विद्रोह का ढर्रा, सैन्य विद्रोह कैसे शुरू हुए? नेता और अनुयायी, अफवाहे और भविष्यवाणी, यह गिलास फल हमारे मुंह में ही आकर गिरेगा.
- 1857 का विद्रोह किस तारीख को शुरू हुआ था?
उत्तर: 10 मई 1857 को। - 1857 के विद्रोह की शुरुआत किस छावनी से हुई थी?
उत्तर: मेरठ छावनी से। - मेरठ छावनी में विद्रोह की हलचल सबसे पहले सेना की किस टुकड़ी से शुरू हुई थी?
उत्तर: भारतीय सैनिकों से बनी पैदल सेना (इन्फैंट्री) से। - पैदल सेना के बाद मेरठ में यह विद्रोह किनमें और कहाँ तक फैल गया?
उत्तर: घुड़सवार फ़ौज और फिर शहर व आसपास के देहात तक। - मेरठ के विद्रोही सिपाहियों ने सबसे पहले किस स्थान पर कब्ज़ा किया था?
उत्तर: शस्त्रागार पर, जहाँ हथियार और गोला-बारूद रखे थे। - मेरठ में सिपाहियों ने किन सरकारी इमारतों को निशाना बनाकर तबाह और लूटा था?
उत्तर: रिकॉर्ड दफ़्तर, जेल, अदालत, डाकखाने और सरकारी खजाने को। - मेरठ को दिल्ली से जोड़ने वाले किस संचार माध्यम को विद्रोहियों ने शुरुआत में ही काट दिया था?
उत्तर: टेलीग्राफ लाइन को। - मेरठ के सिपाहियों का जत्था दिल्ली की तरफ़ कब रवाना हुआ था?
उत्तर: 10 मई 1857 को अंधेरा पसरते ही। - मेरठ के विद्रोही सिपाहियों का जत्था दिल्ली के लाल किले के फाटक पर कब पहुँचा?
उत्तर: 11 मई 1857 को तड़के (सुबह)। - जब विद्रोही सिपाही दिल्ली पहुँचे, तब मुस्लिम समाज का कौन सा पवित्र महीना चल रहा था?
उत्तर: रमज़ान का महीना। - 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने पर सिपाहियों ने लाल किले पर किस मुगल सम्राट से मुलाकात की?
उत्तर: बहादुर शाह द्वितीय (बहादुर शाह जफ़र) से। - सुबह के समय मुगल सम्राट बहादुर शाह क्या करके उठे थे जब सिपाही फाटक पर पहुँचे?
उत्तर: नमाज़ पढ़कर और सहरी खाकर। - ‘सहरी’ शब्द से इतिहास और संस्कृति के संदर्भ में क्या तात्पर्य है?
उत्तर: रो़ज़े के दिनों में सूरज उगने से पहले किया जाने वाला भोजन। - मेरठ के सिपाहियों ने बहादुर शाह को अंग्रेजों को मारने का क्या कारण बताया?
उत्तर: अंग्रेजों द्वारा गाय और सूअर की चर्बी से लिपटे कारतूसों को दाँतों से खींचने के लिए मजबूर करना। - सिपाहियों के अनुसार चर्बी वाले कारतूसों के इस्तेमाल से भारतीय समाज को क्या नुकसान होता?
उत्तर: हिन्दू और मुसलमान दोनों का धर्म भ्रष्ट हो जाता। - दिल्ली पहुँचे सिपाहियों ने लाल किले में दाखिल होते समय किस औपचारिकता का उल्लंघन किया?
उत्तर: वे दरबार के शिष्टाचार का पालन किए बिना बेधड़क किले में घुस गए। - दिल्ली आए विद्रोही सिपाहियों की मुख्य माँग बहादुर शाह से क्या थी?
उत्तर: कि बादशाह उन्हें अपना आशीर्वाद और नेतृत्व दें। - बहादुर शाह ने शुरुआत में झिझकने के बाद सिपाहियों की माँग क्यों मान ली?
उत्तर: क्योंकि वे चारों तरफ़ से विद्रोही सिपाहियों से घिरे थे और उनके पास कोई और चारा न था। - बहादुर शाह द्वारा विद्रोह को समर्थन देने से आंदोलन को क्या बड़ा लाभ हुआ?
उत्तर: विद्रोह को एक वैध मान्यता हासिल हो गई, क्योंकि अब इसे मुगल सम्राट के नाम पर चलाया जा सकता था। - दिल्ली पर विद्रोहियों के कब्ज़े और बहादुर शाह के समर्थन की खबर के बाद उत्तर भारत में कब तक शांति रही?
उत्तर: 12 और 13 मई 1857 को। - दिल्ली की घटना के बाद उत्तर भारत के किन क्षेत्रों में विद्रोह के स्वर ते़ज होने लगे?
उत्तर: गंगा घाटी की छावनियों और दिल्ली के पश्चिम की छावनियों में। - विभिन्न सैन्य छावनियों में विद्रोह की शुरुआत के लिए क्या विशेष संकेत दिए जाते थे?
उत्तर: शाम के समय तोप का गोला दागा जाना या बिगुल बजाना। - सैन्य छावनियों में विद्रोह शुरू होते ही सिपाहियों की पहली कार्रवाई क्या होती थी?
उत्तर: शस्त्रागार पर कब्ज़ा करना और सरकारी खजाने को लूटना। - विद्रोह के दौरान हिन्दू और मुसलमानों को एकजुट होने तथा फ़िरंगियों का सफाया करने के लिए किन भाषाओं में अपीलें जारी की गईं?
उत्तर: हिन्दी, उर्दू और फ़ारसी भाषा में। - ‘फ़िरंगी’ शब्द मूल रूप से किस भाषा का शब्द है?
उत्तर: फ़ारसी भाषा का। - ‘फ़िरंगी’ शब्द की उत्पत्ति संभवतः किस यूरोपीय शब्द से मानी जाती है?
उत्तर: ‘फ्रैंक’ (जिससे फ्रांस का नाम पड़ा है) शब्द से। - उर्दू और हिन्दी में ‘फ़िरंगी’ शब्द का प्रयोग पारम्परिक रूप से किस दृष्टि से किया जाता था?
उत्तर: पश्चिमी लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए अपमानजनक दृष्टि से। - लखनऊ, कानपुर और बरेली जैसे बड़े शहरों में कौन से भारतीय वर्ग विद्रोहियों के गुस्से का शिकार बने?
उत्तर: साहूकार और अमीर लोग। - आम किसान साहूकारों और अमीरों को अपना उत्पीड़क समझने के साथ-साथ किसका पिट्ठू मानते थे?
उत्तर: अंग्रेजों का पिट्ठू। - मई और जून 1857 के महीनों में ब्रिटिश शासन की क्या स्थिति थी?
उत्तर: अंग्रेजों के पास विद्रोहियों का कोई जवाब नहीं था और ब्रिटिश शासन ताश के किले की तरह बिखर गया था। - 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली के आम जनजीवन की गवाही देने वाले किस प्रमुख अख़बार की रिपोर्ट अध्याय में शामिल है?
उत्तर: दिल्ली उर्दू अख़बार। - दिल्ली उर्दू अख़बार की 14 जून 1857 की रिपोर्ट के अनुसार बाज़ार में किन बुनियादी सब्ज़ियों की किल्लत थी?
उत्तर: कद्दू, बैंगन, आलू और अरबी की। - सब्ज़ी बेचने वाले दुकानदारों को तत्कालीन स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता था?
उत्तर: कुँजड़े। - दिल्ली में अव्यवस्था फैलने के कारण किन लोगों ने पानी भरना बंद कर दिया था जिससे कुलीन वर्ग (शुर्फ़ा) परेशान था?
उत्तर: पानी भरने वालों (भिश्तियों) ने। - दिल्ली उर्दू अख़बार ने नगर में सफाई व्यवस्था ठप होने के बाद सफाईकर्मियों के लिए किस शब्द का प्रयोग किया?
उत्तर: हलालखोर (जो अब हरामखोर हो गए थे)। - अख़बार के अनुसार सफाई न होने से दिल्ली में किस बात का सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया था?
उत्तर: महामारी, गंदगी और चेचक जैसी बीमारियाँ फैलने का। - विभिन्न सैन्य छावनियों के सिपाहियों के बीच अच्छे संचार का क्या प्रमाण मिलता है?
उत्तर: एक छावनी द्वारा दूसरी छावनी को अपने धार्मिक निर्णयों की चिट्ठी लिखना। - मई की शुरुआत में किस सैन्य टुकड़ी ने नए कारतूसों का इस्तेमाल करने से सबसे पहले इनकार किया था?
उत्तर: सातवीं अवध इर्रेगुलर कैवेलरी ने। - सातवीं अवध इर्रेगुलर कैवेलरी ने अपने धर्म की रक्षा के फैसले की जानकारी किस रेजिमेंट को भेजी थी?
उत्तर: 48वीं नेटिव इन्फैंट्री को। - विद्रोह के दौरान अवध मिलिट्री पुलिस के किस ब्रिटिश कैप्टन की सुरक्षा का ज़िम्मा भारतीय सिपाहियों पर था?
उत्तर: कैप्टन हियर्से की। - कैप्टन हियर्से की सुरक्षा के समय वहाँ कौन सी विद्रोही नेटिव इन्फैंट्री भी तैनात थी?
उत्तर: 41वीं नेटिव इन्फैंट्री। - 41वीं नेटिव इन्फैंट्री ने अवध मिलिट्री पुलिस से कैप्टन हियर्से के संबंध में क्या माँग की थी?
उत्तर: कि या तो वे हियर्से को मौत के घाट उतार दें या उसे 41वीं इन्फैंट्री के हवाले कर दें। - कैप्टन हियर्से के विवाद को सुलझाने के लिए विद्रोही रेजिमेंटों ने क्या रास्ता निकाला था?
उत्तर: हर रेजिमेंट के देशी अफ़सरों की एक सामूहिक ‘पंचायत’ बुलाई गई थी। - 1857 के शुरुआती इतिहासकारों में से किसने लिखा है कि ये पंचायतें रात को कानपुर सिपाही लाइनों में जुटती थीं?
उत्तर: चार्ल्स बॉल ने। - विद्रोही सिपाहियों के बीच जातिगत और रहन-सहन की क्या समानता थी जिससे वे सामूहिक फैसले ले पाते थे?
उत्तर: वे सिपाही लाइनों में साथ रहते थे, उनकी जीवनशैली समान थी और वे प्रायः एक ही जाति के होते थे। - सीतापुर के किस देशी ईसाई पुलिस इंस्पेक्टर का अनुभव 1857 की सैनिक अवज्ञा को समझने में मदद करता है?
उत्तर: फ़्रांस्वां सिस्तन का। - पुलिस इंस्पेक्टर फ़्रांस्वां सिस्तन मजिस्ट्रेट से शिष्टाचारवश मिलने कहाँ गए थे?
उत्तर: सहारनपुर। - सिस्तन से सहारनपुर में मिलने आए बिजनौर के मुस्लिम तहसीलदार की गुप्त भूमिका क्या थी?
उत्तर: वह बाद में बिजनौर के विद्रोहियों का सबसे बड़ा नेता निकला। - बिजनौर के उस मुस्लिम तहसीलदार ने सिस्तन से गुप्त रूप से क्या कहा था?
उत्तर: “भरोसा रखो, इस बार हम कामयाब होंगे। मामला काबिल हाथों में है।” - अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए विद्रोहियों ने किस वर्ग के लोगों को अपना नेता बनाने का प्रयास किया?
उत्तर: उन पारंपरिक राजाओं और नवाबों को जो अंग्रेजों से पहले शासक थे। - कानपुर में सिपाहियों और आम जनता ने बग़ावत का नेतृत्व संभालने के लिए किसे विवश किया?
उत्तर: पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी नाना साहिब को। - झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई को बग़ावत की कमान अपने हाथों में क्यों लेनी पड़ी?
उत्तर: आम जनता और सिपाहियों के भारी दबाव के कारण। - बिहार के आरा क्षेत्र से किस स्थानीय जमींदार ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था?
उत्तर: कुँवर सिंह ने। - अवध के किस लोकप्रिय शासक को अंग्रेजों ने गद्दी से हटाकर राज्य पर अवैध कब्ज़ा किया था?
उत्तर: नवाब वाजिद अली शाह को। - लखनऊ में ब्रिटिश राज के ढहने की खबर पर जनता ने नवाब के किस युवा बेटे को अपना नेता घोषित किया?
उत्तर: बिरजिस कद्र को। - मेरठ छावनी से आ रही खबरों के अनुसार सिपाहियों से बार-बार मिलने आने वाला रहस्यमयी व्यक्ति कौन था?
उत्तर: हाथी पर सवार एक फ़कीर। - अवध पर ब्रिटिश कब्ज़े के बाद लखनऊ में फिरंगी राज के खिलाफ अलख जगाने वाले कौन लोग थे?
उत्तर: बहुत सारे धार्मिक नेता और स्वयंभू पैगम्बर-प्रचारक। - उत्तर प्रदेश के बड़ौत परगना में विद्रोही ग्रामीणों को संगठित करने वाले स्थानीय नेता कौन थे?
उत्तर: शाह मल। - छोटा नागपुर स्थित सिंहभूम के किस आदिवासी काश्तकार ने कोल आदिवासियों का नेतृत्व संभाला था?
उत्तर: गोनू ने। - 1858 के अंत में जब विद्रोह विफल हो गया, तो नाना साहिब पलायन करके कहाँ चले गए थे?
उत्तर: नेपाल। - शाह मल उत्तर प्रदेश के किस जिले या क्षेत्र के रहने वाले थे?
उत्तर: बड़ौत परगना (जो जाट बहुल क्षेत्र था)। - शाह मल का जाट कुटुम्ब कुल कितने गाँवों में फैला हुआ था, जिसे स्थानीय भाषा में क्या कहा जाता था?
उत्तर: चौरासी देस (84 गाँव)। - चौरासी देस (बड़ौत) के ग्रामीण ब्रिटिश सरकार की किस व्यवस्था को दमनकारी मानते थे?
उत्तर: ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्था (लगान की ऊँची दर और सख्त वसूली) को। - अंग्रेजों की सख्त लगान नीति के कारण बड़ौत के किसानों की ज़मीनें किनके पास जा रही थीं?
उत्तर: बाहरी व्यापारियों और महाजनों के हाथों में। - शाह मल ने विद्रोह की योजना बनाने के लिए लोगों को कैसे एकजुट किया?
उत्तर: उन्होंने रात के साए में गाँव-गाँव जाकर मुखियाओं और काश्तकारों से गुप्त बात की। - शाह मल के आदमियों ने सरकारी सेना का रास्ता रोकने के लिए क्या कदम उठाए?
उत्तर: उन्होंने सरकारी इमारतों पर हमला किया, नदी का पुल ध्वस्त किया और पक्की सड़कों को खोद डाला। - 1857 के विद्रोहियों द्वारा अंग्रेजों के पुलों और पक्की सड़कों को तोड़ने का प्रतीकात्मक कारण क्या था?
उत्तर: क्योंकि वे इन बुनियादी ढाँचों को ब्रिटिश शासन का प्रतीक मानते थे। - शाह मल ने दिल्ली में लड़ रहे विद्रोही सिपाहियों की किस प्रकार सहायता की थी?
- उत्तर: उन्होंने दिल्ली के सिपाहियों को भारी मात्रा में रसद (खाद्य सामग्री) पहुँचाई थी।
- शाह मल ने किन दो प्रमुख ब्रिटिश केंद्रों के बीच की तमाम सरकारी संचार व्यवस्था ठप कर दी थी?
- उत्तर: ब्रिटिश हेडक्वार्टर (दिल्ली) और मेरठ के बीच।
- शाह मल ने एक अंग्रेज अफ़सर के खाली बंगले पर कब्ज़ा कर उसे क्या नाम दिया था?
उत्तर: “न्याय भवन”। - शाह मल ‘न्याय भवन’ से स्थानीय स्तर पर क्या कार्य संचालित करते थे?
उत्तर: वे वहाँ बैठकर ग्रामीणों के आपसी झगड़ों और विवादों का फ़ैसला करते थे। - विद्रोही किसान शाह मल की मृत्यु कब हुई थी?
उत्तर: जुलाई 1857 में एक युद्ध के दौरान। - मौलवी अहमदुल्ला शाह 1857 के विद्रोह के एक प्रमुख नेता थे, उन्होंने कहाँ शिक्षा प्राप्त की थी?
उत्तर: हैदराबाद में। - मौलवी अहमदुल्ला शाह को जनता के बीच किस उपनाम से जाना जाता था?
उत्तर: ‘डंका शाह’। - मौलवी अहमदुल्ला शाह को ‘डंका शाह’ क्यों कहा जाता था?
उत्तर: क्योंकि वे जब चलते थे तो उनकी पालकी के आगे-आगे ढोल (डंका) बजता था और पीछे समर्थक होते थे। - मौलवी अहमदुल्ला शाह ने किस वर्ष अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का प्रचार करना शुरू किया था?
उत्तर: 1856 में। - जब 1856 में मौलवी अहमदुल्ला शाह लखनऊ पहुँचे, तो ब्रिटिश पुलिस ने उन पर क्या पाबंदी लगाई?
उत्तर: उन्हें शहर में खुलेआम उपदेश देने से रोक दिया गया। - 1857 में विद्रोह भड़कने के समय मौलवी अहमदुल्ला शाह को किस जेल में बंद रखा गया था?
उत्तर: फ़ैज़ाबाद जेल में। - फ़ैज़ाबाद जेल से रिहा होने के बाद मौलवी अहमदुल्ला शाह को किस सैन्य टुकड़ी ने अपना नेता चुना?
उत्तर: 22वीं नेटिव इन्फैंट्री के विद्रोहियों ने। - मौलवी अहमदुल्ला शाह ने अवध के किस विख्यात संघर्ष में हेनरी लॉरेंस की ब्रिटिश सेना को हराया था?
उत्तर: चिनहाट के युद्ध (संघर्ष) में। - चिनहाट के युद्ध में पराजित होने वाली ब्रिटिश टुकड़ी का नेतृत्व कौन कर रहा था?
उत्तर: हेनरी लॉरेंस। - आम जनता में मौलवी अहमदुल्ला शाह के बारे में क्या अलौकिक विश्वास फैला हुआ था?
उत्तर: कि उनके पास जादुई शक्तियाँ हैं और अंग्रेज उनका बाल भी बाँका नहीं कर सकते। - अंग्रेजों ने सिपाहियों को जो नई राइफलें दी थीं, उनका नाम क्या था?
उत्तर: एनफील्ड राइफल (Enfield Rifle)। - कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी होने की अफवाह का पहला लिखित स्रोत कहाँ के शस्त्रागार से मिला था?
उत्तर: कोलकाता के पास स्थित दमदम शस्त्रागार से। - दमदम स्थित राइफल इंस्ट्रक्शन डिपो के किस कमांडेंट ने चर्बी वाली घटना की आधिकारिक रिपोर्ट दी थी?
उत्तर: कैप्टन राइट ने। - कैप्टन राइट की रिपोर्ट के अनुसार किस सामाजिक विवाद के कारण चर्बी वाली अफवाह फैली थी?
उत्तर: दमदम शस्त्रागार में काम करने वाले एक ‘नीची जाति’ के खलासी और एक ब्राह्मण सिपाही के बीच लोटे से पानी पीने को लेकर हुए विवाद से। - खलासी ने ब्राह्मण सिपाही को अपनी जाति पर गर्व करने के जवाब में क्या ताना मारा था?
उत्तर: कि “जल्दी ही तुम्हारी जाति भ्रष्ट होने वाली है क्योंकि तुम्हें गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूस मुँह से खींचने पड़ेंगे।” - 1857 की शुरुआत में उत्तर भारत के बाज़ारों और छावनियों में बिकने वाले आटे को लेकर क्या अफवाह थी?
उत्तर: कि ब्रिटिश सरकार ने आटे में गाय और सूअर की हड्डियों का चूरा (पीसा हुआ रूप) मिलवा दिया है। - आटे और कारतूस की इन अफवाहों के पीछे भारतीयों के मन में ब्रिटिश सरकार के प्रति क्या गहरा संदेह था?
उत्तर: कि अंग्रेज सभी हिन्दुस्तानियों की जाति और धर्म नष्ट करके उन्हें बलपूर्वक ईसाई बनाना चाहते हैं। - विद्रोह के दौरान किस ऐतिहासिक भविष्यवाणी ने लोगों को 23 जून 1857 को बड़ी कार्रवाई के लिए प्रेरित किया?
उत्तर: यह भविष्यवाणी कि प्लासी के युद्ध के ठीक 100 साल पूरे होते ही भारत से ब्रिटिश राज खत्म हो जाएगा। - प्लासी की प्रसिद्ध लड़ाई किस तारीख को लड़ी गई थी जिसकी 100वीं वर्षगाँठ 1857 में थी?
उत्तर: 23 जून 1757 को। - 1849 के गवर्नर जनरल कौन थे जिन्होंने सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के तहत एनफील्ड राइफलें पेश की थीं?
उत्तर: हेनरी हार्डिंग (लॉर्ड हार्डिंग)। - 1857 के विद्रोह के दौरान उत्तर भारत के गाँवों में चपातियों (रोटियों) के वितरण की क्या रहस्यमयी प्रक्रिया चल रही थी?
उत्तर: रात में एक व्यक्ति आकर गाँव के चौकीदार को एक चपाती देता था और वैसी ही पाँच और चपातियाँ बनाकर अगले गाँवों में बाँटने का निर्देश देता था। - गाँवों में इस प्रकार चपातियाँ बाँटने का वास्तविक उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका कोई निश्चित उद्देश्य उस समय या आज भी स्पष्ट नहीं है, परंतु ग्रामीण इसे किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत मान रहे थे। - 1820 के दशक से किस ब्रिटिश गवर्नर जनरल के नेतृत्व में भारत में पश्चिमी शिक्षा और विचारों को लागू किया जा रहा था?
उत्तर: लॉर्ड विलियम बेंटिक के नेतृत्व में। - अंग्रेजों ने भारतीय समाज सुधार के नाम पर किस वर्ष ‘सती प्रथा उन्मूलन कानून’ पारित किया था?
उत्तर: वर्ष 1829 में। - सती प्रथा के अलावा अंग्रेजों ने किस अन्य सामाजिक सुधार को कानूनी वैधता प्रदान करने के लिए अधिनियम बनाया था?
उत्तर: हिन्दू विधवा विवाह को। - अंग्रेजों ने शासकीय दुर्बलता और गोद लेने की प्रथा (दत्तकता) को अवैध घोषित कर किन प्रमुख रियासतों को हड़प लिया था?
उत्तर: अवध, झाँसी और सतारा रियासत को। - ब्रिटिश कब्ज़े के बाद नए क्षेत्रों में कौन सी नई प्रणालियाँ थोपी जा रही थीं जिससे जनता असंतुष्ट थी?
उत्तर: ब्रिटिश कानून, भूमि विवाद निपटाने की नई पद्धति और कठोर भू-राजस्व वसूली प्रणाली। - ईसाई प्रचारकों (मिशनरियों) की गतिविधियों को भारतीय समाज किस दृष्टि से देखता था?
उत्तर: वे इसे अपने पारंपरिक सामाजिक-धार्मिक रीति-रिवाजों को नष्ट करने की साजिश मानते थे। - 1851 में किस ब्रिटिश गवर्नर जनरल ने अवध की रियासत के विषय में कहा था कि “यह गिलास फल (चेरी) एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा”?
उत्तर: लॉर्ड डलहौजी ने। - लॉर्ड डलहौजी की इस टिप्पणी के कितने वर्ष बाद अवध को ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा घोषित किया गया?
उत्तर: पाँच वर्ष बाद, 1856 में। - ब्रिटिश सरकार द्वारा अवध की रियासत पर ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) किस वर्ष थोपी गई थी?
उत्तर: वर्ष 1801 में। - भारत में ‘सहायक संधि’ की प्रसिद्ध व्यवस्था किस गवर्नर जनरल द्वारा और कब तैयार की गई थी?
उत्तर: लॉर्ड वेलेज़ली द्वारा, वर्ष 1798 में। - ‘सहायक संधि’ स्वीकार करने वाले भारतीय शासक (जैसे अवध के नवाब) पर कौन सी मुख्य शर्तें लागू होती थीं?
उत्तर: शासक अपनी सेना भंग कर दे, अपने राज्य में ब्रिटिश सेना रखे, उसका खर्च उठाए और ब्रिटिश रेज़िडेंट की सलाह पर काम करे। - ब्रिटिश औपनिवेशिक व्यवस्था के अंतर्गत ‘रेज़िडेंट’ (Resident) कौन होता था?
उत्तर: गवर्नर जनरल का वह प्रतिनिधि जिसे ऐसे भारतीय राज्यों में तैनात किया जाता था जो सीधे अंग्रेजों के नियंत्रण में नहीं थे। - अपनी सैनिक शक्ति छिन जाने के बाद अवध का नवाब राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह किस पर आश्रित हो गया?
उत्तर: ब्रिटिश हुकूमत और उसकी सेना पर। - अंग्रेजों की अवध को हड़पने में सबसे बड़ी आर्थिक और व्यावसायिक दिलचस्पी क्या थी?
उत्तर: अवध की भूमि नील और कपास की खेती के लिए अत्यंत उपजाऊ थी और वह उत्तर भारत का एक बहुत बड़ा बाज़ार था। - 1850 के दशक की शुरुआत तक ब्रिटिश साम्राज्य भारत के किन प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में ले चुका था?
उत्तर: मराठा भूमि, दोआब क्षेत्र, कर्नाटक, पंजाब और बंगाल को। - प्लासी और बक्सर के बाद शुरू हुई ब्रिटिश क्षेत्रीय विस्तार की प्रक्रिया 1856 में किसके अधिग्रहण के साथ पूर्ण हुई?
उत्तर: अवध के अधिग्रहण (Annexation of Awadh) के साथ। - अवध के अंतिम स्वतंत्र नवाब कौन थे जिन्हें कुशासन का आरोप लगाकर अंग्रेजों ने गद्दी से हटा दिया था?
उत्तर: नवाब वाजिद अली शाह। - नवाब वाजिद अली शाह को गद्दी से बेदखल करने के बाद अंग्रेजों ने कहाँ निष्कासित (निर्वासित) कर दिया था?
उत्तर: कलकत्ता (कोलकाता) में। - नवाब वाजिद अली शाह के लखनऊ से विदा होते समय जनता की क्या भावनात्मक प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: पूरा शहर शोक में डूब गया था और बहुत सारे लोग रोते-बिलखते हुए नवाब के पीछे कानपुर तक गए थे। - नवाब की विदाई पर एक समकालीन प्रेक्षक ने मर्मस्पर्शी शब्दों में क्या लिखा था?
उत्तर: “देह से जान जा चुकी थी। शहर की काया बेजान थी… कोई सड़क, कोई बाज़ार ऐसा न था जहाँ विलाप का शोर न गूँज रहा हो।” - नवाब वाजिद अली शाह की लोकप्रिय उपाधि या उपनाम क्या था, जिसका उल्लेख गीतों में मिलता है?
उत्तर: ‘जान-ए-आलम’। - अवध की जनता द्वारा गाए जाने वाले एक प्रसिद्ध शोकगीत के बोल क्या थे जो ब्रिटिश न्याय की पोल खोलते थे?
उत्तर: “अंग्रेज बहादुर आइन, मुल्क लई लीह्रों।” - नवाब को हटाए जाने से अवध के किस सांस्कृतिक और कलात्मक वर्ग की आजीविका पूरी तरह नष्ट हो गई?
उत्तर: संगीतकारों, नर्तकों, कवियों, कुशल कारीगरों, बावरचियों और दरबारी कर्मचारियों की। - अवध में अंग्रेजों का यह अधिग्रहण केवल नवाब की गद्दी छीनने तक सीमित नहीं था, इसने ग्रामीण क्षेत्रों में किस शक्तिशाली वर्ग को लाचार कर दिया?
उत्तर: अवध के पारंपरिक ताल्लुकदारों (Taluqdars) को। - ब्रिटिश शासन की स्थापना से पूर्व अवध के ताल्लुकदारों की ग्रामीण क्षेत्रों में क्या स्थिति थी?
उत्तर: वे पीढ़ियों से अपने इलाकों में ज़मीन और स्थानीय सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण रखते थे, उनके पास अपने किले और हथियारबंद सिपाही होते थे। - अंग्रेजों के आने से पहले अवध के कुछ बड़े ताल्लुकदारों के पास कितने सशस्त्र सैनिकों की फौज होती थी?
उत्तर: लगभग 12,000 तक पैदल सिपाहियों की सेना। - अवध के सबसे छोटे ताल्लुकदारों के पास भी आमतौर पर कितने सैनिकों की सैन्य टुकड़ी सुरक्षा में तैनात रहती थी?
उत्तर: लगभग 200 सिपाहियों की टुकड़ी। - अवध पर कब्ज़े के तुरंत बाद अंग्रेजों ने ताल्लुकदारों की शक्ति को कुचलने के लिए क्या प्रशासनिक कदम उठाए?
उत्तर: ताल्लुकदारों की सेनाएँ भंग कर दी गईं और उनके मिट्टी व पत्थर के दुर्ग (किले) ध्वस्त कर दिए गए। - ब्रिटिश सरकार ने अधिग्रहण के फ़ौरन बाद 1856 में अवध में कौन सी नई भू-राजस्व व्यवस्था लागू की थी?
उत्तर: एकमुश्त बंदोबस्त (Summary Settlement)। - ब्रिटिश भू-राजस्व अधिकारियों का ‘एकमुश्त बंदोबस्त’ नीति के पीछे क्या वैचारिक तर्क था?
उत्तर: उनका मानना था कि ताल्लुकदार केवल अवैध बिचौलिए हैं जिनके पास ज़मीन का मालिकाना हक नहीं है और उन्होंने बलपूर्वक कब्ज़ा किया है। - ब्रिटिश आँकड़ों के अनुसार, अंग्रेजों के आने से पहले अवध के कुल कितने प्रतिशत गाँव ताल्लुकदारों के नियंत्रण में थे?
उत्तर: लगभग 67 प्रतिशत गाँव। - 1856 में ‘एकमुश्त बंदोबस्त’ लागू होने के बाद ताल्लुकदारों के अधीन गाँवों की संख्या घटकर कितनी रह गई?
उत्तर: मात्र 38 प्रतिशत। - मेरठ छावनी में सिपाहियों ने किस तारीख को विद्रोह शुरू किया था?
उत्तर: 10 मई 1857 की दोपहर बाद। - मेरठ के विद्रोही सिपाही दिल्ली के लाल किले के फाटक पर किस तारीख को तड़के पहुँचे?
उत्तर: 11 मई 1857 को। - 11 मई 1857 को जब सिपाही लाल किला पहुँचे, तब मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर क्या करके उठे थे?
उत्तर: वे नमाज़ पढ़कर और सहरी खाकर उठे थे (रमज़ान का महीना था)। - सिपाहियों ने बहादुर शाह जफर से विद्रोह का नेतृत्व संभालने के लिए क्या तर्क दिया था?
उत्तर: अंग्रेजों ने उन्हें गाय और सुअर की चर्बी वाले कारतूस दांतों से खींचने पर मजबूर किया, जिससे उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। - दिल्ली पर बागियों का कब्ज़ा होने के बाद उत्तर भारत में किस तारीख को पूरी तरह शांति रही?
उत्तर: 12 और 13 मई को। - विद्रोह के दौरान छावनियों में विद्रोह शुरू करने के लिए सामान्यतः क्या संकेत दिए जाते थे?
उत्तर: शाम के समय तोप का गोला दागना या बिगुल बजाना। - विद्रोह की शुरुआत में सिपाहियों का पहला निशाना क्या होता था?
उत्तर: शस्त्रागार (Armoury) पर कब्ज़ा करना और सरकारी खजाने को लूटना। - ‘फिरंगी’ शब्द मूल रूप से किस भाषा का है और इसका क्या अर्थ निकाला जाता था?
उत्तर: यह फारसी भाषा का शब्द है, जो ‘फ्रैंक’ (फ्रांस) से निकला है; इसका प्रयोग पश्चिमी लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए अपमानजनक दृष्टि से भी किया जाता था। - 1857 के विद्रोह में लखनऊ, कानपुर और बरेली जैसे बड़े शहरों में आम जनता के गुस्से का शिकार कौन बने?
उत्तर: साहूकार और अमीर लोग, जिन्हें किसान अपना उत्पीड़क और अंग्रेजों का पिट्ठू मानते थे। - “ब्रिटिश शासन ताश के किले की तरह बिखर गया” – यह कथन किसका है?
उत्तर: एक ब्रिटिश अफसर का (मई-जून के महीनों के संदर्भ में)। - कानपुर में बगावत की बागडोर सिपाहियों और जनता ने किसके हाथों में सौंपी थी?
उत्तर: पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी नाना साहिब के हाथों में। - झांसी में रानी लक्ष्मीबाई को बगावत का नेतृत्व क्यों संभालना पड़ा?
उत्तर: आम जनता के भारी दबाव के कारण। - बिहार के आरा (Arrah) में विद्रोह का नेतृत्व किस स्थानीय जमींदार ने किया था?
उत्तर: कुँवर सिंह ने। - 1858 के अंत में जब विद्रोह विफल हो गया, तो नाना साहिब भागकर कहाँ चले गए?
उत्तर: नेपाल। - छोटा नागपुर स्थित सिंहभूम के किस आदिवासी काश्तकार ने कोल आदिवासियों का नेतृत्व संभाला था?
उत्तर: गोनू (Gonoo) ने। - 7वीं अवध इर्रेगुलर कैवलरी ने मई की शुरुआत में नए कारतूसों का इस्तेमाल करने से मना करके किस इन्फैंट्री को पत्र लिखा था?
उत्तर: 48वीं नेटिव इन्फैंट्री को। - अवध मिलिट्री पुलिस के किस कैप्टन की सुरक्षा का ज़िम्मा भारतीय सिपाहियों पर था, जिसे 41वीं नेटिव इन्फैंट्री मारना या गिरफ्तार करना चाहती थी?
उत्तर: कैप्टन हियर्से (Captain Hearsey)। - सिपाहियों के बीच फैसलों के लिए बुलाई जाने वाली पंचायतें रात के समय कहाँ जुटती थीं?
उत्तर: कानपुर सिपाही लाइनों में। - “सिपाही लाइनों में पंचायतें जुटती थीं” – यह विवरण किस शुरुआती इतिहासकार ने लिखा है?
उत्तर: चार्ल्स बॉल (Charles Ball) ने। - सीतापुर के किस देसी ईसाई पुलिस इंस्पेक्टर का अनुभव विद्रोह के संदर्भ में महत्वपूर्ण साक्ष्य देता है?
उत्तर: फ्रांस्वां सिस्तन (Francois Sistan)। - सिस्तन से सहारनपुर में मुलाकात के दौरान किस क्षेत्र के मुस्लिम तहसीलदार ने कहा था, “भरोसा रखो, इस बार हम कामयाब होंगे”?
उत्तर: बिजनौर के तहसीलदार ने (जो बाद में बिजनौर के विद्रोहियों का सबसे बड़ा नेता निकला)। - राइफल इंस्ट्रक्शन डिपो के किस कमांडेंट ने जनवरी 1857 में कारतूसों को लेकर खलासी और ब्राह्मण सिपाही के बीच हुई बातचीत की रिपोर्ट दी थी?
उत्तर: कैप्टन राइट (Captain Wright) ने। - कैप्टन राइट की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 1857 के तीसरे हफ्ते में यह घटना कहाँ के शस्त्रागार में घटी थी?
उत्तर: दमदम (Dum Dum) स्थित शस्त्रागार में। - उत्तर भारत के बाजारों में बिकने वाले आटे को लेकर क्या अफवाह फैली थी?
उत्तर: अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों का धर्म नष्ट करने के लिए आटे में गाय और सुअर की हड्डियों का चूरा मिलवाया है। - विद्रोह के समय किस युद्ध के 100 साल पूरे होने पर अंग्रेजी राज खत्म होने की भविष्यवाणी की गई थी?
उत्तर: प्लासी की जंग (23 जून 1857) के 100 साल पूरे होने पर। - उत्तर भारत के गाँवों में रात के समय कौन सी चीज़ बाँटने की रिपोर्टें आ रही थीं, जिसे लोग उथल-पुथल का संकेत मान रहे थे?
उत्तर: चपातियाँ (रोटियाँ)। - 1820 के दशक से किस ब्रिटिश गवर्नर जनरल के नेतृत्व में पश्चिमी शिक्षा, विचारों और सती प्रथा उन्मूलन (1829) जैसी नीतियां लागू की जा रही थीं?
उत्तर: लॉर्ड विलियम बेंटिंक। - ब्रिटिश अधिकारियों ने किस नीति या बहानों के तहत झांसी और सतारा जैसी रियासतों को अपने कब्ज़े में ले लिया था?
उत्तर: शासकीय दुर्बलता और दत्तकता (गोद लेने की प्रथा) को अवैध घोषित करके (हड़प नीति/Doctrine of Lapse)। - 14 जून 1857 को दिल्ली के बाज़ारों में कद्दू, बैंगन, आलू और पानी भरने वालों की हड़ताल से उत्पन्न बदहाली की रिपोर्ट किस अखबार ने छापी थी?
उत्तर: दिल्ली उर्दू अख़बार ने। - ब्रिटिश सैनिक साजो-सामान के आधुनिकीकरण के तहत एनफील्ड राइफलों का इस्तेमाल किस गवर्नर जनरल ने शुरू करवाया था?
उत्तर: हेनरी हार्डिंग (Henry Hardinge) ने। - 1851 में किस गवर्नर जनरल ने अवध की रियासत के बारे में कहा था कि “ये गिलास फल (Cherry) एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा”?
उत्तर: लॉर्ड डलहौजी ने। - अंग्रेजों ने औपचारिक रूप से अवध को किस वर्ष ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित किया?
उत्तर: 1856 में। - अवध में लॉर्ड वेलेज़ली द्वारा किस वर्ष ‘सहायक संधि’ (Subsidiary Alliance) थोपी गई थी?
उत्तर: 1801 में। - अवध के किस लोकप्रिय नवाब को ‘कुशासन’ का आरोप लगाकर गद्दी से हटाकर कलकत्ता निष्कासित कर दिया गया था?
उत्तर: नवाब वाजिद अली शाह को। - नवाब वाजिद अली शाह के निष्कासन पर लखनऊ की जनता के विलाप को किस प्रसिद्ध मुहावरे से व्यक्त किया गया था?
उत्तर: “देह से जान जा चुकी थी”। - अवध के अधिग्रहण के बाद अंग्रेजों ने 1856 में कौन सी नई भू-राजस्व व्यवस्था लागू की, जिसने तालुकदारों को बेदखल कर दिया?
उत्तर: एकमुश्त बंदोबस्त (Summary Settlement)। - ब्रिटिश आँकड़ों के अनुसार, ‘एकमुश्त बंदोबस्त’ लागू होने से पहले तालुकदारों के पास अवध के कितने प्रतिशत गाँव थे और बाद में कितने रह गए?
उत्तर: पहले 67 प्रतिशत थे, जो घटकर मात्र 38 प्रतिशत रह गए। - “बंगाल आर्मी की पौधशाला” (Nursery of the Bengal Army) किसे कहा जाता था?
उत्तर: अवध को (क्योंकि बंगाल आर्मी के अधिकांश सिपाही अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँवों से भर्ती थे)। - अवध में अंग्रेजों के खिलाफ लंबे प्रतिरोध के दौरान तालुकदार और किसान किसकी सहायता के लिए लखनऊ जाकर उनके खेमे में शामिल हुए?
उत्तर: नवाब की पत्नी बेगम हज़रत महल के खेमे में। - रायबरेली के पास स्थित कालाकांकर के किस राजा ने एक ब्रिटिश अफसर को पनाह दी, लेकिन बाद में उनसे देश से खदेड़ने की बात कही थी?
उत्तर: राजा हनुवन्त सिंह ने। - उत्तर प्रदेश के बड़ौत परगना के चौरासी देस (84 गाँवों) के जाटों और काश्तकारों को संगठित करने वाले स्थानीय नेता कौन थे?
उत्तर: शाह मल (जिन्होंने जुलाई 1857 में युद्ध में मारे जाने से पहले एक अंग्रेज अधिकारी के बंगले को “न्याय भवन” बनाया था)। - ‘डंका शाह’ के नाम से प्रसिद्ध वह मौलवी कौन थे, जिन्होंने 1856 में अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद का प्रचार किया और जिन्हें बाद में फैजाबाद जेल में बंद किया गया था?
उत्तर: मौलवी अहमदउल्ला शाह। - मौलवी अहमदउल्ला शाह ने किस विख्यात संघर्ष में हिस्सा लिया था, जिसमें हेनरी लॉरेंस की अगुवाई वाली ब्रिटिश टुकड़ियों को मुंह की खानी पड़ी थी?
उत्तर: चिनहट का युद्ध (Battle of Chinhat)। - विद्रोहियों के दृष्टिकोण और उनकी माँगों को जानने का सबसे मुख्य ऐतिहासिक स्रोत कौन सा दस्तावेज़ है?
उत्तर: आजमगढ़ घोषणा (25 अगस्त 1857)। - आज़मगढ़ घोषणा के भाग-4 में किस वर्ग की दुर्दशा का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि “इंग्लैंड में बनी चीज़ों को ला-लाकर हमारे लोगों को बेरोज़गार कर दिया गया है”?
उत्तर: देशी कारीगरों और बुनकरों के बारे में। - अंग्रेजों ने दिसंबर 1857 में उत्तर प्रदेश के किस स्थान पर हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काने के लिए ₹50,000 खर्च किए, लेकिन नाकाम रहे?
उत्तर: बरेली में। - अंग्रेजों ने मई और जून 1857 में पूरे उत्तर भारत में कानून की सामान्य प्रक्रिया रद्द करके कौन सा सख्त कानून लागू किया था?
उत्तर: मार्शल लॉ (सैन्य कानून)। - ब्रिटिश सरकार ने विद्रोही राजधानी दिल्ली को दोबारा पूरी तरह अपने कब्ज़े में लेने की मुहिम किस महीने के आखिर में पूरी कर पाई थी?
उत्तर: सितंबर 1857 के आखिर में (यह मुहिम जून 1857 में बड़े पैमाने पर शुरू हुई थी)। - अवध के किस ब्रिटिश अफसर का अनुमान था कि विद्रोह के समय वहाँ की कम से कम तीन-चौथाई वयस्क पुरुष आबादी विद्रोह में शामिल थी?
उत्तर: फॉरिसिथ (Forisith) नामक ब्रिटिश अफसर का। - 1859 में थॉमस जोन्स बार्कर द्वारा बनाया गया वह कौन सा प्रसिद्ध चित्र है, जो लखनऊ की घेराबंदी के बाद ब्रिटिश सत्ता की बहाली का जश्न मनाता है?
उत्तर: ‘रिलीफ ऑफ लखनऊ’ (The Relief of Lucknow)।