1. परिचय और औपनिवेशिक शासन का ध्येय
- स्वतंत्र अतीत: ब्रिटिश शासन से पहले भारत की एक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था थी, जो अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला और सूती व रेशमी वस्त्रों (जैसे ढाका का मलमल) के लिए विश्व प्रसिद्ध थी।
- शोषणकारी नीतियां: ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का मुख्य उद्देश्य भारत का विकास करना नहीं, बल्कि इंग्लैंड के उद्योगों को कच्चा माल भेजना और वहाँ के तैयार माल के लिए भारत को एक विशाल बाज़ार बनाना था।
- राष्ट्रीय आय: अंग्रेजों ने कभी भारत की राष्ट्रीय आय का आकलन नहीं किया। निजी स्तर पर दादा भाई नौरोजी और डॉ. वी.के.आर.वी. राव के अनुमान महत्वपूर्ण थे, जिसके अनुसार 20वीं सदी के पूर्वार्द्ध में भारत की राष्ट्रीय आय वृद्धि दर 2% से कम और प्रतिव्यक्ति उत्पाद वृद्धि दर 0.5% थी।
2. कृषि क्षेत्रक (गतिहीनता और दुर्दशा)
- उच्च निर्भरता: देश की लगभग 85% जनसंख्या गाँवों में रहती थी और कृषि पर निर्भर थी।
- जमींदारी व्यवस्था: बंगाल प्रेसीडेंसी में लागू जमींदारी प्रथा में जमींदार सारा लाभ हड़प जाते थे और लगान वसूली की शर्तें सख्त थीं।
- पिछड़ापन: तकनीक की कमी, सिंचाई का अभाव और उर्वरकों के नगण्य प्रयोग से उत्पादकता बहुत निम्न थी।
- व्यावसायीकरण: अंग्रेजों ने खाद्यान्न के बजाय नकदी फसलों (वाणिज्यिक फसलों) को उगाने पर जोर दिया ताकि इंग्लैंड के कारखानों को कच्चा माल मिल सके।

3. औद्योगिक क्षेत्रक (वि-औद्योगीकरण)
- हस्तकला का पतन: अंग्रेजों ने भारत के सुप्रसिद्ध हस्तकला उद्योगों को व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया, जिससे भारी बेरोजगारी फैली।
- धीमा आधुनिकीकरण: 19वीं सदी के उत्तरार्द्ध में सूती (भारतीयों द्वारा, पश्चिमी भारत में) और पटसन/जूट (विदेशियों द्वारा, बंगाल में) मिलों की शुरुआत हुई।
- TISCO की स्थापना: वर्ष 1907 में जमशेदपुर में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना हुई।
- पूंजीगत उद्योगों का अभाव: मशीनों और कलपुर्जों का निर्माण करने वाले भारी उद्योगों का भारत में प्रायः अभाव ही रहा।
4. विदेशी व्यापार (ब्रिटेन का एकाधिकार)
- कच्चे माल का निर्यातक: भारत रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन जैसी प्राथमिक वस्तुओं का निर्यातक और ब्रिटेन की मशीनों व कपड़ों का आयातक बन गया।
- व्यापार पर नियंत्रण: भारत का आधे से अधिक व्यापार केवल इंग्लैंड तक सीमित था। 1869 में स्वेज नहर खुलने से यह नियंत्रण और मजबूत हो गया।
- संपत्ति का निष्कासन (Drain of Wealth): भारत को भारी ‘निर्यात अधिशेष’ (Export Surplus) मिलता था, लेकिन इसका लाभ देश को नहीं मिलता था। इस धन का उपयोग अंग्रेज अपने प्रशासनिक खर्चों, युद्धों और अदृश्य मदों के आयात के लिए करते थे।
5. जनांकिकीय परिस्थिति (गरीबी और बीमारी)
- जनगणना: भारत में पहली आधिकारिक जनगणना 1881 में हुई।
- महाविभाजन का वर्ष: वर्ष 1921 को जनांकिकीय संक्रमण का विभाजक वर्ष माना जाता है, जिसके बाद जनसंख्या में निरंतर वृद्धि हुई।
- दयनीय सूचकांक: साक्षरता दर 16% से कम (महिला साक्षरता मात्र 7%), शिशु मृत्यु दर 218 प्रति हजार (आज 28) और जीवन प्रत्याशा मात्र 32 वर्ष (आज लगभग 70 वर्ष) थी। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में संक्रामक रोगों का प्रकोप था।
6. व्यावसायिक एवं आधारिक संरचना
- व्यावसायिक ढांचा: कार्यबल का 70-75% कृषि, 10% विनिर्माण और 15-20% सेवा क्षेत्र में लगा था। पंजाब और उड़ीसा में कृषि पर निर्भरता बढ़ी, जबकि मद्रास व मुंबई में कम हुई।
- रेलों की शुरुआत: अंग्रेजों ने 1850 में भारत में रेलों की शुरुआत की, जो उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। इसने सांस्कृतिक एकता बढ़ाई लेकिन कृषि के शोषण को भी तेज किया।
- बुनियादी ढांचे का उद्देश्य: सड़कों, बंदरगाहों और महंगी तार (Telegraph) व्यवस्था का विकास केवल ब्रिटिश सेना के आवागमन, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और कच्चे माल को बंदरगाहों तक पहुँचाने के लिए किया गया था, न कि जनसामान्य की सुविधा के लिए।
विषय 1: परिचय एवं आर्थिक नीतियाँ
- “भारत हमारे साम्राज्य की धुरी है…” यह कथन किसका है?
- विक्टर एलेक्जेंडर ब्रूस (1894 में ब्रिटिश इंडिया के वायसराय)।
- ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- इंग्लैंड के उद्योगों के लिए भारत को कच्चे माल का प्रदायक बनाना।
- औपनिवेशिक शासकों की आर्थिक नीतियों का मुख्य ध्येय क्या था?
- अपने मूल देश (ब्रिटेन) के आर्थिक हितों का संरक्षण और संवर्धन।
- ब्रिटिश शासन के अंतर्गत भारत की आर्थिक स्थिति कैसी बन गई?
- कच्चे माल का निर्यातक और तैयार माल का आयातक।
- अंग्रेजी शासन की स्थापना से पूर्व भारत की अर्थव्यवस्था कैसी थी?
- स्वतंत्र अर्थव्यवस्था।
- पूर्व-ब्रिटिश काल में जनसामान्य की आजीविका का मुख्य स्रोत क्या था?
- कृषि।
- क्या औपनिवेशिक शासकों ने कभी ईमानदारी से भारत की राष्ट्रीय आय का आकलन किया?
- नहीं।
- औपनिवेशिक काल में निजी स्तर पर राष्ट्रीय आय का आकलन करने वाले प्रमुख व्यक्ति कौन थे?
- दादा भाई नौरोजी, विलियम डिग्बी, फिंडले शिराज, डॉ. वी.के.आर.वी. राव और आर.सी. देसाई।
- औपनिवेशिक काल के दौरान किसके द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय आय के अनुमान सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
- डॉ. वी.के.आर.वी. राव।
- 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत की राष्ट्रीय आय की वार्षिक संवृद्धि दर कितनी थी?
- 2 प्रतिशत से कम।
- 20वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारत की प्रतिव्यक्ति उत्पाद वृद्धि दर कितनी थी?
- मात्र आधा (0.5) प्रतिशत।
- भारत को स्वतंत्रता कब प्राप्त हुई?
- 15 अगस्त, 1947 को।
- भारत ने स्वतंत्रता के पूर्व कितने वर्षों तक ब्रिटिश शासन की अधीनता झेली?
- लगभग दो सौ (200) वर्षों तक।
- मलमल क्या है?
- एक विशेष प्रकार का सूती कपड़ा।
- मलमल का मूल निर्माण क्षेत्र कहाँ था?
- बंगाल (विशेषकर ढाका के आस-पास)।
- ढाका वर्तमान में किस देश की राजधानी है?
- बांग्लादेश की।
- विदेशी यात्री ढाका के मलमल को क्या कहते थे?
- ‘शाही मलमल’ या ‘मलमल ख़ास’।
- शाही मलमल का क्या आशय था?
- यह कपड़ा शाही परिवारों के उपयोग के योग्य माना जाता था।
- 17वीं शताब्दी में भारत आए फ्रांसीसी यात्री का नाम क्या था?
- बर्नीयर।
- बर्नीयर ने तत्कालीन भारत के किस क्षेत्र को मिस्र देश से भी अधिक समृद्ध बताया था?
- बंगाल को।
- 17वीं शताब्दी में बंगाल से किन वस्तुओं का प्रचुर मात्रा में निर्यात होता था?
- सूती-रेशमी वस्त्र, चावल, शक्कर और मक्खन।
- 17वीं शताब्दी में बंगाल में परिवहन और सिंचाई के लिए किस नदी से नहरें निकाली गई थीं?
- गंगा नदी से।
- स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की दशा कैसी थी?
- अल्प विकास तथा गत्यावरोध (गतिहीन) की स्थिति में।
- स्वतंत्र भारत के नियोजित विकास के लिए सरकार ने किस आयोग का निर्माण किया था?
- योजना आयोग।
- नियोजित विकास के लिए भारत सरकार द्वारा कौन सी योजनाएं घोषित की गईं?
- पंचवर्षीय योजनाएं।
विषय 2: कृषि क्षेत्रक
- ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारत मूलतः किस प्रकार की अर्थव्यवस्था बना रहा?
- कृषि अर्थव्यवस्था।
- औपनिवेशिक काल में देश की कितनी प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में बसी थी?
- लगभग 85 प्रतिशत।
- गाँवों में रहने वाली यह85%जनसंख्या अपनी आजीविका किस माध्यम से कमाती थी?
- प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि के माध्यम से।
- बड़ी जनसंख्या का व्यवसाय होने के बाद भी कृषि क्षेत्र की स्थिति कैसी रही?
- गतिहीन विकास तथा अप्रत्याशित ह्रास वाली।
- औपनिवेशिक काल में कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि का मुख्य कारण क्या था?
- कृषि अधीन क्षेत्र (बोए गए क्षेत्र) का प्रसार।
- कृषि क्षेत्र के विस्तार के बावजूद किसमें निरंतर कमी आती रही?
- कृषि उत्पादकता में।
- कृषि क्षेत्रक की गतिहीनता का मुख्य कारण किसे माना जाता है?
- औपनिवेशिक शासन द्वारा लागू की गई भू-व्यवस्था (राजस्व) प्रणालियों को।
- बंगाल प्रेसीडेंसी (पूर्वी भारत) में कौन सी राजस्व व्यवस्था लागू की गई थी?
- जमींदारी व्यवस्था।
- जमींदारी व्यवस्था में कृषि कार्यों से होने वाले समस्त लाभ को कौन हड़प जाता था?
- जमींदार।
- जमींदारों की मुख्य रुचि किस कार्य तक सीमित थी?
- किसानों से अधिक से अधिक लगान संग्रह करने तक।
- जमींदारी प्रथा के कारण कृषक वर्ग को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
- नितांत दुर्दशा और सामाजिक तनाव।
- जमींदारों द्वारा लगान वसूली में कठोरता का मुख्य कारण क्या था?
- राजस्व व्यवस्था की सख्त शर्तें।
- राजस्व की निश्चित राशि सरकारी कोष में जमा कराने की शर्तें क्या थीं?
- तारीखें पूर्व-निर्धारित (निश्चित) थीं।
- नियत तिथि पर रकम जमा नहीं करा पाने वाले जमींदारों के साथ क्या किया जाता था?
- उनसे उनके जमींदारी अधिकार छीन लिए जाते थे।
- औपनिवेशिक काल में कृषि उत्पादकता के निम्न स्तर के तकनीकी कारण क्या थे?
- प्रौद्योगिकी का निम्न स्तर, सिंचाई सुविधाओं का अभाव और उर्वरकों का नगण्य प्रयोग।
- कृषि के व्यावसायीकरण का क्या अर्थ है?
- खाद्यान्न फसलों के स्थान पर नकदी या वाणिज्यिक फसलों का उत्पादन करना।
- व्यावसायीकरण के कारण किन फसलों की उच्च उत्पादकता के प्रमाण मिले?
- नकदी फसलों के।
- नकदी फसलों की उच्च उत्पादकता का लाभ भारतीय किसानों को क्यों नहीं मिल पाता था?
- क्योंकि इन फसलों का उपयोग अंततः इंग्लैंड के कारखानों में किया जाता था।
- ब्रिटिश काल में किसानों को खाद्यान्न की जगह किन फसलों को उगाने के लिए मजबूर किया गया?
- वाणिज्यिक/नकदी फसलों को।
- ब्रिटिश काल में सिंचाई व्यवस्था में कुछ सुधार के बावजूद भारत किन मामलों में पिछड़ा रहा?
- बाढ़ नियंत्रण एवं भूमि की उपजाऊ शक्ति के मामले में।
- किसानों के किस वर्ग ने अपने फसल पैटर्न को परिवर्तित कर वाणिज्यिक फसलें उगाना शुरू किया?
- किसानों के एक बहुत छोटे से वर्ग ने।
- काश्तकारों और छोटे किसानों के पास कृषि में निवेश के लिए किन चीजों की कमी थी?
- संसाधन, तकनीक और प्रेरणा।
- ‘इंडिया डिवाइडेड‘पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
- ‘इकनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया‘ (दो खंडों में) के लेखक कौन हैं?
- रमेशचंद्र दत्त (आर.सी. दत्त)।
- ‘द लैंड सिस्टम ऑफ ब्रिटिश इंडिया‘पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- बी.एच. बेडेन पावेल।
- ‘गरीबी और अकाल‘ (Poverty and Famines)पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन।
- औपनिवेशिक काल में बार-बार अकाल पड़ने का मुख्य सामाजिक कारण क्या था?
- खाद्यान्नों की कमी और औपनिवेशिक शोषण नीतियां।
- ब्रिटिश शासन के अंत में भारतीय कृषि क्षेत्र किस भार से लदा हुआ था?
- अत्यधिक श्रम-अधिशेष (Over-crowding of labour) के भार से।
- जमींदारी व्यवस्था में भूमि का वास्तविक मालिक किसे माना जाता था?
- जमींदार को (जो सरकार को कर देता था)।
- स्वतंत्रता के समय भारतीय कृषि की सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?
- निम्न उत्पादकता और संस्थागत पिछड़ापन।
विषय 3: औद्योगिक क्षेत्रक
- क्या ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था के अंतर्गत भारत में एक सुदृढ़ औद्योगिक आधार का विकास हुआ?
- नहीं।
- औपनिवेशिक काल में भारत के किस विश्व प्रसिद्ध उद्योग का पतन हुआ?
- शिल्पकला/हस्तकला उद्योग का।
- अंग्रेजों द्वारा भारत के व्यवस्थित वि-औद्योगीकरण (De-industrialisation)के पीछे क्या दोहरा उद्देश्य था?
- भारत को कच्चे माल का निर्यातक बनाना, 2. भारत को ब्रिटेन के तैयार माल का विशाल बाजार बनाना।
- भारतीय हस्तकला उद्योगों के पतन का स्थानीय रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ा?
- भारी स्तर पर बेरोजगारी फैली।
- स्थानीय उत्पादों के नष्ट होने से भारतीय बाजारों में जो मांग पैदा हुई,उसे कैसे पूरा किया गया?
- इंग्लैंड से सस्ते निर्मित उत्पादों के आयात द्वारा।
- भारत में आधुनिक उद्योगों की स्थापना कब से शुरू होने लगी थी?
- उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध (Second half of 19th Century) से।
- प्रारंभ में आधुनिक उद्योगों का विकास किन क्षेत्रों तक सीमित था?
- सूती वस्त्र और पटसन (जूट) उद्योगों तक।
- औपनिवेशिक काल में सूती कपड़ा मिलें मुख्य रूप से किसके द्वारा स्थापित की गई थीं?
- भारतीय उद्यमियों द्वारा।
- प्रारंभिक सूती कपड़ा मिलें देश के किस हिस्से में अवस्थित थीं?
- पश्चिमी क्षेत्रों में (आज के महाराष्ट्र और गुजरात में)।
- भारत में पटसन (जूट) उद्योग की स्थापना का श्रेय किसे दिया जाता है?
- विदेशियों (ब्रिटिश पूंजीपतियों) को।
- औपनिवेशिक काल में पटसन उद्योग मुख्य रूप से किस प्रांत तक सीमित था?
- बंगाल प्रांत तक।
- भारत में लोहा और इस्पात (Iron and Steel)उद्योग का विकास किस शताब्दी में प्रारंभ हुआ?
- बीसवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में।
- TISCOका पूर्ण रूप क्या है?
- टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी।
- टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (TISCO)की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- वर्ष 1907 में।
- TISCOकी स्थापना कहाँ की गई थी?
- जमशेदपुर में (जो अब झारखंड राज्य में है)।
- दूसरे विश्व युद्ध के बाद भारत में किन अन्य उद्योगों के कारखाने स्थापित हुए?
- चीनी, सीमेंट, कागज आदि के कारखाने।
- पूँजीगत उद्योग (Capital Goods Industries)किसे कहते हैं?
- वे उद्योग जो उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन के लिए मशीनों और कलपुर्जों का निर्माण करते हैं।
- औपनिवेशिक काल में भारत में भावी औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए किस प्रकार के उद्योगों का अभाव था?
- पूँजीगत उद्योगों का।
- क्या नए आधुनिक उद्योगों की स्थापना पारंपरिक शिल्पकला के पतन की भरपाई कर पाई?
- नहीं।
- औपनिवेशिक काल में नव औद्योगिक क्षेत्रक की संवृद्धि दर (Growth Rate)कैसी थी?
- बहुत ही कम।
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP)में नव औद्योगिक क्षेत्रक का योगदान कैसा था?
- बहुत कम।
- ब्रिटिश काल में नव औद्योगिक क्षेत्रक में सार्वजनिक क्षेत्रक (Public Sector)का दायरा कहाँ तक सीमित था?
- केवल रेलों, विद्युत उत्पादन, संचार, बंदरगाहों और कुछ विभागीय उपक्रमों तक।
- भारत में उड्डयन (Aviation)क्षेत्र की नींव कब और किसके द्वारा रखी गई?
- 1932 में टाटा एयरलाइंस (टाटा संस के एक विभाग के रूप में) की स्थापना से।
- टाटा एयरलाइंस की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- 1932 में।
- ‘Development of Capitalist Enterprise in India’पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- डेनियल एच. बचन्न (1966)।
- वि-औद्योगीकरण के कारण शहरों की ओर पलायन बढ़ा या कृषि पर निर्भरता?
- कृषि पर निर्भरता और बेरोजगारी बढ़ी।
- सार्वजनिक क्षेत्र का मुख्य ध्येय औपनिवेशिक काल में क्या था?
- ब्रिटिश हितों की रक्षा करना और बुनियादी सुविधाएं देना।
- स्वतंत्रता के समय औद्योगिक क्षेत्रक किन सुधारों की मांग कर रहा था?
- आधुनिकीकरण, वैविध्य, क्षमता संवर्धन और सार्वजनिक निवेश में वृद्धि।
- ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं के मुक्त आयात से भारत के किस उद्योग को सबसे ज्यादा धक्का लगा?
- घरेलू हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग को।
- औपनिवेशिक औद्योगिक नीति की सबसे बड़ी कमी क्या थी?
- आधारभूत तथा भारी उद्योगों की उपेक्षा।
विषय 4: विदेशी व्यापार
- प्राचीन समय से ही भारत की वैश्विक स्थिति किस रूप में रही थी?
- एक महत्वपूर्ण व्यापारिक देश के रूप में।
- किन प्रतिबंधकारी नीतियों का भारत के विदेशी व्यापार पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा?
- औपनिवेशिक सरकार द्वारा अपनाई गई वस्तु उत्पादन, व्यापार और सीमा शुल्क की नीतियां।
- औपनिवेशिक काल में भारत मुख्य रूप से किन वस्तुओं का निर्यातक बनकर रह गया?
- कच्चे उत्पाद जैसे रेशम, कपास, ऊन, चीनी, नील और पटसन आदि का।
- औपनिवेशिक काल में भारत किन वस्तुओं का आयातक बन गया था?
- सूती, रेशमी, ऊनी वस्त्रों जैसी अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं और हल्की मशीनों का।
- भारत के आयात-निर्यात व्यापार पर व्यावहारिक रूप से किसका एकाधिकार था?
- इंग्लैंड (ब्रिटेन) का।
- भारत का आधे से अधिक विदेशी व्यापार केवल किस देश तक सीमित था?
- इंग्लैंड तक।
- ब्रिटेन के अलावा भारत को किन अन्य देशों से कुछ व्यापार करने की अनुमति थी?
- चीन, श्रीलंका (सिलोन) और ईरान (फारस) से।
- किस नहर के खुलने से भारत के व्यापार पर अंग्रेजी नियंत्रण और सख्त हो गया?
- स्वेज नहर।
- स्वेज नहर व्यापार मार्ग के लिए किस वर्ष खोली गई थी?
- वर्ष 1869 में।
- स्वेज नहर कहाँ स्थित है?
- उत्तर-पूर्वी मिस्र में स्वेज स्थल-संधि के आर-पार।
- स्वेज नहर किन दो सागरों को आपस में जोड़ती है?
- भूमध्य सागर और लाल सागर को।
- स्वेज नहर मिस्र के किस पत्तन (पोर्ट) को स्वेज की खाड़ी से जोड़ती है?
- पोर्ट सईद को।
- स्वेज नहर के खुलने से परिवहन लागतों में कमी क्यों आई?
- क्योंकि इसने यूरोप और दक्षिण एशिया के बीच एक छोटा और सीधा जलमार्ग सुलभ करा दिया, जिससे अफ्रीका की परिक्रमा नहीं करनी पड़ती थी।
- औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत भारतीय विदेशी व्यापार की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?
- निर्यात अधिशेष (Export Surplus) का बड़ा आकार।
- निर्यात अधिशेष होने के बावजूद देश के आंतरिक बाजारों में किन आवश्यक वस्तुओं की किल्लत रहती थी?
- अनाज, कपड़ा और मिट्टी का तेल जैसी वस्तुओं की।
- क्या इस विशाल निर्यात अधिशेष से भारत में सोने और चांदी का प्रवाह बढ़ा?
- नहीं।
- भारतीय निर्यात अधिशेष का उपयोग अंग्रेज किस कार्य के लिए करते थे?
- अंग्रेजी सरकार के प्रशासनिक खर्चों को उठाने, युद्धों का व्यय भुगतने और अदृश्य मदों के आयात के लिए।
- ‘भारतीय संपत्ति का निष्कासन‘ (Drain of Wealth)से क्या तात्पर्य है?
- भारत की संपदा का बिना किसी प्रतिफल के इंग्लैंड भेजा जाना।
- औपनिवेशिक काल में विदेशी व्यापार का स्वरूप कैसा था?
- औपनिवेशिक शोषण पर आधारित, जो केवल ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति को पोषित कर रहा था।
- चित्र1.2में स्वेज नहर को किन दो प्रमुख क्षेत्रों के बीच का राजमार्ग दिखाया गया है?
- भारत और इंग्लैंड के बीच का।
विषय 5: जनांकिकीय परिस्थिति
- ब्रिटिश भारत की जनसंख्या के विस्तृत ब्यौरे सबसे पहले किस जनगणना के तहत एकत्रित किए गए थे?
- 1881 की जनगणना के तहत।
- भारत में प्रथम सरकारी जनगणना किस वर्ष हुई थी?
- 1881 में।
- प्रथम जनगणना के बाद भारत में प्रत्येक कितने वर्ष बाद जनगणना होती रही है?
- प्रत्येक दस (10) वर्ष बाद।
- वर्ष1921के पूर्व का भारत जनांकिकीय संक्रमण (Demographic Transition)के किस सोपान में था?
- प्रथम सोपान में।
- भारत में जनांकिकीय संक्रमण के द्वितीय सोपान का आरंभ किस वर्ष के बाद माना जाता है?
- वर्ष 1921 के बाद।
- भारतीय जनसंख्या के इतिहास में‘महाविभाजन का वर्ष‘ (Year of Great Divide)किसे कहा जाता है?
- वर्ष 1921 को।
- 1921से पहले भारत की जनसंख्या संवृद्धि दर कैसी थी?
- न तो बहुत विशाल थी और न ही संवृद्धि दर बहुत अधिक थी (उतार-चढ़ाव वाली थी)।
- औपनिवेशिक काल में भारत की कुल साक्षरता दर (Literacy Rate)कितनी थी?
- 16 प्रतिशत से भी कम।
- औपनिवेशिक काल में महिला साक्षरता दर (Female Literacy)कितनी आँकी गई थी?
- नगण्य, केवल 7 प्रतिशत।
- ब्रिटिश शासन के दौरान जन-स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति थी?
- अधिकांश को सुलभ ही नहीं थीं और जहाँ उपलब्ध थीं, वहाँ नितांत अपर्याप्त थीं।
- स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किन रोगों के कारण व्यापक जन-हानि होना आम बात थी?
- जल और वायु के सहारे फैलने वाले संक्रामक रोगों के कारण।
- औपनिवेशिक काल में सकल मृत्यु दर (Death Rate)कैसी थी?
- बहुत ऊँची।
- शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate)से क्या तात्पर्य है?
- प्रति हजार जीवित जन्मे बच्चों में से एक वर्ष से कम आयु में मरने वाले बच्चों की संख्या।
- औपनिवेशिक काल में शिशु मृत्यु दर कितनी थी?
- 218 प्रति हजार।
- पुस्तक के प्रकाशन के समय के आंकड़ों के अनुसार आज भारत में शिशु मृत्यु दर कितनी हो गई है?
- 28 प्रति हजार।
- जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy)से क्या तात्पर्य है?
- एक व्यक्ति के औसतन जीवित रहने की संभावित आयु।
- औपनिवेशिक काल में भारत का जीवन प्रत्याशा स्तर कितना था?
- केवल 32 वर्ष।
- वर्तमान समय में भारत में जीवन प्रत्याशा स्तर लगभग कितना वर्ष है?
- लगभग 70 वर्ष।
- विश्वस्त आंकड़ों के अभाव के बावजूद औपनिवेशिक शासन की जनसंख्या के बारे में कौन सी बात अकाट्य सत्य है?
- देश में अत्यधिक गरीबी व्याप्त थी जिससे जनसंख्या की दशा बदतर थी।
- चित्र1.3के माध्यम से भारतीय जनसंख्या की किस मूलभूत कमी को दर्शाया गया है?
- जनसंख्या का एक बड़ा भाग ‘घर’ (आवास) जैसी मूल आवश्यकता से वंचित था।
विषय 6: व्यावसायिक एवं आधारिक संरचना
- व्यावसायिक संरचना (Occupational Structure)से क्या तात्पर्य है?
- विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रकों में लगे कार्यशील श्रमिकों का आनुपातिक विभाजन।
- औपनिवेशिक काल में भारत का सबसे बड़ा व्यावसायिक क्षेत्रक कौन सा था?
- कृषि क्षेत्रक।
- औपनिवेशिक काल में कृषि क्षेत्र में कितनी प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या लगी थी?
- 70 से 75 प्रतिशत।
- औपनिवेशिक काल में विनिर्माण (Manufacturing)क्षेत्रक में कितने प्रतिशत जन-समुदाय को रोजगार मिल रहा था?
- केवल 10 प्रतिशत।
- औपनिवेशिक काल में सेवा (Service)क्षेत्रक में कितने प्रतिशत जनसंख्या कार्यरत थी?
- 15 से 20 प्रतिशत।
- मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत मुख्य रूप से कौन-कौन से आधुनिक प्रांत शामिल थे?
- तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल।
- किन क्षेत्रों में कार्यबल की कृषि क्षेत्रक पर निर्भरता में कमी आई तथा विनिर्माण व सेवा क्षेत्र का महत्व बढ़ा?
- मद्रास प्रेसीडेंसी, मुंबई और बंगाल के कुछ क्षेत्रों में।
- किन राज्यों या क्षेत्रों में औपनिवेशिक काल के दौरान कृषि में लगे श्रमिकों के अनुपात में वृद्धि देखी गई?
- पंजाब, राजस्थान और उड़ीसा में।
- आधारिक संरचना (Infrastructure)के अंतर्गत किन प्रमुख सेवाओं का विकास औपनिवेशिक शासन में हुआ?
- रेलों, पत्तनों, जल परिवहन और डाक-तार (Post & Telegraph) का।
- अंग्रेजों द्वारा आधारिकसंरचना के विकास का मुख्य ध्येय क्या था?
- जनसामान्य को सुविधा देना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक हितों का साधन करना था।
- अंग्रेजी शासन से पहले बनी सड़कें आधुनिक यातायात के लिए कैसी थीं?
- वे आधुनिक यातायात साधनों के लिए उपयुक्त नहीं थीं।
- अंग्रेजों द्वारा बनाई गई सड़कों का मुख्य ध्येय क्या था?
- सेनाओं के आवागमन की सुविधा और भीतरी भागों से कच्चे माल को निकटतम रेलवे स्टेशन या पत्तन तक पहुँचाना।
- औपनिवेशिक काल में ग्रामीण क्षेत्रों में किस प्रकार की सड़कों का निरंतर अभाव बना रहा?
- सभी मौसमों में उपयोग होने वाले सड़क मार्गों (बारहमासी सड़कों) का।
- वर्षाकाल में ग्रामीण सड़कों के अभाव के कारण अकाल या प्राकृतिक आपदा के समय क्या स्थिति बनती थी?
- ग्रामीणों का जीवन कठिनाइयों के कारण दूभर हो जाता था।
- अंग्रेजों ने भारत में रेलों का आरंभ किस वर्ष किया था?
- वर्ष 1850 में।
- अंग्रेजी शासन का भारत में सबसे महत्वपूर्ण योगदान किसे माना जाता है?
- वर्ष 1850 में रेलों के आरंभ को।
- रेलों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को किन दो महत्वपूर्ण तरीकों से प्रभावित किया?
- भूक्षेत्रीय व सांस्कृतिक व्यवधान कम कर लंबी यात्राएं सुलभ कीं, 2. भारतीय कृषि के व्यावसायीकरण को बढ़ावा दिया।
- कृषि के व्यावसायीकरण का ग्रामीण अर्थव्यवस्था के किस स्वरूप पर विपरीत प्रभाव पड़ा?
- आत्मनिर्भरता के स्वरूप पर।
- मुंबई तथा थाणे को जोड़ने वाला पहला रेल पुल किस वर्ष बना था?
- वर्ष 1854 में (चित्र 1.4)।
- भारत का पहला रेल पुल किन दो स्थानों को जोड़ता था?
- मुंबई तथा थाणे को।
- औपनिवेशिक काल में विकसित की गई मँहगी‘तार व्यवस्था‘ (Telegraph)का मुख्य ध्येय क्या था?
- देश में कानून व्यवस्था को बनाए रखना।
- उड़ीसा की तटवर्ती नहर क्यों अलाभकारी सिद्ध हुई और उसे क्यों बंद करना पड़ा?
- क्योंकि वह रेलमार्ग से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाई और उसके समानांतर रेलमार्ग बनने पर उसे छोड़ दिया गया।
- स्वतंत्रता प्राप्ति तक200वर्षों के विदेशी शासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसा बना दिया था?
- एक गतिहीन, पिछड़ी और शोषित अर्थव्यवस्था।
- ‘The Colonial Legacy’ (1993)पुस्तक के लेखक कौन हैं?
- बिपिन चंद्र।
- स्वतंत्रता के समय भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ क्या थीं?
- व्यापक गरीबी, बेरोजगारी, निम्न साक्षरता और पिछड़ी हुई आधारिक संरचना।
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