अर्थ है?
    उत्तर: आयात की जा सकने वाली वस्तुओं की मात्रा की अधिकतम सीमा निर्दिष्ट करना।
  7. प्रश्न: संरक्षण की नीति किस मूल धारणा पर आधारित थी?
    उत्तर: विकासशील देशों के नए उद्योग विकसित देशों के स्थापित उद्योगों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में नहीं थे।
  8. प्रश्न: योजनाकारों को यह भी आशंका थी कि यदि आयातों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया तो विदेशी मुद्रा किस पर खर्च हो जाएगी?
    उत्तर: विलासिता की वस्तुओं के आयात पर।
  9. प्रश्न: भारत में किस दशक के मध्य तक ‘निर्यात-संवर्धन’ (Export Promotion) पर कोई गंभीर विचार नहीं किया गया था?
    उत्तर: 1980 के दशक के मध्य तक।
  10. प्रश्न: अत्यधिक और लंबे समय तक संरक्षण की नीति का भारतीय उपभोक्ताओं पर क्या प्रतिकूल प्रभाव पड़ा?
    उत्तर: उपभोक्ताओं को मजबूरन घरेलू उत्पादकों द्वारा निर्मित कम गुणवत्ता वाली महँगी वस्तुएँ खरीदनी पड़ती थीं।
  11. प्रश्न: घरेलू उत्पादकों को वस्तुओं की गुणवत्ता सुधारने की प्रेरणा क्यों नहीं मिलती थी?
    उत्तर: क्योंकि उन्हें पता था कि बाज़ार पूरी तरह उनके लिए सुरक्षित (आबद्ध बाज़ार) है और कोई विदेशी प्रतिस्पर्धा नहीं है।

भाग 8: संरचनात्मक परिवर्तन, जी.डी.पी.

  1. प्रश्न: किसी देश के विकास के साथ-साथ उसकी अर्थव्यवस्था के ढाँचे में आने वाले बदलाव को क्या कहते हैं?
    उत्तर: संरचनात्मक परिवर्तन (Structural Change)।
  2. प्रश्न: सामान्यतः विकास की प्रक्रिया के साथ सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में किस क्षेत्रक का अंश कम होता जाता है?
    उत्तर: कृषि क्षेत्रक का।
  3. प्रश्न: विकास के उच्चतर स्तर पर पहुँचने पर जी.डी.पी. में किस क्षेत्रक का अंशदान सर्वाधिक हो जाता है?
    उत्तर: सेवा क्षेत्रक (Service Sector) का।
  4. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय (1950-51) भारत के जी.डी.पी. में कृषि का अंश कितने प्रतिशत से अधिक था?
    उत्तर: 50 प्रतिशत से अधिक (वास्तविक आँकड़ा 59.0 प्रतिशत)।
  5. प्रश्न: औद्योगिक क्षेत्रक द्वारा प्रदत्त जी.डी.पी. का अनुपात 1950-51 के 13 प्रतिशत से बढ़कर 1990-91 में कितने प्रतिशत हो गया था?
    उत्तर: 24.6 प्रतिशत।
  6. प्रश्न: वर्ष 1990 में भारत के सेवा क्षेत्रक का जी.डी.पी. में योगदान बढ़कर कितने प्रतिशत हो गया था, जो कि एक गरीब देश के लिए विचित्र था?
    उत्तर: 40.59 प्रतिशत (या लगभग 40.5%)।
  7. प्रश्न: प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान औद्योगिक क्षेत्रक की वार्षिक संवृद्धि दर कितने प्रतिशत रही जो काफी प्रशंसनीय थी?
    उत्तर: 6 प्रतिशत वार्षिक।
  8. प्रश्न: विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण के कारण भारत में किन दो प्रमुख नए औद्योगिक क्षेत्रकों का विकास संभव हो पाया?
    उत्तर: इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रक।
  9. प्रश्न: किस सरकारी स्वामित्व वाली ब्रेड विनिर्माण फर्म को वर्ष 2001 में निजी क्षेत्रक को बेच दिया गया था?
    उत्तर: मॉडर्न ब्रेड (Modern Food Industries)।
  10. प्रश्न: 1990 के दशक के अंत तक एकाधिकार और प्रतिस्पर्धा न होने के कारण किस सेवा के लिए लोगों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती थी?
    उत्तर: टेलीफोन कनेक्शन (दूरसंचार सेवा)।
  11. प्रश्न: कुछ अर्थशास्त्रियों के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्रक की फर्मों का मूल्यांकन लाभ के बजाय किस आधार पर किया जाना चाहिए?
    उत्तर: जन-कल्याण (जनता के कल्याण) को बढ़ावा देने के आधार पर।
  12. प्रश्न: प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं की अंतर्मुखी नीतियों के कारण भारत किस क्षेत्र में एक सशक्त आधार विकसित करने में विफल रहा?
    उत्तर: एक सशक्त निर्यात क्षेत्रक (Export Sector) विकसित करने में।
  13. प्रश्न: इन सभी ढाँचेगत समस्याओं और बाहरी बदलावों को देखते हुए सरकार ने किस वर्ष ‘नई आर्थिक नीति’ (New Economic Policy) प्रारंभ की?
    उत्तर: वर्ष 1991 में।
  14. प्रश्न: प्रथम सात पंचवर्षीय योजनाओं की सबसे बड़ी गौरवपूर्ण उपलब्धि कृषि क्षेत्र में क्या रही?
    उत्तर: हरित क्रांति के फलस्वरूप भारत का खाद्यान्न उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना।
  15. प्रश्न: भूमि सुधारों का ग्रामीण भारत में सबसे बड़ा सामाजिक परिणाम क्या हुआ?
    उत्तर: घृणित जमींदारी प्रथा का पूर्ण उन्मूलन।
  16. प्रश्न: भारत के व्यावसायिक ढाँचे में वर्ष 1950-51 में कृषि क्षेत्र में कितने प्रतिशत लोग कार्यरत थे?
    उत्तर: 70.1 प्रतिशत।
  17. प्रश्न: वर्ष 1990-91 में भारत के व्यावसायिक ढाँचे में सेवा क्षेत्रक में काम करने वाले लोगों का प्रतिशत कितना था?
    उत्तर: 20.5 प्रतिशत।

भाग 9: मिलान और परिभाषाओं पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. प्रश्न: योजना आयोग के अध्यक्ष के रूप में किसे सुमेलित किया जाता है?
    उत्तर: प्रधानमंत्री।
  2. प्रश्न: ‘सकल घरेलू उत्पाद’ को मौद्रिक मूल्य के रूप में कैसे परिभाषित करते हैं?
    उत्तर: किसी अर्थव्यवस्था में एक वर्ष में उत्पादित की गई सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य।
  3. प्रश्न: व्यापार सुरक्षा के अंतर्गत ‘कोटा’ का क्या अर्थ है?
    उत्तर: आयात की जा सकने वाली वस्तुओं की मात्रा की भौतिक सीमा।
  4. प्रश्न: ‘भूमि-सुधार’ का मुख्य उद्देश्य क्या था?
    उत्तर: कृषि क्षेत्र की उत्पादकता और समता में वृद्धि के लिए जोतों के स्वामित्व में किए गए सुधार।
  5. प्रश्न: ‘उच्च उत्पादकता वाले बीज’ (HYV) की प्रमुख विशेषता क्या है?
    उत्तर: सामान्य बीजों की तुलना में अधिक अनुपात में खाद्यान्न उत्पादन देने वाले बीज।
  6. प्रश्न: ‘सहायिकी’ को सरकार द्वारा दिए जाने वाले किस रूप में सुमेलित किया जाता है?
    उत्तर: उत्पादक कार्यों के लिए सरकार द्वारा दी गई आर्थिक/मौद्रिक सहायता।
  7. प्रश्न: 1950-1990 के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या नाम दिया जा सकता है जिसमें निजी और सार्वजनिक दोनों का अस्तित्व था?
    उत्तर: नियमित मिश्रित अर्थव्यवस्था।
  8. प्रश्न: द्वितीय पंचवर्षीय योजना में किस प्रकार के उद्योगों पर सरकार ने पूर्ण नियंत्रण का निर्णय लिया था?
    उत्तर: भारी एवं बुनियादी उद्योगों पर।
  9. प्रश्न: आयात प्रतिस्थापन का सीधा प्रभाव किस पर पड़ता है?
    उत्तर: विदेशी वस्तुओं के आयात में कमी आती है और घरेलू विनिर्माण बढ़ता है।
  10. प्रश्न: ‘ Basic economics: A Citizen’s Guide to the Economy’ के लेखक कौन हैं?
    उत्तर: थॉमस सोवेल (Thomas Sowell)।

भाग 10: अति-महत्वपूर्ण अतिरिक्त वस्तुनिष्ठ प्रश्न

  1. प्रश्न: योजना प्रलेखों के अनुसार ‘दीर्घकालिक लक्ष्यों’ को प्राप्त करने का आधार क्या प्रदान करती हैं?
    उत्तर: पंचवर्षीय योजनाएँ।
  2. प्रश्न: स्वतंत्रता के समय भारतीय कृषि की रुकी हुई स्थिति (गतिरोध) को किसने स्थायी रूप से समाप्त कर दिया?
    उत्तर: हरित क्रांति ने।
  3. प्रश्न: ‘कर्वे समिति’ का संबंध किस वर्ष से है?
    उत्तर: वर्ष 1955।
  4. प्रश्न: किस राज्य में भू-सुधारों की विफलता का मुख्य कारण राजनीतिक प्रतिबद्धता की कमी थी?
    उत्तर: केरल और पश्चिम बंगाल को छोड़कर अन्य अधिकांश प्रांतों में।
  5. प्रश्न: पूर्व सोवियत संघ में कृषि उत्पादकता कम होने का क्या मुख्य कारण केस स्टडी में बताया गया है?
    उत्तर: किसानों के पास भूमि का निजी स्वामित्व न होना जिससे कार्यकुशलता की प्रेरणा नहीं थी।
  6. प्रश्न: ‘जी.डी.पी. रूपी केक का आकार बढ़ना’ योजना के किस लक्ष्य को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है?
    उत्तर: संवृद्धि (Growth)।
  7. प्रश्न: औद्योगिक नीति प्रस्ताव, 1956 का मुख्य उद्देश्य समाज के किस स्वरूप को तैयार करना था?
    उत्तर: समाज के समाजवादी स्वरूप को।
  8. प्रश्न: प्रशुल्क लगाने का मुख्य उद्देश्य वस्तुओं को क्या बनाना होता है जिससे उनका उपभोग कम हो?
    उत्तर: महँगा बनाना।
  9. प्रश्न: भारत में 1950-1991 के बीच किस क्षेत्रक का ढाँचागत विकास सबसे विचित्र या विशिष्ट माना गया?
    उत्तर: सेवा क्षेत्रक का (जीडीपी में तीव्र वृद्धि के कारण)।
  10. प्रश्न: उद्योगों को पिछड़े क्षेत्रों की ओर आकर्षित करने के लिए सरकार क्या वित्तीय छूट देती थी?
    उत्तर: करों में लाभ (Tax concessions) तथा कम दरों पर बिजली।
  11. प्रश्न: स्वतंत्रता के बाद उद्योगों के विकास के लिए ‘अग्रणी भूमिका’ किसे सौंपी गई थी?
    उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्रक (Public Sector) को।
  12. प्रश्न: हरित क्रांति के पहले चरण में किन फसलों के उत्पादन में भारी क्षेत्रीय असमानता देखी गई थी?
    उत्तर: मुख्य रूप से गेहूँ उत्पादन में (चावल की तुलना में अधिक लाभ हुआ)।
  13. प्रश्न: ‘विपणित अधिशेष’ अधिक होने का देश की खाद्य सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ता है?
    उत्तर: बाज़ार में अनाज की उपलब्धता बढ़ती है और कीमतें नियंत्रित रहती हैं।
  14. प्रश्न: भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के द्वारा निकाले जाने वाले प्रसिद्ध जर्नल का नाम क्या है?
    उत्तर: ‘सांख्य’।
  15. प्रश्न: राष्ट्रीय नियोजन में अग्रणी देश कौन-सा था जहाँ से भारत ने प्रेरणा ली?
    उत्तर: पूर्व सोवियत संघ (USSR)।
  16. प्रश्न: विकास के प्रारंभिक चरणों में विकासशील देशों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना क्यों अनिवार्य माना जाता है?
    उत्तर: शिशु उद्योगों (Infant Industries) के संरक्षण और संवर्धन के लिए।
  17. प्रश्न: भारत में 1950 से 1990 के बीच सकल घरेलू उत्पाद में औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग कितने प्रतिशत बढ़ी?
    उत्तर: लगभग 11.6 प्रतिशत (13% से बढ़कर 24.6%)।
  18. प्रश्न: लाइसेंस राज के अंतर्गत किसी भी नई इकाई को शुरू करने के लिए किसकी पूर्व अनुमति आवश्यक थी?
    उत्तर: सरकार की।
  19. प्रश्न: ‘समानता के साथ संवृद्धि’ लक्ष्य का मूल अर्थ क्या है?
    उत्तर: आर्थिक विकास इस तरह हो कि उसका लाभ समाज के निर्धनतम व्यक्ति तक पहुँचे।
  20. प्रश्न: 1991 की नई आर्थिक नीति की पृष्ठभूमि में कौन-से मुख्य कारण उत्तरदायी थे?
    उत्तर: लाइसेंस राज की विफलता, सार्वजनिक उपक्रमों का घाटा और विदेशी मुद्रा का अभाव।
cscjalalpur, economic history of india, Green Revolution, Land Reforms, NCERT Economics Hindi Notes, padhojano, UPSSSC PET Indian Economy, औद्योगिक नीति 1956, पंचवर्षीय योजनाएं, परमिट लाइसेंस राज, पी सी महालनोबिस मॉडल, भारतीय अर्थव्यवस्था 1950 से 1990, भू सुधार, हरित क्रांति

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • “भारत में मानव पूँजी का निर्माण”
  • फूटा घड़ा’ कहानी: जब कमियाँ ही बन गईं सबसे बड़ी ताकत
  • भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास: उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण एक समीक्षा
  • भारतीय अर्थव्यवस्था: 1950-1990
  • आज़ादी के समय भारत की आर्थिक स्थिति (150 परीक्षा-विशेष प्रश्न)
  • भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास: 88 महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली
  • “तकनीक के दौर में मानसिक संतुलन: कहीं आप भी तो नहीं हो रहे हैं ‘डिजिटल एडिक्शन’ के शिकार?”
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिकी (Current Affairs)
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समसामयिकी (Current Affairs)
  • महिलाओं को पहली बार वोट देने का अधिकार कब मिला?
  • विश्व इतिहास – ७ (आधुनिकीकरण के रास्ते)
  • विश्व इतिहास – ६ (मूल निवासियों का विस्थापन एवं आधुनिकीकरण)

Useful Pages

  • Motivation
    • Quotes
    • Stories
  • September 2026 (4)
  • August 2026 (26)
  • July 2026 (2)
  • June 2026 (2)
  • May 2026 (2)
  • April 2026 (27)
  • March 2026 (3)
  • February 2026 (2)
  • January 2026 (1)
  • December 2025 (2)
  • November 2025 (59)
  • October 2025 (1)
  • August 2025 (3)
  • April 2025 (2)
  • Alternative Dispute Resolution (वैकल्पिक विवाद निस्तारण) (16)
  • BNSS (1)
  • Constitution (4)
  • Current Affairs (2)
  • ECONOMICS (5)
  • Environment (1)
  • GENERAL STUDY (27)
  • HISTORY (21)
  • Human Rights (19)
  • Land Law (भूमि विधि) (23)
  • Legal Research Methods (विधिक अनुसन्धान पद्धति) (14)
  • Media Law (2)
  • POLITY (2)
  • Professional Ethics & Court Craft (10)
  • STATIC GK (2)
  • STORIES (1)
  • Uncategorized (1)
  • प्रशासनिक विधि (14)
  • मनोविज्ञान (3)

https://kranticomputeredu.co.in

  • About Me
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Facebook
© 2026 Padho Jano | Powered by Superbs Personal Blog theme