भारत की नई आर्थिक नीति 1991 (LPG Model): जानिए कैसे बचा था 15 दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार?
1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि (Background of 1991 Crisis)
- मूल कारण: 1980 के दशक में अर्थव्यवस्था में अकुशल वित्तीय प्रबंधन और सरकार के व्यय का उसकी आय (राजस्व) से बहुत अधिक होना।
- तात्कालिक संकट (भुगतान संतुलन संकट):
- सरकार विदेशी ऋणों का ब्याज चुकाने की स्थिति में नहीं थी।
- भारत का विदेशी मुद्रा रिज़र्व (Foreign Exchange Reserves) इतना कम हो गया था कि उससे केवल पंद्रह दिनों (दो सप्ताह) के आयात का ही भुगतान किया जा सकता था।
- पेट्रोलियम जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं (उच्च मुद्रास्फीति)।
- अंतर्राष्ट्रीय सहायता: संकट से उबरने के लिए भारत ने विश्व बैंक (IBRD) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 7 बिलियन डॉलर का ऋण लिया।
- शर्ते: ऋण देने के बदले इन संस्थाओं ने भारत पर अर्थव्यवस्था को ‘मुक्त’ करने, निजी क्षेत्र पर से प्रतिबंध हटाने और व्यापार उदारीकरण करने की शर्तें लगाईं।
नई आर्थिक नीति – 1991 (New Economic Policy – NEP)
- भारत ने विश्व बैंक और IMF की शर्तें मानकर 1991 में नई आर्थिक नीति की घोषणा की। इसके उपायों को दो भागों में बांटा गया:
- स्थायित्वकारी उपाय (Stabilisation Measures): ये अल्पकालिक होते हैं, जिनका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को बनाए रखना, भुगतान संतुलन की त्रुटियों को दूर करना और मुद्रास्फीति (महंगाई) पर अंकुश लगाना था।
- संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms): ये दीर्घकालिक उपाय होते हैं, जिनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की कार्यकुशलता को सुधारना और भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा क्षमता को बढ़ाना था। इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं—LPG (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण)।
उदारीकरण (Liberalisation) – प्रमुख क्षेत्रक सुधार
- इसका अर्थ आर्थिक गतिविधियों के नियमन के लिए बनाए गए नियमों-कानूनों के प्रतिबंधों को हटाकर अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों को ‘मुक्त’ करना है इसके अंतर्गत 5 प्रमुख क्षेत्रों में सुधार किए गए:
- औद्योगिक क्षेत्रक में सुधार (Industrial Deregulation):
- 6 उत्पाद श्रेणियों को छोड़कर अन्य सभी उद्योगों के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था समाप्त कर दी गई। (ये छह उद्योग थे: अल्कोहल, सिगरेट, जोखिम भरे रसायन, औद्योगिक विस्फोटक, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमानन तथा फार्मास्युटिकल्स)।
- वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए केवल परमाणु ऊर्जा और रेल परिवहन जैसी मुख्य गतिविधियाँ ही सुरक्षित बची हैं।
- वित्तीय क्षेत्रक में सुधार (Financial Sector Reforms):
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की भूमिका को वित्तीय क्षेत्रक के ‘नियंत्रक‘ से बदलकर ‘सहायक/सुविधाप्रदाता‘ कर दिया गया। अब बैंक कई मामलों में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हो गए।
- बैंकों में विदेशी निवेश (FII) की सीमा बढ़ाकर 74% कर दी गई।
- कर व्यवस्था में सुधार (Tax Reforms /राजकोषीय नीति):
- कर चोरी (कर वंचन) को रोकने और स्वैच्छिक कर भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत आयकर और निगम कर की दरों में निरंतर कमी की गई।
- अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत कर ‘एक राष्ट्र, एक टैक्स, एक बाजार’ के निर्माण हेतु वर्ष 2016 के संविधान संशोधन द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (GST) की शुरुआत की गई।
- विदेशी विनिमय सुधार (Foreign Exchange Reforms):
- भुगतान संतुलन संकट के तात्कालिक निदान के लिए 1991 में रुपये का अवमूल्यन (Devaluation) किया गया, जिससे विदेशी मुद्रा का अंतर्वाह बढ़ा।
- विनिमय दर (Exchange Rate) के निर्धारण को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर बाज़ार की माँग और पूर्ति पर छोड़ दिया गया।
- व्यापार और निवेश नीति सुधार (Trade & Investment Reforms):
- आयातों पर से परिमाणात्मक/मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions) हटाए गए (अप्रैल 2001 से कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं पर से भी हटा दिए गए)।
- प्रशुल्क (Tariffs) दरों में भारी कटौती की गई और भारतीय वस्तुओं को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्यात शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया।
निजीकरण (Privatization) और विनिवेश
- निजीकरण का अर्थ: किसी सार्वजनिक उपक्रम (PSU) के स्वामित्व या प्रबंधन को सरकार द्वारा छोड़ना या उसे निजी क्षेत्र को सीधे बेच देना।
- विनिवेश (Disinvestment): सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा जनसामान्य या निजी क्षेत्र को अपनी इक्विटी (शेयर) बेचना विनिवेश कहलाता है। इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन और आधुनिकीकरण को बढ़ाना था।
- स्वायत्तता और दर्जे (Maha/Nav/Miniratna): सार्वजनिक उपक्रमों के व्यावसायीकरण और स्पर्धा क्षमता को सुधारने के लिए सरकार ने उन्हें प्रबंधकीय स्वायत्तता दी और उन्हें तीन श्रेणियों में विभाजित किया:
- महारत्न (Maharatna): जैसे- इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।
- नवरत्न (Navratna): जैसे- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)।
- लघुरत्न (Miniratna): जैसे- भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), IRCTC।
- निजीकरण की आलोचना: आलोचकों के अनुसार सरकार ने सार्वजनिक परिसंपत्तियों को ओने-पौने दामों में निजी क्षेत्र को बेच दिया और विनिवेश से प्राप्त राशि का उपयोग विकास कार्यों में न करके बजटीय राजस्व घाटे को कम करने में किया।
वैश्वीकरण (Globalization) और बाह्य प्रापण
- वैश्वीकरण का अर्थ: किसी देश की अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ इस प्रकार एकीकरण करना जिससे एक सीमामुक्त विश्व (Borderless World) का निर्माण हो सके।
- बाह्य प्रापण (Outsourcing): यह वैश्वीकरण का एक विशिष्ट परिणाम है। इसके तहत कंपनियाँ किसी बाहरी विदेशी स्रोत से नियमित सेवाएँ (जैसे- कॉल सेंटर, कानूनी सलाह, लेखांकन/अकाउंटिंग) प्राप्त करती हैं।
- भारत एक वैश्विक केंद्र (Hub): कम मजदूरी दरों और कुशल व शिक्षित श्रम शक्ति की प्रचुर उपलब्धता के कारण भारत सुधारोपरांत विश्व का सबसे प्रमुख ‘बाह्य प्रापण केंद्र’ (Outsourcing Destination) बनकर उभरा।
- वैश्विक पद-छाप (Indian MNCs): वैश्वीकरण के कारण कई भारतीय कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय निगम (MNC) बनीं, जैसे- ओएनजीसी विदेश (16 देशों में कार्यरत), टाटा स्टील (26 देशों में कार्यरत), एचसीएल टेक्नोलॉजीज और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
- स्थापना: 1995 में की गई। यह गैट (GATT – व्यापार और सीमा शुल्क महासंधि) का परवर्ती रूप है, जिसकी स्थापना 1948 में 23 देशों ने की थी।
- ध्येय: नियम आधारित एक ऐसी न्यायपूर्ण विश्व व्यापार व्यवस्था स्थापित करना जिसमें कोई देश मनमाने ढंग से बाधाएं खड़ी न कर सके। इसके समझौतों में वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के विनिमय को भी शामिल किया गया है।
- विवाद/चिंताएं: विकासशील देशों (जैसे भारत) को लगता है कि WTO विकसित देशों के इशारे पर काम करता है। विकसित देश खुद तो कृषि पर भारी सहायिकी (Subsidy) देते हैं, लेकिन विकासशील देशों को अपने बाजार विकसित देशों के आयात के लिए खोलने को मजबूर करते हैं।
सुधारकालीन अर्थव्यवस्था
- सकारात्मक प्रभाव (Positive Outcomes):
- जीडीपी में तीव्र वृद्धि: भारत की कुल जीडीपी संवृद्धि दर जो 1980-91 में 5.6% थी, वह बढ़कर 2021-22 में 9.4% हो गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवा क्षेत्रक (Service Sector) के उछाल के कारण हुई।
- विदेशी निवेश में भारी उछाल: प्रत्यक्ष और संस्थागत विदेशी निवेश (FDI) 1990-91 के $100 मिलियन से बढ़कर 2022-23 में 23 बिलियन डॉलर हो गया।
- विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि: भारत का विनिमय रिज़र्व $6 बिलियन (1990-91) से बढ़कर 2023-24 में 646 बिलियन डॉलर हो गया, जिससे भारत विदेशी मुद्रा का विश्व में एक बड़ा धारक बना।
- भारत वाहन, इंजीनियरी उत्पादों, दवाओं और आईटी उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बन गया।
- नकारात्मक प्रभाव / विफलताएं (Negative Outcomes):
- रोजगार विहीन संवृद्धि (Jobless Growth): जीडीपी बढ़ने के बावजूद सुधार प्रेरित नीतियां देश में रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन करने में विफल रहीं。
- कृषि क्षेत्र की उपेक्षा: सुधारों से कृषि को कोई लाभ नहीं हुआ। सिंचाई, बिजली और बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक व्यय (सरकारी खर्च) कम कर दिया गया। उर्वरक सब्सिडी घटने से लागत बढ़ी और आयात शुल्क घटने से किसानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की मार झेलनी पड़ी। खाद्यान्नों की जगह ‘नकदी फसलों’ के निर्यात पर बल देने से खाद्यान्न कीमतें बढ़ीं।
- औद्योगिक शिथिलता: विदेशों से आने वाले सस्ते आयातों के कारण घरेलू विनिर्माण वस्तुओं की मांग गिर गई, जिससे स्थानीय उद्योगों को भारी नुकसान हुआ (जैसे आंध्र प्रदेश का हथकरघा संकट या सिरीसिला त्रासदी)।
- असमान विकास (Inequality): सुधारों का लाभ केवल उच्च आय वर्ग और कुछ इने-गिने क्षेत्रकों (दूरसंचार, आईटी, वित्त, मनोरंजन, पर्यटन और रियल एस्टेट) तक ही सीमित रहा, जिससे अमीर-गरीब की खाई और चौड़ी हुई।
कैसे बचा था भारत का केवल 15 दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार?
वर्ष 1991 में भारत इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय और भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments Crisis) से गुजर रहा था। सरकार के पास पेट्रोलियम और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए मात्र 2 सप्ताह (15 दिन) का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) बचा था।
जानिए उस समय सरकार ने देश को दिवालिया होने से बचाने के लिए क्या बड़े कदम उठाए थे:
1. अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का दरवाजा खटखटाया: जब किसी देश या अंतर्राष्ट्रीय निवेशक ने भारत पर भरोसा नहीं जताया, तब भारत सरकार ने दो बड़ी वैश्विक संस्थाओं से संपर्क किया:
- विश्व बैंक (IBRD): अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड
2. $7 बिलियन डॉलर का आपातकालीन ऋण: भारत की गंभीर स्थिति को देखते हुए इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर भारत को 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर ($7 Billion) का भारी-भरकम ऋण (Loan) मंजूर किया, जिससे देश को तात्कालिक राहत मिली।
3. IMF और विश्व बैंक की कड़ी शर्तें: यह ऋण बिना किसी शर्त के नहीं मिला था। इन संस्थाओं ने भारत के सामने अपनी अर्थव्यवस्था के ढांचे को बदलने के लिए 3 मुख्य शर्तें रखीं:
- अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया जाए (कड़े नियम और लाइसेंस राज खत्म हों)।
- निजी क्षेत्र पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और सरकारी हस्तक्षेप कम हो।
- अन्य देशों के साथ विदेशी व्यापार पर लगे प्रतिबंध (आयात शुल्क और कोटा) हटाए जाएं।
4. भारतीय रुपये का अवमूल्यन (Devaluation): भुगतान संतुलन संकट के तात्कालिक निदान के लिए सरकार ने विदेशी मुद्राओं (जैसे अमेरिकी डॉलर) की तुलना में रुपये की कीमत को जानबूझकर कम (अवमूल्यन) कर दिया।
– इसका फायदा: इससे भारतीय निर्यात विदेशों में सस्ता हो गया, जिससे भारतीय सामान की मांग बढ़ी और देश में विदेशी मुद्रा का आगमन (Forex Inflow) तेजी से शुरू हो गया।
5. LPG नीति की ऐतिहासिक घोषणा: विश्व बैंक और आईएमएफ की शर्तों को स्वीकार करते हुए भारत ने नई आर्थिक नीति (New Economic Policy – 1991) की घोषणा की, जिसे LPG मॉडल कहा जाता है:
- L – Liberalisation (उदारीकरण): उद्योगों को लाइसेंस राज के चंगुल से मुक्त किया गया।
- P – Privatisation (निजीकरण): सरकारी कंपनियों में विनिवेश कर निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया।
- G – Globalisation (वैश्वीकरण): भारतीय अर्थव्यवस्था के दरवाजे पूरी दुनिया के व्यापार के लिए खोल दिए गए।
नतीजा क्या रहा?
- विदेशी मुद्रा भंडार: 1990-91 के $6 बिलियन से बढ़कर 2023-24 में $646 बिलियन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया।
- विदेशी निवेश: $100 मिलियन से उछलकर $23 बिलियन हो गया।
(महत्वपूर्ण प्रश्न)
भाग 1: 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि और कारण
Q1. भारत में नियोजित विकास के कितने वर्षों के बाद 1991 के आर्थिक सुधारों की शुरुआत हुई?
उत्तर: चालीस वर्षों के बाद।
Q2. वर्ष 1991 में आर्थिक सुधारों का मुख्य तात्कालिक कारण क्या था?
उत्तर: गंभीर भुगतान संतुलन संकट (विदेशी ऋण संकट)।
Q3. स्वतंत्रता के बाद भारत ने किस प्रकार के आर्थिक ढाँचे को अपनाया था?
उत्तर: मिश्रित अर्थव्यवस्था (पूँजीवादी और समाजवादी दोनों विशेषताओं से युक्त)।
Q4. भारत का विदेशी मुद्रा रिज़र्व (Foreign Exchange Reserves) 1991 के संकट के समय कितने दिनों के आयात के लिए बचा था?
उत्तर: मात्र 15 दिनों (दो सप्ताह) के आवश्यक आयात के भुगतान के लिए।
Q5. 1991 के वित्तीय संकट का वास्तविक उद्गम स्रोत क्या माना जाता है?
उत्तर: 1980 के दशक में अर्थव्यवस्था में अकुशल प्रबंधन।
Q6. सरकार अपने घाटे का वित्तीय प्रबंध (Deficit Financing) किन माध्यमों से करती है?
उत्तर: बैंकों, जनसामान्य तथा अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से उधार लेकर।
Q7. भारत आयात के लिए डॉलरों में भुगतान किस माध्यम से प्राप्त करता है?
उत्तर: अपने घरेलू उत्पादन के निर्यात द्वारा।
Q8. 1980 के दशक में राजस्व कम होने के बावजूद सरकार को किन कारणों से अधिक खर्च करना पड़ा?
उत्तर: बेरोजगारी, गरीबी और जनसंख्या विस्फोट के कारण।
Q9. 1991 के संकट के समय किन आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि हुई थी?
उत्तर: पेट्रोलियम और अन्य आवश्यक वस्तुएं।
Q10. संकट के दौरान सरकार का व्यय किस सीमा तक बढ़ गया था?
उत्तर: व्यय उसके राजस्व से इतना अधिक हो गया कि ऋण द्वारा व्यय धारण क्षमता से बाहर हो गया।
Q11. 1991 के आर्थिक संकट के समय भारत सरकार के पास किस चीज़ की कमी हो गई थी जिसके कारण वह अंतर्राष्ट्रीय उधारदाताओं का ब्याज नहीं चुका पा रही थी?
उत्तर: विदेशी मुद्रा की।
Q12. संकट के समय भारत ने सहायता के लिए किन अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं का दरवाजा खटखटाया?
उत्तर: विश्व बैंक (आई.बी.आर.डी.) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।
Q13. आई.बी.आर.डी. (IBRD) का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (International Bank for Reconstruction and Development)।
Q14. विश्व बैंक और IMF से भारत को संकट का सामना करने के लिए कितने बिलियन डॉलर का ऋण मिला था?
उत्तर: 7 बिलियन डॉलर ($7 Billion)।
Q15. विश्व बैंक और आईएमएफ ने ऋण देने के बदले भारत के सामने क्या मुख्य शर्तें रखी थीं?
उत्तर: सरकार उदारीकरण करेगी, निजी क्षेत्र पर लगे प्रतिबंध हटाएगी तथा व्यापार पर से नियंत्रण कम करेगी।
Q16. 1991 की नई आर्थिक नीति (NEP) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: अर्थव्यवस्था में अधिक स्पर्धापूर्ण व्यावसायिक वातावरण की रचना करना और फर्मों की संवृद्धि की बाधाओं को दूर करना।
Q17. नई आर्थिक नीति (1991) को किन दो मुख्य उपसमूहों में विभाजित किया जा सकता है?
उत्तर: (i) स्थायित्वकारी उपाय (Stabilisation Measures) और (ii) संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms)।
Q18. स्थायित्वकारी उपाय (Stabilisation Measures) किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर: ये अल्पकालिक (Short-term) होते हैं।
Q19. स्थायित्वकारी उपायों का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: भुगतान संतुलन की त्रुटियों को दूर करना और मुद्रास्फीति (बढ़ती कीमतों) पर अंकुश लगाना।
Q20. संरचनात्मक सुधार के उपाय (Structural Reform Measures) किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर: ये दीर्घकालिक (Long-term) उपाय होते हैं।
Q21. संरचनात्मक सुधारों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: अर्थव्यवस्था की कुशलता को सुधारना और भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा क्षमता को बढ़ाना।
Q22. नई आर्थिक नीति के तीन मुख्य स्तंभ या उपवर्ग कौन-से हैं?
उत्तर: उदारीकरण (Liberalisation), निजीकरण (Privatisation) और वैश्वीकरण (Globalisation) – एलपीजी (LPG)।
Q23. “केवल आर्थिक विकास ही सब कुछ नहीं है तथा सकल घरेलू उत्पाद ही समाज की प्रगति का एकमात्र अनिवार्य सूचक नहीं है” – यह कथन किसका है?
उत्तर: भारत के पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का।
Q24. 1990-91 में भारत का विदेशी निवेश स्तर कितना था?
उत्तर: 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से कुछ ऊपर।
Q25. 1990-91 में भारत का विदेशी मुद्रा रिज़र्व कितना था?
उत्तर: 6 बिलियन अमेरिकी डॉलर।
भाग 2: उदारीकरण (Liberalisation) और विभिन्न क्षेत्रों में सुधार
Q26. उदारीकरण (Liberalisation) का सरल अर्थ क्या है?
उत्तर: आर्थिक गतिविधियों के नियमन के लिए बनाए गए नियमों-कानूनों और प्रतिबंधों को दूर कर अर्थव्यवस्था को ‘मुक्त’ करना।
Q27. भारत में उदारीकरण के प्रयास आंशिक रूप से सर्वप्रथम किस दशक में शुरू किए गए थे?
उत्तर: 1980 के दशक में।
Q28. 1991 के सुधारों में किन पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया था?
उत्तर: औद्योगिक क्षेत्रक, वित्तीय क्षेत्रक, कर-सुधार, विदेशी विनिमय बाजार, व्यापार तथा निवेश क्षेत्रक।
Q29. सुधारों से पूर्व भारत की औद्योगिक लाइसेंस व्यवस्था में क्या कमियाँ थीं?
उत्तर: उद्यमी को फर्म स्थापित करने, बंद करने या उत्पादन मात्रा तय करने के लिए सरकारी अनुमति लेनी पड़ती थी।
Q30. 1991 की नीति के तहत कितने उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी के लिए लाइसेंसिंग व्यवस्था समाप्त कर दी गई?
उत्तर: 6 उत्पाद श्रेणियों को छोड़कर।
Q31. वे कौन-से छह उद्योग थे जिनके लिए 1991 के बाद भी लाइसेंस अनिवार्य रखा गया?
उत्तर: अल्कोहल, सिगरेट, जोखिम भरे रसायन, औद्योगिक विस्फोटक, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमानन तथा औषधि-भेषज (फार्मास्युटिकल्स)।
Q32. वर्तमान में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए सुरक्षित उद्योगों में कौन-से मुख्य क्षेत्र बचे हैं?
उत्तर: परमाणु ऊर्जा उत्पादन और रेल परिवहन की मुख्य गतिविधियाँ।
Q33. उदारीकरण के अंतर्गत लघु उद्योगों (SSI) के लिए क्या कदम उठाया गया?
उत्तर: उनके द्वारा उत्पादित अधिकांश वस्तुओं को अनारक्षित (Deregulation) श्रेणी में डाल दिया गया।
Q34. वित्तीय क्षेत्रक (Financial Sector) के अंतर्गत कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल हैं?
उत्तर: व्यावसायिक और निवेश बैंक, स्टॉक एक्सचेंज तथा विदेशी मुद्रा बाजार।
Q35. भारत में वित्तीय क्षेत्रक का नियमन और नियंत्रण किस संस्था द्वारा किया जाता है?
उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा।
Q36. वित्तीय क्षेत्रक सुधारों का प्रमुख उद्देश्य आरबीआई (RBI) की भूमिका में क्या बदलाव करना था?
उत्तर: आरबीआई को ‘नियंत्रक’ (Regulator) की भूमिका से हटाकर इस क्षेत्र का ‘सहायक/सुविधाप्रदाता’ (Facilitator) बनाना।
Q37. सुधारों के बाद बैंकों की पूँजी में विदेशी भागीदारी (Foreign Investment Limit) की सीमा बढ़ाकर कितने प्रतिशत कर दी गई?
उत्तर: 74 प्रतिशत (74%)।
Q38. वित्तीय बाज़ारों में निवेश के लिए किन विदेशी संस्थाओं को अनुमति दी गई?
उत्तर: विदेशी निवेश संस्थाओं (FII), मर्चेंट बैंक, म्यूचुअल फंड और पेंशन कोष।
Q39. राजकोषीय नीतियां (Fiscal Policies) किसे कहा जाता है?
उत्तर: सरकार की कराधान (Taxation) और सार्वजनिक व्यय (Public Expenditure) संबंधी नीतियों को।
Q40. कर (Taxes) मुख्य रूप से कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: दो प्रकार के – प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) और अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)।
Q41. प्रत्यक्ष कर के उदाहरण क्या हैं?
उत्तर: व्यक्तिगत आय कर (Income Tax) और व्यावसायिक उद्यमों पर लगने वाला निगम कर (Corporate Tax)।
Q42. 1991 के बाद से व्यक्तिगत आय कर की दरों में निरंतर कमी क्यों की गई?
उत्तर: ताकि कर-वंचन (Tax Evasion/कर चोरी) रुके और लोग स्वेच्छा से अपनी आय का विवरण दें।
Q43. ‘एक राष्ट्र, एक टैक्स, एक बाजार‘ की अवधारणा को लागू करने के लिए कौन-सा कर लाया गया?
उत्तर: वस्तु एवं सेवा कर (GST – Goods and Services Tax)।
Q44. केंद्र और राज्य सरकारों को वस्तु एवं सेवा कर (GST) लगाने का अधिकार किस वर्ष संविधान संशोधन द्वारा दिया गया?
उत्तर: वर्ष 2016 में।
Q45. विदेशी क्षेत्रक में तात्कालिक सुधार के लिए 1991 में रुपये के साथ क्या किया गया?
उत्तर: रुपये का अवमूल्यन (Devaluation) किया गया।
Q46. मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation) करने का मुख्य लाभ क्या हुआ?
उत्तर: देश में विदेशी मुद्रा के आगमन (अंतर्वाह) में वृद्धि हुई।
Q47. वर्तमान में विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये के विनिमय दर (Exchange Rate) का निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर: बाज़ार में विदेशी मुद्रा की माँग और पूर्ति के आधार पर (मुक्त बाजार प्रणाली)।
Q48. व्यापार और निवेश नीति सुधारों का मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर: स्थानीय उद्योगों की कार्यकुशलता सुधारना और उन्हें आधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रेरित करना।
Q49. सुधारों से पूर्व भारत आंतरिक उद्योगों के संरक्षण के लिए कौन सी नीति अपनाता था?
उत्तर: आयात के परिमाण को सीमित रखना (मात्रात्मक प्रतिबंध) और उच्च प्रशुल्क (High Tariffs) लगाना।
Q50. प्रशुल्क (Tariffs) और मात्रात्मक प्रतिबंधों को हटाने का क्या उद्देश्य था?
उत्तर: घरेलू विनिर्माण उद्योगों की संवृद्धि दर बढ़ाना और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता लाना।
Q51. कृषि पदार्थों और औद्योगिक उपभोक्ता वस्तुओं के आयात पर से सभी प्रकार के मात्रात्मक प्रतिबंध कब से पूरी तरह हटा दिए गए?
उत्तर: अप्रैल 2001 से।
Q52. भारतीय वस्तुओं को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने टैक्स में क्या छूट दी?
उत्तर: उन्हें निर्यात शुल्क (Export Duty) से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया।
भाग 3: निजीकरण (Privatisation) और नवरत्न नीतियां
Q53. निजीकरण (Privatisation) से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) के स्वामित्व या प्रबंधन का सरकार द्वारा पूरी तरह या आंशिक रूप से त्याग करना।
Q54. सरकारी कंपनियाँ निजी क्षेत्र में किन दो प्रकारों से परिवर्तित होती हैं?
उत्तर: (क) स्वामित्व और प्रबंधन से सरकार का बाहर होना, (ख) सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सीधे निजी क्षेत्र को बेच देना।
Q55. विनिवेश (Disinvestment) किसे कहा जाता है?
उत्तर: किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम द्वारा जनसामान्य या निजी क्षेत्र को इक्विटी (शेयर) की बिक्री करना।
Q56. सरकार के अनुसार विनिवेश का मुख्य ध्येय क्या था?
उत्तर: वित्तीय अनुशासन बढ़ाना और सार्वजनिक उपक्रमों के आधुनिकीकरण में सहायता देना।
Q57. सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) की कार्यकुशलता सुधारने के लिए उन्हें कौन-से तीन विशेष दर्जे दिए?
उत्तर: महारत्न (Maharatna), नवरत्न (Navratna) और लघुरत्न (Miniratna)।
Q58. सार्वजनिक उपक्रमों को महारत्न, नवरत्न या लघुरत्न का दर्जा देने का मुख्य लाभ क्या था?
उत्तर: उन्हें कंपनी संचालन और प्रबंधकीय निर्णयों में अधिक वित्तीय व प्रशासनिक स्वायत्तता (Autonomy) मिली।
Q59. ‘नवरत्न‘ शब्द का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
उत्तर: सम्राट विक्रमादित्य के राज-दरबार के नौ विशिष्ट विद्वान व गणमान्य जन।
Q60. अधिकांश लाभ कमा रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना किस दशक में की गई थी?
उत्तर: 1950 और 1960 के दशकों में।
Q61. 1950-60 के दशक में सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, आत्मनिर्भरता और प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन करना।
Q62. अध्याय के अनुसार, ‘महारत्न‘ (Maharatna) श्रेणी के दो प्रमुख उदाहरण कौन-से हैं?
उत्तर: (अ) इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) और (ब) स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL)।
Q63. अध्याय के अनुसार, ‘नवरत्न‘ (Navratna) श्रेणी के दो प्रमुख उदाहरण दें?
उत्तर: (अ) हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), (ब) महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)।
Q64. अध्याय के अनुसार, ‘लघुरत्न‘ (Miniratna) श्रेणी के प्रमुख उदाहरण कौन-से हैं?
उत्तर: (अ) भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL), (ब) एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), (स) इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC)।
Q65. विनिवेश के आलोचकों का इसके बारे में क्या मत है?
उत्तर: आलोचकों के अनुसार यह सार्वजनिक संपत्ति को निहित स्वार्थों के लिए ओने-पौने दामों में निजी व्यापारियों को बेचने जैसा है।
Q66. वित्तीय वर्ष 1991-92 में सरकार ने विनिवेश द्वारा कितना राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा था?
उत्तर: 2,500 करोड़ रुपये।
Q67. वर्ष 1991-92 में सरकार ने लक्ष्य से अधिक कितना विनिवेश राजस्व जुटाया था?
उत्तर: 3,040 करोड़ रुपये अधिक (कुल 5,540 करोड़ रुपये)।
Q68. वर्ष 2022-23 में सरकार विनिवेश के माध्यम से लगभग कितना फंड जुटाने में सक्षम रही?
उत्तर: लगभग 46,000 करोड़ रुपये।
Q69. विनिवेश से प्राप्त राशि का उपयोग सरकार ने कहाँ किया, जो आलोचना का कारण बना?
उत्तर: इसका उपयोग सामाजिक बुनियादी ढांचे या उपक्रमों के विकास में न करके सरकार के बजटीय राजस्व घाटे को कम करने में किया गया।
भाग 4: वैश्वीकरण (Globalisation) और बाह्य प्रापण (Outsourcing)
Q70. वैश्वीकरण (Globalisation) का क्या अर्थ है?
उत्तर: किसी देश की अर्थव्यवस्था का विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण करना, जिससे सीमामुक्त विश्व का निर्माण हो सके।
Q71. वैश्वीकरण की प्रक्रिया का एक अति विशिष्ट और महत्वपूर्ण परिणाम क्या रहा है?
उत्तर: बाह्य प्रापण या आउटसोर्सिंग (Outsourcing)।
Q72. बाह्य प्रापण (Outsourcing) किसे कहते हैं?
उत्तर: जब कोई कंपनी किसी बाहरी विदेशी संस्था या स्रोत से नियमित रूप से व्यावसायिक सेवाएं (जैसे कानूनी सलाह, कंप्यूटर सेवा, कॉल सेंटर) प्राप्त करती है।
Q73. किस क्रांति ने बाह्य प्रापण (आउटसोर्सिंग) को एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि बना दिया है?
उत्तर: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और संचार माध्यमों में आई क्रांति ने।
Q74. बाह्य प्रापण के अंतर्गत दी जाने वाली किन्हीं चार प्रमुख सेवाओं के नाम बताएं?
उत्तर: कॉल सेंटर (ध्वनि आधारित सेवा), लेखांकन (Accounting), बैंकिंग सेवाएं, चिकित्सा संबंधी परामर्श व शिक्षण।
Q75. भारत विश्व का सबसे प्रमुख ‘बाह्य प्रापण केंद्र‘ (Outsourcing Hub) क्यों बन गया है?
उत्तर: भारत में कम मजदूरी दरें (Low Wages) तथा कुशल श्रम शक्ति (Skilled Workforce) की प्रचुर उपलब्धता के कारण।
Q76. विदेशी बाजारों में पैर फैलाने वाली भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी कौन सी है जिसका परिचालन 16 देशों में है?
उत्तर: ओएनजीसी विदेश (ONGC Videsh)।
Q77. 1907 में स्थापित भारत की वह निजी स्टील कंपनी कौन सी है जो 26 देशों में कार्यरत है और दुनिया की शीर्ष 10 वैश्विक कंपनियों में शामिल है?
उत्तर: टाटा स्टील (Tata Steel)।
Q78. भारत की शीर्ष पाँच आईटी (IT) कंपनियों में शामिल उस कंपनी का नाम क्या है जिसके 31 देशों में कार्यालय हैं?
उत्तर: एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies)।
Q79. दवा निर्माण (Pharmaceuticals) के क्षेत्र में किस भारतीय कंपनी के दुनिया भर में विनिर्माण संयंत्र और अनुसंधान केंद्र हैं?
उत्तर: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (Dr. Reddy’s Laboratories)।
Q80. वैश्वीकरण के विरोध में विद्वानों का क्या मुख्य तर्क है?
उत्तर: यह राष्ट्रीय सरकारों के महत्व को कम करता है और अमीर देशों द्वारा विकासशील देशों के बाजारों पर कब्जा करने की साजिश है।
भाग 5: विश्व व्यापार संगठन (WTO)
Q81. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना किस वर्ष की गई थी?
उत्तर: वर्ष 1995 में।
Q82. WTO से पूर्व वैश्विक व्यापार की देखरेख करने वाली संस्था का नाम क्या था?
उत्तर: व्यापार और सीमा शुल्क महासंधि – गैट (GATT – General Agreement on Tariffs and Trade)।
Q83. गैट (GATT) की स्थापना किस वर्ष और कितने देशों द्वारा मिलकर की गई थी?
उत्तर: वर्ष 1948 में, 23 देशों द्वारा।
Q84. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्य ध्येय क्या है?
उत्तर: नियम आधारित एक ऐसी विश्व व्यापार व्यवस्था की स्थापना करना जिसमें कोई देश मनमाने ढंग से बाधाएं खड़ी न कर सके।
Q85. WTO की संधियों में वस्तुओं के विनिमय के साथ-साथ और किस चीज़ को स्थान दिया गया है?
उत्तर: सेवाओं के विनिमय (Trade in Services) को।
Q86. सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए WTO क्या कदम उठाता है?
उत्तर: प्रशुल्क (Tariffs) और अप्रशुल्क अवरोधकों (Non-Tariff Barriers) को हटाना।
Q87. विकासशील देशों को WTO में किस बात को लेकर छला हुआ महसूस होता है?
उत्तर: विकसित देश अपने यहाँ कृषि सहायिकी (Subsidy) जारी रखते हैं जबकि विकासशील देशों को अपने बाज़ार खोलने के लिए मजबूर करते हैं।
Q88. भारत ने WTO के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए क्या किया?
उत्तर: आयातों पर से मात्रात्मक प्रतिबंध हटाए और प्रशुल्क दरों को बहुत कम कर दिया।
भाग 6: सुधारकालीन भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा और प्रभाव
Q89. अर्थशास्त्री किसी अर्थव्यवस्था की संवृद्धि (Growth) का मापन किस आधार पर करते हैं?
उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद (GDP – Gross Domestic Product) द्वारा।
Q90. आर्थिक सुधारों की अवधि (1991 के बाद) में भारत के किस क्षेत्रक (Sector) में सबसे तीव्र वृद्धि दर्ज की गई?
उत्तर: सेवा क्षेत्रक (Service Sector) में।
Q91. सुधार अवधि के दौरान किस क्षेत्रक की संवृद्धि दर में लगातार उतार-चढ़ाव या गिरावट देखी गई?
उत्तर: कृषि क्षेत्रक (Agricultural Sector) में।
Q92. 1980-91 के दौरान भारत की औसत जीडीपी संवृद्धि दर कितने प्रतिशत थी?
उत्तर: 5.6 प्रतिशत।
Q93. वर्ष 2021-22 में भारत की कुल जीडीपी संवृद्धि दर बढ़कर कितने प्रतिशत हो गई थी?
उत्तर: 9.4 प्रतिशत।
Q94. सारणी 3.1 के अनुसार, वर्ष 2021-22 में उद्योग क्षेत्रक की संवृद्धि दर क्या थी?
उत्तर: 12.7 प्रतिशत।
Q95. सारणी 3.1 के अनुसार, वर्ष 2007-12 की अवधि में सेवा क्षेत्र की संवृद्धि दर कितनी थी?
उत्तर: 10.0 प्रतिशत।
Q96. सकल वर्धित मूल्य (GVA) का आकलन कैसे किया जाता है?
उत्तर: सकल घरेलू उत्पाद में सहायिकी (Subsidy) को जोड़कर और अप्रत्यक्ष कर को घटाकर।
Q97. भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), जो 1990-91 में $100 मिलियन था, वर्ष 2022-23 में बढ़कर कितना हो गया?
उत्तर: 23 बिलियन डॉलर ($23 Billion)।
Q98. वर्ष 2023-24 में भारत का विदेशी मुद्रा रिज़र्व बढ़कर किस स्तर तक पहुँच गया?
उत्तर: 646 बिलियन डॉलर ($646 Billion)।
Q99. वर्ष 2011 में भारत विदेशी मुद्रा रिज़र्व के मामले में विश्व में कौन-से स्थान पर था?
उत्तर: सातवां सबसे बड़ा धारक।
Q100. 1991 के बाद भारत किन प्रमुख वस्तुओं के एक सफल निर्यातक के रूप में वैश्विक बाजार में स्थापित हुआ?
उत्तर: वाहन (Automobiles), कल-पुर्जे, दवाएं, इंजीनियरी उत्पाद और सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाद।
Q101. सुधारों के बाद आर्थिक संवृद्धि बढ़ने के बावजूद आलोचक इसे ‘रोजगार विहीन संवृद्धि‘ क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि सुधारों से प्रेरित संवृद्धि देश में पर्याप्त रोजगार के अवसरों का सृजन नहीं कर पाई है।
Q102. 1991 के बाद कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक निवेश में कमी का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: सिंचाई, बिजली, सड़क और शोध-प्रसार जैसी बुनियादी संरचनाएं कमजोर हुईं।
Q103. कृषि क्षेत्र में किस इनपुट पर से सब्सिडी (सहायिकी) हटाने के कारण किसानों की उत्पादन लागत बढ़ गई?
उत्तर: उर्वरक (Fertilizer) सहायिकी की आंशिक समाप्ति से।
Q104. आर्थिक सुधारों के कारण भारतीय किसानों को किस वैश्विक चुनौती का सामना करना पड़ा?
उत्तर: आयात शुल्क में कटौती और मात्रात्मक प्रतिबंध हटने से विदेशी प्रतिस्पर्धा का।
Q105. निर्यातोन्मुखी कृषि नीति के कारण भारतीय खेती में क्या बदलाव आया?
उत्तर: आंतरिक उपभोग की खाद्यान्न फसलों के स्थान पर निर्यात के लिए नकदी फसलों (Cash Crops) पर बल दिया जाने लगा।
Q106. खाद्यान्न फसलों से नकदी फसलों की ओर झुकाव का देश पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: देश में खाद्यान्न कीमतों पर दबाव बढ़ गया (महंगाई बढ़ी)।
Q107. सुधार काल में घरेलू औद्योगिक उत्पादों की मांग गिरने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: विदेशों से आने वाले सस्ते आयात और बुनियादी ढांचे में अपर्याप्त निवेश।
Q108. वैश्वीकरण के दौर में भारत के घरेलू कपड़ा उद्योग को किस देश के अप्रशुल्क अवरोधकों (Non-Tariff Barriers) का सामना करना पड़ा?
उत्तर: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) द्वारा भारत और चीन से आयात पर कोटा प्रतिबंध न हटाने के कारण।
Q109. ‘सिरीसिला त्रासदी‘ (Siricilla Tragedy) का संबंध किस राज्य और किस उद्योग से है?
उत्तर: आंध्र प्रदेश के हथकरघा/विद्युत करघा (Powerloom) उद्योग से।
Q110. सिरीसिला में 50 बुनकरों को आत्महत्या के लिए क्यों विवश होना पड़ा था?
उत्तर: बिजली क्षेत्र में सुधार के कारण बिजली दरों में भारी वृद्धि और मजदूरी में कटौती की मार से आजीविका संकट उत्पन्न होने के कारण।
Q111. आर्थिक सुधारों के कारण कर राजस्व (Tax Revenue) में वांछित वृद्धि न होने का क्या कारण था?
उत्तर: करों की दरों में कटौती की गई और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए निवेशकों को भारी टैक्स छूट (Tax Incentives) दी गई।
Q112. वित्तीय सुधारों के बाद भारत में आर्थिक संवृद्धि मुख्य रूप से किन इने-गिने क्षेत्रों तक सीमित रही?
उत्तर: दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, मनोरंजन, पर्यटन, परिचर्या सेवाएं और भवन निर्माण।
Q113. देश के कौन से दो बड़े आधारभूत क्षेत्रक सुधारों से पूरी तरह लाभान्वित नहीं हो पाए, जो करोड़ों लोगों को आजीविका देते हैं?
उत्तर: कृषि और विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्रक।
भाग 7: शब्दावली, अवधारणाएं और विविध बहुविकल्पीय संकलन (MCQ Special)
Q114. ‘द्विपक्षीय व्यापार’ (Bilateral Trade) से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: दो देशों के बीच होने वाला व्यापारिक विनिमय।
Q115. ‘बहुपक्षीय व्यापार‘ (Multilateral Trade) का क्या अर्थ है?
उत्तर: दो से अधिक या अनेक देशों के बीच आपस में होने वाला व्यापार।
Q116. प्रशुल्क अवरोधक (Tariff Barriers) क्या होते हैं?
उत्तर: आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला सीमा शुल्क বা टैक्स जो उनकी कीमतों को बढ़ाता है।
Q117. अप्रशुल्क अवरोधक (Non-Tariff Barriers) क्या होते हैं?
उत्तर: करों के अलावा अन्य प्रतिबंध जैसे कोटा निर्धारण, गुणवत्ता मानक या आयात लाइसेंसिंग नियम।
Q118. भारत में किस वर्ष को ‘आर्थिक सुधारों का वर्ष‘ कहा जाता है?
उत्तर: वर्ष 1991 को।
Q119. नई आर्थिक नीति (NEP 1991) लागू करने के समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे?
(नोट: पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के अतिरिक्त सामान्य ज्ञान का प्रश्न)
उत्तर: पी. वी. नरसिम्हा राव।
Q120. 1991 के आर्थिक सुधारों के सूत्रधार और तत्कालीन वित्त मंत्री कौन थे?
(नोट: पाठ्यपुस्तक के ज्ञान के अतिरिक्त सामान्य ज्ञान का प्रश्न)
उत्तर: डॉ. मनमोहन सिंह।
Q121. मिश्रित अर्थव्यवस्था में किन दो व्यवस्थाओं का सह-अस्तित्व होता है?
उत्तर: पूँजीवादी (निजी क्षेत्र) और समाजवादी (सार्वजनिक क्षेत्र) अर्थव्यवस्था का।
Q122. ‘लाइसेंस राज‘ या विनियमीकरण की समाप्ति उदारीकरण के किस क्षेत्र का हिस्सा थी?
उत्तर: औद्योगिक क्षेत्रक सुधार का।
Q123. 1991 की औद्योगिक नीति में किन वस्तुओं पर लाइसेंस बरकरार रखा गया क्योंकि वे पर्यावरण के लिए संवेदनशील थीं?
उत्तर: जोखिम भरे रसायन और औद्योगिक विस्फोटक।
Q124. क्या उदारीकरण के तहत सभी उद्योगों के लिए बाजार को मूल्य निर्धारण की छूट दी गई थी?
उत्तर: हाँ, अधिकांश उद्योगों में बाज़ार को कीमतों के निर्धारण की अनुमति मिल गई।
Q125. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI/FII) को भारतीय शेयर बाजार में निवेश की अनुमति किस सुधार के तहत मिली?
उत्तर: वित्तीय क्षेत्रक सुधार के तहत।
Q126. सरकार की राजकोषीय नीति का मुख्य उपकरण क्या होता है?
उत्तर: कराधान (टैक्स) व्यवस्था और सार्वजनिक बजट व्यय।
Q127. निगम कर (Corporate Tax) किस पर लगाया जाता है?
उत्तर: व्यावसायिक कंपनियों के शुद्ध लाभ पर।
Q128. भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का मुख्य नारा क्या है?
उत्तर: ‘एक राष्ट्र, एक टैक्स, एक बाजार’।
Q129. विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये के अवमूल्यन का तात्कालिक उद्देश्य क्या था?
उत्तर: भुगतान संतुलन के संकट को दूर करना और निर्यात को सस्ता कर बढ़ावा देना।
Q130. 1980 के दशक की नीतियों की मुख्य विफलता क्या थी?
उत्तर: अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण की कमी और निर्यात संवर्धन पर अपर्याप्त ध्यान।
Q131. भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों को प्रवेश की अनुमति किस वर्ष के सुधारों के बाद मिली?
उत्तर: 1991 के सुधारों के बाद।
Q132. वैश्वीकरण के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: भारतीय अर्थव्यवस्था का शेष विश्व के साथ जुड़ाव और परस्पर निर्भरता बढ़ी।
Q133. गैट (GATT) का पूर्ण रूप क्या है?
उत्तर: General Agreement on Tariffs and Trade।
Q134. डब्ल्यूटीओ (WTO) का मुख्यालय कहाँ स्थित है?
(नोट: सामान्य ज्ञान आधारित लिंक प्रश्न)
उत्तर: जेनेवा, स्विट्जरलैंड।
Q135. किस वर्ष भारत में कृषि और औद्योगिक उपभोक्ता वस्तुओं के आयात को पूरी तरह मात्रात्मक प्रतिबंधों से मुक्त किया गया?
उत्तर: अप्रैल 2001 में।
Q136. सुधार काल में किस क्षेत्रक की वृद्धि दर सबसे न्यूनतम (लगभग 1.5%) दर्ज की गई थी?
उत्तर: वर्ष 2012-13 में कृषि क्षेत्र की।
Q137. 1991 के सुधारों को किस अंतर्राष्ट्रीय दबाव में शुरू किया गया था?
उत्तर: विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के शर्तों के दबाव में।
Q138. निजी पूँजी और बेहतर प्रबंधन क्षमता का उपयोग करने के लिए सरकार ने क्या नीति अपनाई?
उत्तर: सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण और विनिवेश।
Q139. ओएनजीसी (ONGC) किस प्रकार का उद्यम है?
उत्तर: सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सार्वजनिक क्षेत्रक की एक सहायक कंपनी)।
Q140. भारत में कॉल सेंटर उद्योग की तीव्र वृद्धि का मुख्य श्रेय किस प्रक्रिया को जाता है?
उत्तर: वैश्वीकरण के अंतर्गत बाह्य प्रापण (Outsourcing) को।
Q141. बजट के ‘राजस्व घाटे‘ (Revenue Deficit) को पाटने के लिए सरकार ने किस विवादित राशि का उपयोग किया?
उत्तर: सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश से प्राप्त धन का।
Q142. सुधारों के बाद किस देश ने भारत के कपड़ा आयातों पर से अपना कोटा प्रतिबंध नहीं हटाया था?
उत्तर: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने।
Q143. उदारीकरण की नीति के तहत आरबीआई की भूमिका नियंत्रक से बदलकर क्या हो गई?
उत्तर: वित्तीय क्षेत्रक का सहायक या मार्गदर्शक।
Q144. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को स्वायत्तता देने के लिए ‘महारत्न‘ का दर्जा कब से शुरू हुआ?
उत्तर: नवउदारवादी वातावरण में सुधारों के बाद उपक्रमों की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से।
Q145. भारत में ‘हरित क्रांति‘ की सफलता के पीछे मुख्य कारक क्या था जो सुधार काल में कम हो गया?
उत्तर: कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर किया जाने वाला भारी सार्वजनिक व्यय।
Q146. उदारीकरण के बाद अधिकांश विनिर्माण उद्योगों की वृद्धि धीमी होने का मुख्य कारण क्या था?
उत्तर: सस्ते विदेशी आयातों द्वारा घरेलू वस्तुओं की मांग को प्रतिस्थापित करना।
Q147. भारत में करदाताओं द्वारा नियमों के अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए क्या किया गया?
उत्तर: कर जमा करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया और टैक्स दरों को कम किया गया।
Q148. वैश्वीकरण के आलोचकों के अनुसार इससे किस चीज़ को खतरा उत्पन्न हो गया है?
उत्तर: गरीब देशवासियों के कल्याण के साथ-साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान को।
Q149. सुधार काल में किस वर्ष कुल जीडीपी संवृद्धि दर नकारात्मक (-5.8%) दर्ज की गई थी?
उत्तर: वर्ष 2020-21 के दौरान (कोविड महामारी वर्ष के आँकड़े)।
Q150. वर्ष 2016 के किस बड़े टैक्स सुधार ने भारत को एक एकीकृत साझा राष्ट्रीय बाज़ार बनाया?
उत्तर: वस्तु एवं सेवा कर (GST) के क्रियान्वयन ने।
